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रविवार, जून 20, 2021
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jamshedpur-east-mla-saryu-roy-जमशेदपुर पूर्वी के विधायक सरयू राय बिजली को लेकर हुए लाल, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को लिखा त्राहिमाम पत्र, कहा-अरबो खर्च हो गये है जमशेदपुर पूर्वी में, लोगों को नहीं मिल रही बिजली, जानिये क्या दिया सुझाव सरयू राय ने

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जमशेदपुर पूर्वी के विधायक सरयू राय.

जमशेदपुर : जमशेदपुर पूर्वी विधानसभा क्षेत्र में लोग बिजली की आंख मिचौनी से परेशान है. गर्मी काफी ज्यादा और ऊपर से लॉकडाउन और घरों में बिजली भी नहीं, यह परेशानी लगातार बढ़ती चली गयी तो वहां के विधायक सरयू राय कैसे चुप बैठते. उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को त्राहिमाम पत्र लिख दिया है. इस पत्र में सरयू राय ने कहा है कि बीती रात 11 बजे के बाद से उनके विधानसभा क्षेत्रों बिरसानगर-मोहरदा इलाक़े में बिजली की स्थिति ख़राब है. बिजली का आना जाना लगातार होते रहने से लोग परेशान हैं. पानी की आपूर्ति प्रभावित है. बच्चे, बूढ़े, बीमार लोगों के लिये त्राहि माम की स्थिति हो गई है. काफ़ी मशक़्क़त के बाद सोमवार की दोपहर 3.30 बजे बिजली आई है. कब तक रहेगी इसे लेकर लोग आशंकित हैं. जानकारी मिलते ही सरयू राय ने जेबीभीएनएल के कार्यपालक अभियंता, अधीक्षण अभियंता, महाप्रबंधक से संपर्क किया. पता चला कि नया बने आस्था पावर सबस्टेशन का केबुल कहीं पंक्चर हो गया है. ठेकेदार वोल्टास की केबुल पंक्चर डिटेक्शन मशीन आयेगी तब बन सकेगा. तीन दिन लगेंगे. कोरोना के कारण वोल्टास के कर्मी जमशेदपुर छोड़कर चले गये हैं. सवाल यह है कि पिछले 5 वर्ष पहले 5000 करोड़ रुपये का क़र्ज़ लेकर राज्य के शहरी एवं ग्रामीण इलाक़ों में बिजली व्यवस्था ठीक करने के लिये बड़े-बड़े ठेकेदार बहाल हुए. जमशेदपुर का काम वेल्टास को मिला. केबुल बिछाने, भूमिगत केबुल डालने, ट्रांसफ़ॉर्मर बदलने का काम इनका था. उन्होंने कहा कि वे गत एक साल से देख रहे है, इनके काम के प्रति लोगों में संतोष नहीं है. उन्होंने कहा है कि वे अक्सर लोगों की शिकायतें बिजली विभाग के अधिकारियों को भेजते ररहते है. उन्होंने कहा है कि उनका निष्कर्ष है कि बिजली विभाग के अधिकारी भी बड़े ठेकेदारो पर नियंत्रण नहीं कर पा रहे हैं. इन्हें निर्देश कम और अनुनय विनय ज़्यादा करना पड़ रहा है. सरकारी देखरेख में निजी क्षेत्र के काम का असफल मॉडल यहां दिख रहा है. कैसे सुधार होगा यह देखना आप के स्तर से ही संभव है, पहले की तरह. आप पहल करें, स्थिति सुधारें इसलिये आपको सीधे लिख रहा है. उन्होंने बताया है कि विगत एक साल में कई छोटे काम पूर्वी जमशेदपुर में बिजली के क्षेत्रों हुए. पर ये काम प्रभावी नहीं हो रहे हैं. कठिनाई आती है तो पता लगता है कि सब किया धरा बेकार साबित हो रहा है. जमशेदपुर के बिरसानगर, आस्था, गोविन्दपुर पावर सब स्टेशन को अलग कर ऐसी व्यवस्था बनी कि कहीं एक जगह ख़राबी होगी तो उसकी पूर्ति दूसरी जगह से हो जायेगी. पर कल रात से आस्था पावर सबस्टेशन का केबुल पंक्चर होने के बाद समन्वय की यह व्यवस्था कारगर नहीं हुई तो आख़िर क्यों? सबसे नया बने आस्था पावर सब स्टेशन का हाल मे हुआ केबुलीकरण पंक्चर कैसे हुआ? क्या वहां लगाया गया केबुल स्तरीय नहीं है? निर्माण की गुणवत्ता में कैसी कमी आ गई ? सरकारी क्षेत्रों अभियंता अधिक सक्षम हैं. पर उन्हें अपने से कम क्षमता बुद्धिमता वाले निजी क्षेत्र के सिस्टम मैनेजरों के सामने. बिजली अब एक आवश्यक आवश्यकता बन गई है. इसका सिस्टम और कार्य संस्कृति सुधारनी होगी. नहीं तो ऊपर में प्लानिंग, डिज़ाइन के नाम पर अरबों खर्च हो जाने के बावजूद घरों में स्विच ऑन करने पर बिजली-बत्ती नहीं जलने से लोगों में आक्रोश और निराशा घर करने लगता है.

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