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jamshedpur-historical-place : क्या आप जानते है जमशेदपुर के बारे में, जिनका इतिहास कुछ कहता है, एक क्लिक में जानें जमशेदपुर के इन ऐतिहासिक स्थानों को और उनकी क्या है विशेषताएं

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(कुमारी अंजलि की ग्राउंड रिपोर्ट) जमशेदपुरः टाटा स्टील द्वारा आयोजित हेरिटेज साइट में आज पत्रकारों को भ्रमण करवाया गया. जिसमें टाटा स्टील द्वारा बनाये गये जमशेदपुर के 10 स्थलों में दोराबजी टाटा पार्क, सेंट जॉर्ज चर्च, आर्मरी ग्राउंड, डायरेक्टर बंगलो, क्लाक टावर, आईएसडब्यूपी, टाटा मोटर्स, आईएसडब्यूपी, यूनाइटेंड कलब शामिल है. (नीचे देखे पूरी खबर)

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सर दोराबजी टाटा पार्क.

दोराबजी टाटा पार्क
दोराबजी पार्क टाटा के पहले चेयरमैन दोरबाजी टाटा और उनकी पत्नी के प्रेम की गाथा को याद करने के लिए पार्क का निमार्ण किया गया. इसे आमजनों के लिए टाटा दोराबजी टाटा के 25 वर्ष (सिल्वर जुबली) होने पर 10 अक्टूबर 2020 को खोला गया. पार्क का उद्घाटन टाटा स्टील के एमडी और सीईओ टीवी नरेंद्रन ने किया था. इस खास अवसर पर प्रसिद्ध वास्तुकार नुरू करीम द्वारा डिजाइन किया गया था. वहीं रुची नरेंद्रन द्वारा वहां के स्टेंचू मेहरबाई टाटा का अनावर किया गया था. दोराबजी पार्क कुल 2.5 एक्ड में स्थापित है. वही डायमंड स्ट्रक्चर पार्क की वजह से पार्क की खूबसूरती में चार चाद लग जाता है. कीनन स्टेडियम के सामने स्थित है यह पार्क. (नीचे देखे पूरी खबर)

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बिष्टुपुर स्थित सेंट जॉर्ज चर्च

सेंट जॉर्ज चर्च-
प्रथम विश्वयुद्ध में पड़ी नींव : संत जॉर्ज चर्च की नींव 28 दिसंबर 1914 को रखी गई थी. सेंट जॉर्ज की बात करें तो सेंट जॉर्ज एक सामाजित व्यक्ति थे जो सदैव समाज की भलाइ के बारे में सोचते थे. उन्हें इस कारण संत की उपाधि दी गयी थी. इसकी खासीयत यह है कि इसके ईटों को इंग्लैंड से निर्माण के लिए लाया गया था और 23 अप्रैल 1916 में चर्च की प्राण प्रतिष्ठा हुई थी. चर्च में बैठने के लिए लकड़ी के बैंच है.यह चर्च आज जमशेदपुर के लिए संस्थापक जमशेदजी एन टाटा के विजन की एक शानदार विरासत के रूप में साक्षात है. मंदिरों, मस्जिदों, चर्चों, मठों और गुरुद्वारों के लिए शहर भर में विशेष स्थान निर्धारित किये गये थे. जमशेदपुर ने अपनी स्थापना के बाद से धर्मनिरपेक्षता और सहिष्णुता का एक माहौल का निर्माण किया है. सेंट जॉर्ज चर्च एकमात्र प्रोटेस्टेंट चर्च है, जहां आज अंग्रेजी में प्रार्थना की जाती है. बिष्टुपुर के नार्दन टाउन में यह अवस्थित है. (नीचे देखे पूरी खबर)

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आर्मरी ग्राउंड में खेलते खिलाड़ीगण.

आर्मरी ग्राउंड-
15 सितंबर 1941 को जमशेदपुर के टाटा स्टील प्लांट के समीप में बिहार रेजिमेंट की पहली बटालियन का गठन किया गया था. यूनिट को टिस्को प्लांट को जापानी विमानों से सुरक्षा करनी थी. इस ग्राउंड में सैनिकों के आर्म रखे जाते थे इसलिए इसे आर्मरी ग्राउंड के नाम से जाना जाता है. अब इस ग्राउंड को खिलाड़ियों के लिए प्रयोग किया जाता है. तत्कालीन वायसराय लॉर्ड वेवेल के जमशेदपुर दौरे के समय स्वदेश में विकसित तोप को उनके अवलोकन के लिए नॉदर्न टाउन में प्रदर्शित किया गया था. रेजिमेंट के कमांडर लेफ्टिनेंट कर्नल ट्वीड ने जिस भूमि पर अपनी यूनिट आर्मरी का प्रदर्शन किया, उसे अब आर्मरी ग्राउंड कहा जाता है. शहर के सबसे पुराने खेल क्षेत्रों में से एक इस आर्मरी ग्राउंड का उपयोग शौकिया और पेशेवर खिलाड़ियों के द्वारा और खेल आयोजनों के लिए किया जाता है. (नीचे देखे पूरी खबर)

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यूनाइटेड क्लब का दृश्य.

