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गुरूवार, जून 17, 2021
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jamshedpur-dhatkidih-harijan-basti-धातकीडीह ‘हरिजन बस्ती व मेडिकल बस्ती’ की मुंबई के ‘धारावी’ जैसी खतरनाक हालात, समाज के अंतिम पायदान पर खड़े लोग तिल-तिलकर मरने को बेबस, अब तक 158 कोरोना पोजिटिव, प्रशासनिक चूक से बढ़ा घनी आबादी वाले हरिजनों की बस्ती में कोरोना, लोग अब दाने-दाने को मोहताज, बढ़ सकता है कोरोना का संक्रमण व मौत, भूखमरी भी लील सकती है जानें, सरकार तत्काल उठाये जरूरी कदम, जानें क्या है दर्द-video

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धातकीडीह हरिजन बस्ती का देखिये हालात.

जमशेदपुर : जमशेदपुर के धातकीडीह स्थित हरिजन बस्ती व मेडिकल बस्ती कोरोना को लेकर काफी खतरनाक हालात में पहुंच चुका है. मुंबई के धारावी में जिस तरह कोरोना का संक्रमण फैला था और जिस तरह की बस्ती मुंबई की धाराही है, उसी तरह की बस्ती धातकीडीह का हरिजन बस्ती और मेडिकल बस्ती है. इस बस्ती में घरें सटी हुई है. एक कमरे का मकान सब है और सभी में दस से पंद्रह लोग भी रहते है. अधिकांश निचले तबके के हरिजन लोग रहते है. समाज के अंतिम व्यक्ति तक भले ही प्रशासनिक सुविधा पहुंचाने का दावा सरकार करती हो, लेकिन इस बस्ती में कुछ भी नहीं पहुंचा है. पिछड़ा होने के कारण अधिकांश नशे के आदि है. यहां के अधिकांश लोगों का काम टीएमएच समेत अन्य अस्पतालों में सफाई का काम करने से लेकर स्वीपर का काम करना है.

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एक बड़ी और घनी आबादी वाली इस बस्ती में कोरोना ने ऐसा कोहराम मचा दिया है कि लोग तिल-तिलकर मरने को बेबस हो चुके है. यहां अब तक 158 कोरोना पोजिटिव केस आ चुके है जबकि कई मौतें भी हो चुकी है. पहले धातकीडीह हरिजन बस्ती के 97 लोग पोजिटिव आ चुके थे तो दूसरे दिन 25 और फिर तीसरे दिन 36 लोग कोरोना पोजिटिव पाये गये. स्थानीय लोगों का कहना है कि इस बस्ती में प्रशासनिक चूक के कारण ही इतनी महामारी फैली है. अज्ञानता भी इस बस्ती में है और प्रशासन की भी अनदेखी है. दरअसल, जब पहला केस कोरोना पोजिटिव का आया तो उस बस्ती के एक व्यक्ति को अस्पताल में भरती कराया गया, लेकिन ना तो कोई सीलिंग की गयी और ना ही परिवार वालों का ही कोरोना टेस्ट कराया गया.

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बस्ती में किस तरह का रहन सहन है, देख सकते है.

करीब एक सप्ताह से दस दिनों के बाद उसके परिवार का टेस्ट कराया गया. जब टेस्ट हुआ तो परिजन भी पोजिटिव आये, लेकिन चूंकि टेस्टिंग देर से हुई, इस कारण तब तक परिजन लोगों से मिलते रहे. घनी आबादी और शौचालय तक की दिक्कत का सामना करने वाली बस्तियों में लोग एक साथ ही रहते रहे, जिससे यह संक्रमण बढ़ता गया. अस्पतालों में काम करने के दौरान भी कई लोग कोरोना पोजिटिव हो गये. अब हालात यह है कि 158 लोग कोरोना पोजिटिव हो गये है. अब उनको कोई सफाई के काम पर भी नहीं बुला रहा है. अछूत हो चुके है और अब उनके समक्ष दाने-दाने के लाले पड़ चुके है. खाने की भी दिक्कतें हो चुकी है. हालात पर अगर सरकार ने त्वरित एक्शन नहीं लिया तो वहां आत्महत्याएं और भूख से मौत जैसी वारदातें होने लगेगी.

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