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jamshedpur- चाईबासा के पूर्व सिविल सर्जन डॉ फकीर चंद्र हेंब्रम गिरफ्तार, जाएंगे जेल, पारा मेडिकल कर्मियों की बहाली में धांधली के आरोप

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चाईबासा/ जमशेदपुरः वर्ष 2005 में हुई अवैध बहाली के मामले में लोकायुक्त, झारखंड की जांच के बाद पिछले वर्ष सदर थाने में उनके विरुद्ध मामला दर्ज कराया गया था. पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए उन्हें जमशेदपुर स्थित परसुडीह आवास से गिरफ्तार किया है.विदित हो कि जिले में 20 फार्मासिस्ट, 100 से ज्यादा एएनएम और 6 प्रयोगशाला सहायकों की बहाली में मेधा सूची में गड़बड़ी की गई थी और आरक्षित कोटि के खाली पड़े पदों पर अनारक्षित कोटि के लोगों को डॉक्टर पीसी हेंब्रम द्वारा बहाल कर दिया गया था, जिसका खुलासा आरटीआई कार्यकर्ता बुधराम लागुरी द्वारा राज्य सूचना आयोग से प्राप्त सूचना में हुआ था. यही नहीं प्रयोगशाला सहायक के पद पर दो ऐसे लोगों को बहाल कर दिया गया था जिन्होंने कभी किसी साक्षात्कार में भाग लिया ही नहीं. जिसके बाद आरटीआई कार्यकर्ता ने इसकी शिकायत लोकायुक्त झारखंड से की थी और लोकायुक्त की जांच के बाद मामला सही पाया गया था. इस मामले में पूर्व सिविल सर्जन डॉक्टर ओम प्रकाश गुप्ता ने तत्कालीन उपायुक्त अरवा राजकमल के अनुमोदन पर सदर थाने में द्वारा सितंबर 2020 में प्राथमिकी दर्ज कराई थी. डॉक्टर फकीर चंद्र हेंब्रम के खिलाफ आईपीसी की धारा 466/468 और 471 के साथ 13(1) डी भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी. जिस पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने उन्हें उनके जमशेदपुर स्थित आवास से गिरफ्तार कर लिया.शिकायत के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरु की थी. मामले की जांच एसडीपीओ अमर कुमार पांडेय कर रहे थे. इसको लेकर गुरुवार को सदर थाना की पुलिस परसुडीह पहुंची और प्रमथनगर स्थित उनके आवास से उन्हे गिरफ्तार कर चाईबासा ले गई.
क्या है मामलाः साल 2005 में पश्चिमी सिंहभूम जिले में आरक्षण रोस्टर का अनुपालन किए बगैर फर्जी मेधा सूची के आधार पर 12 फार्मासिस्टों की अवैध तरीके से नियुक्ति कर दी गई थी. इसमें 20 पद के विरुद्ध 12 सामान्य श्रेणी के वैसे अभ्यर्थी जिनका चयन सूची मे नही था उनका भी चयन कर दिया गया था. लैब टेक्नीशियन के 6 स्वीकृत पद पर 4 चयन सूची के अलावा 2 अभ्यर्थी की नियुक्ति फर्जी मेधा सूची तैयार कर अनुसूचित जनजाति के लिए चिन्हित आरक्षित पद के विरुद्ध की गई. इसमें मेधा सूची और आरक्षण रोस्टर का पालन नहीं किया गया था. सामाजिक कार्यकर्ता बुधराम लागुरी द्वारा लोकायुक्त में शिकायत करने के बाद कोल्हान प्रमंडल के आयुक्त द्वारा 4 सदस्य टीम की गठन कर जांच कराई गई थी. इसमें पाया गया कि तत्कालीन सीएस फकीर चंद्र हेंब्रम की पूरे मामले में मिलीभगत है. समिति की रिपोर्ट के आधार पर स्वास्थ्य विभाग ने 12 अभ्यर्थियों की नियुक्ति को अवैध घोषित कर मुकदमा दर्ज कराने का निर्देश दिया था.

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