यूनाइटेड कलब-
टिसको इंस्टीट्यूट को डायरेक्टर बंगलों के ठीक सामने बनाने गया था. ताकि टिस्को में काम करने वाले लोगों को मनोरंजन का साधन दिया जा सके. इस दौरान टेनिंस कोर्ट, फुटबॉल, हाकी, बॉवलिंग एले, बिलियर्ड रुम और डांस के लिए हॉल और मनोरंजन का स्थान दिया गया. एक दूसरा क्लब सीएनआर क्लब वहां स्थापित था जहां अब लोयला स्कूल स्थापित है. 1948 में सीएनआर क्लब और टिस्को इंस्टीट्यूट का विलय हुआ जो यूनाइटेड क्लब में तब्दील हुआ. समग्र मनोरंजन और सामाजिक जुटान के अवसर प्रदान करने के लिए डारेक्टर्स बंग्लो के सामने टिस्को इंस्टीट्यूट की स्थापना की गयी थी. टिस्को प्रबंधन ने यह सुनिश्चित किया कि सभी लोग आपस मिले-जुले करे और समान रूप से हिस्सा ले सके. शुरुआती दिनों में इसमें कई टेनिस कोर्ट, फुटबॉल और हॉकी के लिए एक बड़ा मैदान, बॉलिंग एली, बिलियर्ड रूम और नृत्य व अन्य मनोरंजन के लिए एक खूबसूरती से सजाया गया कॉन्सर्ट हॉल था. सीएनआर क्लब नाम का एक और क्लब था, जहां अब लोयोला स्कूल स्थित है. 1948 में टिस्को इंस्टीट्यूट के परिसर में यूनाइटेड क्लब बनाने के लिए सीएनआर क्लब और टिस्को इंस्टीट्यूट को आपस में मिला दिया गया था. बिष्टुपुर नार्दन टाउन एरिया में यह है. (नीचे देखे पूरी खबर)

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डायरेक्टर्स बंगला का विहंगम दृश्य.

डायरेक्टर बंगलो
डायरेक्टर बंगलो का निर्माण 1918 में हुआ था. इस बंगलो में दोराबजी टाटा रहते थे. बंगलो में 8 बड़े बड़े रुम, डायनिंग हॉल, कार्ड रुम, लॉज समेत गुलाब का बगीचा से सजाया गया है. इसमें जवाहरलाल नेहरु समेत अन्य गणमान्य लोग शामिल हुए थे. 1918 में डायरेक्टर्स बंग्लो बनाया गया था. यह बंगला स्टील प्लांट के निर्माण से पहले बनी एक पुरानी इमारत की साइट पर अवस्थित है. यहीं पर सर दोराबजी टाटा जैसे दिग्गज ठहरते थे और संचालन की देखरेख करते थे. बंगले में 8 बड़े कमरे, एक डाइनिंग हॉल, एक कार्ड रूम और लाउंज है, साथ ही सामने एक विशाल लॉन है, जो गुलाब के बगीचे और मौसमी फूलों से सुसज्जित है. जमशेदपुर की अपनी यात्राओं के दौरान इस बंगले ने पंडित जवाहरलाल नेहरू सहित कई गणमान्य व्यक्तियों की मेजबानी की है. बिष्टुपुर नार्दन टाउन एरिया में ही यह है. (नीचे देखे पूरी खबर)

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गोलमुरी का क्लॉक टावर.

क्लॉक टॉवर
गोलमुरी गोल्फ कोर्स स्थित क्लाक टॉवर 70 फीट लम्बी घड़ी है. इस घड़ी के बारे में टाटा स्टील के पीआरओ उदय सिंह ने बताया कि इस घड़ी का स्थापना मजदूरो को समय का संकेत देने के लिए स्थापित किया गया था. सभी के पास समय देखने के लिए घड़ी नहीं होती थी, इस क्लॉक टॉवर से ही लोगों को पता चल पाता था कि समय क्या हो रहा है. क्लॉक टॉवर एंग्लो स्विस वॉच कंपनी द्वारा निर्माण किया गया था. वहीं 4 मार्च 1939 को टिनप्लेट कंपनी आफ इंडिया (टीसीआईएल) द्वारा स्थापित किया गया था. यह टॉवर गोलमुरी क्लब के गोल्फ कोर्स में स्थापित किया गया है. घड़ी ने 1994 में काम करना बंद कर दिया था जिसे दो दशकों बाद परिचालन में 3 मार्च 2014 को मरम्मत के बाद स्थापित किया गया. चार घुमावदार घड़ियों के साथ सीध में खड़े 70 फीट के हमारे क्लॉक टॉवर को एंग्लो-स्विस वॉच कंपनी द्वारा निर्मित किया था और 4 मार्च, 1939 को टिनप्लेट कंपनी ऑफ इंडिया (टीसीआईएल) द्वारा स्थापित किया गया था, जो इसके पहले जेनेरल मैनेजर जॉन लेशोन की 16 साल की सेवा का प्रतीक है. गोलमुरी क्लब के गोल्फ कोर्स में स्थित यह टॉवर कई दशकों तक शहर का टाइमकीपर रहा. 1994 में घड़ी ने काम करना बंद कर दिया और दो दशकों तक यह चली नहीं. टॉवर का रखरखाव टीसीआईएल के स्वामित्व वाले गोलमुरी क्लब द्वारा किया जाता है और इसके 18-होल गोल्फ कोर्स में सुंदरता में चार चांद लगाता है. (नीचे देखे पूरी खबर)

