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jamshedpur-education-system-झारखंड सरकार के लिए शर्म की बात, शिक्षा मंत्री ने कहा था फीस माफ होगा, जमशेदपुर के स्कूल प्रबंधन ने शिक्षा विभाग को एक छात्र के मामले में जवाब दिया-फीस नही दिया तो ग्रुप से हटा दिया

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जमशेदपुर : झारखंड सरकार के लिए एक शर्मनाक मामला जमशेदपुर में सामने आया. कहा तो झारखंड के शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो बोल रहे थे की कोरोना काल का फीस माफ होगा वही जमशेदपुर में बेलगाम स्कूल प्रबंधन ने सरकारी महकमे को ही लिखकर दे दिया कि फीस नही दिया तो कार्रवाई की. कोरोना के महासंक्रमण काल और लॉकडाउन के मध्य भी निज़ी स्कूलों का अमानवीय रैवया और मनमानी सरेआम जारी है. शिक्षा मंत्री और जिला प्रशासन के आदेशों को ठेंगा दिखाने वाले निज़ी स्कूल प्रबंधन अभिभावकों पर फ़ीस भुगतान के लिए लगातार दबाव बना रहे हैं. ताज़ा मामला है जहाँ जमशेदपुर के एक बड़े प्राइवेट स्कूल ने फ़ीस ना चुकाने पर दो बच्चों की पढ़ाई रोक दी है.

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ये मामला है एग्रिको स्थित जेएच तारापोर स्कूल का. स्कूल के कक्षा 3 और कक्षा 5 में पढ़ने वाले नौनिहालों का पिछले कुछ महीनों के फ़ीस बकाया था. बच्चों के पिता पिछले एक साल में दो बार गंभीर सड़क दुर्घटना के शिकार हो गये थें. बेड रेस्ट के कारण रोजगार बुरी तरह से प्रभावित हो गया था. इन सभी कारणों से अवगत कराते हुए अभिभावक ने स्कूल प्रबंधन से समय माँगा था. किंतु फ़ीस भुगतान करने में असामर्थ्य रहें. इधर कोरोना के कारण लॉकडाउन लागू हो गया. उसके बाद से तारापोर स्कूल की प्रिंसिपल के आदेश से कक्षा 03 और 05 के दोनों छात्र-छात्राओं को ऑनलाइन पढ़ाई के लिए बने स्कूल के व्हाट्सएप ग्रूप से निकाल दिया गया. फ़ीस के कारण तारापोर स्कूल प्रबंधन ने बच्चों की पढ़ाई रोक दी है. अभिभावक ने ई-मेल द्वारा स्कूल की प्रिंसिपल से आग्रह किया कि वे किश्तों में फ़ीस भुगतान कर सकेंगे लेकिन स्कूल प्रबंधन एकमुश्त बकाया फ़ीस वसूलने का दबाव बना रहा है. स्कूल की प्रिंसिपल ने ई मेल के जरिये जवाब दिया कि जब तक पिछला बकाया स्कूल फ़ीस का भुगतान नहीं होता तबतक बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई भी बाधित रहेगी. मामले में अभिभावक द्वारा प्राप्त शिकायत पर शिक्षा सत्याग्रह के संस्थापक अंकित आनंद ने जिला शिक्षा अधीक्षक से मामले में हस्तक्षेप कर बच्चों की प्रताड़ना रोकने और अभिभावक को राहत दिलाने का आग्रह किया. इस मामले में जिला शिक्षा अधीक्षक ने सोमवार को एग्रिको स्थित जेएच तारापोर स्कूल को पत्र जारी करते हुए पक्ष स्पष्ट करने को कहा था. मंगलवार को स्कूल की प्रिंसिपल ने ई मेल द्वारा स्कूल प्रबंधन की ओर से बताया कि अभिभावक जब तक वर्ष 2019 का बकाया स्कूल फ़ीस भुगतान नहीं करतें तब तक उनके बच्चों की स्कूली शिक्षा बाधित रहेगी. इधर इस प्रकरण की शिक्षा सत्याग्रह ने तीव्र भर्तस्ना की है. शिक्षा सत्याग्रह के संस्थापक अंकित आनंद ने ट्वीट करते हुए मामले में मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री सहित राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग, झारखंड पुलिस और जमशेदपुर डीसी से मामले में न्याय और स्कूल प्रबंधन के विरुद्ध नियम संगत कार्रवाई की माँग की है. अंकित आनंद ने कहा कि लॉक डाउन के दौरान तारापोर स्कूल प्रबंधन ने अमानवीय रवैये को प्रदर्शित किया है जो बाल उत्पीड़न क़ानून के साथ ही आपदा प्रबंधन अधिनियम की अवमानना है. शिक्षा सत्याग्रह ने प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से ऐलान किया है कि अगर बुधवार तक इस मामले में स्कूल प्रबंधन ने बच्चों की पढ़ाई पुनः प्रारंभ नहीं कि तो वे भिक्षाटन कर के दोनों ही नौनिहालों का फ़ीस चुकाएंगे और तारापोर स्कूल की प्रिंसिपल सहित प्रबंधन के विरुद्ध उत्पीड़न का केस दायर करेंगे.

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