जमशेदपुर पूर्वी में कमलेश साहू और पवन अग्रवाल की जंग पुरानी, मिथलेश यादव को हटाने को लेकर शुरू हुई है नाराजगी, रघुवर के कार्यकर्ताओं में गुटबाजी तेज

Advertisement
Advertisement

जमशेदपुर : जमशेदपुर पूर्वी विधानसभा झारखंड की वीआईपी सीट मानी जाती है. इसकी वजह है यहां से रघुवर दास जैसे कद्दावर नेता का चार बार से विधायक चुना जाना और उनका मंत्री से लेकर मुख्यमंत्री बनना बड़ा कारण है. लेकिन मुख्यमंत्री बनने के बाद भाजपा के नेताओं में पावर की लड़ाई शुरू है. इसकी लड़ाई सबसे पहले तब शुरू हुई जब विधायक प्रतिनिधि पवन अग्रवाल बने और मिथलेश सिंह यादव को हटाया गया. अपने व्यवहार कुशल होने के कारण मिथलेश सिंह यादव की अलग छवि है और मिथलेश यादव खुद जनता से सम्पर्क में रहते थे. इसको लेकर नाराजगी मुख्यमंत्री के ही कार्यकर्ताओं में थी क्योंकि पवन अग्रवाल के पास काम लेकर जाने वाले को ही डांट देने की परिपाटी शुरू हो गई. बताया जाता है कि पवन अग्रवाल के पास मुख्यमंत्री के भतीजे कमलेश साहू कोई काम लेकर चले गए थे और पवन ने उसको हटा दिया था. उस वक़्त से ही यह लड़ाई शनिवार की रात की घटना को अंजाम दिया गया. हालांकि, मुख्यमंत्री की कोर कमेटी में अलग-अलग खेमा काम करने लगा है. इसको सम्भालने की जरूरत है. वैसे आपको बता दे कि रघुवर दास को जिताने में जितनी मेहनत कोर कमेटी की है या करती है, उतना ही कमलेश साहू और राजा साहू जैसे उनके पारिवारिक कार्यकर्ता भी मेहनत किये है, जिसको सिरे से नकारा नही जा सकता है. मुख्यमंत्री रघुवर दास के नजदीकी लोगों के बीच जबरदस्त गुटबाजी है. दोनों ही गुट के बीच एक दूसरे के बीच लड़ाई होती रही है. पवन अग्रवाल, कमलेश सिंह, गुंजन यादव, संजीव सिंह, भूपेंद्र सिंह जैसे कई नेता एक साथ है जबकि चंद्रशेखर मिश्रा, मिथलेश सिंह यादव, कुलवंत सिंह बंटी सरीखे नेता अलग-अलग है.

Advertisement
Advertisement
Advertisement

Advertisement
Advertisement
Advertisement

Advertisement
Advertisement

Advertisement
Advertisement
Advertisement

Advertisement