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jamshedpur-community-जमशेदपुर में मनाया गया नुआखाई उत्सव, जानें क्यों मनाया जाता है यह त्योहार

राशिफल

जमशेदपुर : नुआखाई का त्योहार फसलों की अच्छी पैदावार की खुशी के उपरांत प्राचीन मान्यताओं के अनुसार पश्चिम ओड़िशा में विशेष रुप से धूमधाम से वहां की कुलदेवी माता समलेश्वरी की विशेष पूजा अर्चना की जाती है. साथ ही घरों में विशेष पूजा अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं. नए अनाज से तरह-तरह के घरों में पकवान बनाए जाते हैं जिसका लोग आनंद उठाते हैं. इस दिन घर के बड़े पुत्र एवं पुत्रवधु विधिवत इष्ट देवता एवं अपने पितरों की पूजा उपासना के उपरांत घर के बड़े बुजुर्गों से आशीर्वाद प्राप्त करते हैं एवं इस त्योहार को हर्षोल्लास के साथ श्रद्धा एवं आस्थापूर्वक मनाते हैं. यह त्योहार जमशेदपुर में भी विशेष श्रद्धा एवं उत्साहपूर्वक मनाने की पुरानी परंपरा है. गणेश चतुर्थी के ठीक दूसरे दिन पंचमी के दिन नुआखाई त्योहार को मनाने का रिवाज है. इस दिन परंपरा के अनुरूप कुमारी एवं विवाहित महिला है, नदी के पवित्र बालू एवं जल की पूजा अर्चना कर कुलदेवी के घर में स्थापित करती हैं, जिसमें नए अनाजों के बीज प्रत्यारोपित किए जाते हैं. ठीक 6 दिन के बाद भादो एकादशी को विशेष उत्साह और श्रद्धा पूर्वक कर्मा पूजा का आयोजन धूमधाम से किया जाता है. इस पूजा अनुष्ठान में विशेष रुप से पुजारी यानी तहरी पुजारिन मात्रा का विशेष योगदान रहता है. बालू खुदाई से लेकर मंदिर में स्थापना तक देहरी की देखरेख में विशेष पूजा अनुष्ठान किए जाते हैं. 6 दिन के बाद जब यह अनाज अंकुरित होते हैं कब माई भुजली पूजा अनुष्ठान का आयोजन होता है. इसमें इष्ट देवी कर्मसानी को आह्वान किया जाता है. देहरी द्वारा विधिवत आह्वान के बाद पूजा किए जाता हैं और ठीक इसके दूसरे दिन 17 सितंबर को एकादशी के दिन विशेष अनुष्ठान के तहत कर्मा पूजा का विधिवत आयोजन किया जाएगा. जमशेदपुर में भालुबासा मुखी समाज बस्ती में 108 वर्षों से यह पूजा आयोजित की जाती रही है. इस वर्ष में उत्साह पूर्ण वातावरण में यह त्योहार मनाया जा रहा. पूजा अनुष्ठान में मुख्य रूप से भादो एकादशी कर्मा पूजा एवं नुआखाई समिति के तत्वाधान में मुख्य रूप से आयोजित किया गया, जिसमें मुख्य रूप से सलाहकार के रूप में जय सागर बागदल कुमार, जे बेहरा, सुग्रिव मुखी, पीके लाल डूंगरी, षष्टि कुम्हार, कृष्णा मुखी, परेश मुखी, शत्रुघ्न नायक, छोटेलाल मुखी, शंभू कोलेक, छवि नायक, देवचरण सागर, राजन अध्यक्ष -के रूप में सुशील कुमार मुखी, उपाध्यक्ष-शंभू मुखी डूंगरी ,सुरेश्वर सागर पिंके, महामंत्री- नदीप मुखी ,सचिव- विनोद सागर ,कोषाध्यक्ष -सुभाष मुखी ,शंकर सागर देहरी (पुजारी)- गणेश सागर ,सहयोगी देहरी महेश सागर , देहरी माता( पुजारिन) -रुकमणी देवी के अलावा इस पूजा अनुष्ठान समिति को विशेष सहयोग प्राप्त हुआ. सरयू मुखी, सन्नी मुखी, चंदन महानंद, सोनू, रोशन मुखी, बिरजू मुखी, रोहन डूंगरी, देव बांग, महिलाओं में मुख्य रूप से सुरेश्वरी सागर, संगीता देवी ,शांति देवी ,उरकुल देवी ,रुकमणी देवी, सरोजिनी देवी, मीरा सागर, आरती देवी ,हेमा देवी का विशेष सहयोग रहा.

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