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तार कंपनी, जिसको आइएसडब्ल्यूपी के रुप में जाना जाता है.

आइएसडब्यूपी (तार कंपनी)
टेलको एरिया में इंडियन स्टील एंड वायर प्रोडक्ट लिमिटेड (आइएसडब्यूपी) की स्थापना सरदार बहादुर इंदर सिंह ने 1920 में 300 क्षेत्र में किया था. यह तार कंपनी के रुप में स्थापित हुआ था. वहीं कंपनी धीरे धीरे अन्य स्टील बनाने में विक्सीत हुआ. यह एक वायर ड्राइंग प्लांट के रूप में शुरू हुआ और फिर कंपनी ने धीरे-धीरे विस्तार किया और स्टील बिजनेस के अन्य क्षेत्रों में प्रवेश किया. (नीचे देखे पूरी खबर)

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टाटा मोटर्स का जमशेदपुर प्लांट.

टाटा मोटर्स
टेलको एरिया में टाटा मोटर्स स्थापित 1945 में हुआ था. शुरूआत में वहां रोड रोलर्स का उत्पादन होता था. कंपनी का 1954 तक अच्छा प्रदर्शन नहीं होने के कारण कंपनी ने मर्सिडीज बेंज ट्रकों का निर्माण शुरू किया. टाटा मोटर्स की स्थापना 1945 में आरंभ में रोड रोलर्स बनाने के लिए की गयी थी. (नीचे देखे पूरी खबर)

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तार कंपनी का बनाया गया बंकर.

द्वितीय विश्व युद्ध का बंकर
जमशेदपुर इंडियन स्टील एंड वायर प्रोडक्ट गेट के बाहर लाल रंग का गेट जिसे शहरवासी बंकर के नाम से जानते है. उसके कई छोटे बड़े किस्से है. इस बंकर को द्वितीय विश्वयुद्घ के समय वर्ष 1942 में कंपनी के बाहर 40 गुणा 40 के क्षेत्रफल में बनाया गया था. वहीं बंकर की गहराई करीब तीन फीट है. द्वितीय विश्वयुद्घ के समय हवाई हमलों से शहर के बचाने के लिए इस बंकर का निर्माण किया गया था. यह बंकर पेड़ों के बीच घिरा है. टेल्को एरिया के तार कंपनी इलाके में ही यह है. (नीचे देखे पूरी खबर)

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बिष्टुपुर का होटल बुलेवर्ड

बुलेवर्ड होटल
प्रतिष्ठित जमशेदपुर के बिष्टुपुर स्थित बुलेवर्ड होटल की शुरुआत एक उद्यमी ठेकेदार बार्थोलोम्यू डी’कोस्टा ने की थी. टाटा कंपनियों द्वारा शहर में शुरू की गई परियोजनाओं के लिए मजूदर प्रदान करने 1919 में वे गोवा से जमशेदपुर आये थे. उनके फर्म ने टाउनशिप में कई निर्माण परियोजनाओं पर काम किया, जिसमें कदमा में फ्लैट और अन्य स्टीलवर्क्स शामिल हैं. द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान बार्थोलोम्यू को शहर के ऊपर एक स्मोकस्क्रीन बनाने के लिए टार पिट का निर्माण करने का काम सौंपा गया था और 1940 में, उन्होंने शहर में डेरा डाले हुए मित्र देशों के सैनिकों के लिए बुलेवार्ड होटल का निर्माण किया. एक रेडीमेड नक्शे के आधार पर स्थानीय भट्ठे से ईंटे लेकर कुछ भार थामने वाली दीवारों से युक्त एक तत्काल सेटअप का उपयोग कर संरचना को छह महीने में खड़ा कर दिया गया था. यह होटल ब्रिटिश और अमेरिकी सैनिकों के बीच विशेष रूप से लोकप्रिय था. वर्तमान होटल ने उस युग के अधिकांश आंतरिक सज्जा और फर्नीचर को बरकरार रखा है. (नीचे देखे पूरी खबर)

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बिष्टुपुर का भरुचा मेंशन.

भरूचा मेंशन
टाटा स्टील के पहले भारतीय चीफ कैशियर खुर्शीद मानेकजी भरूचा ने 1935 में टाटा स्टील में काम करने आए बाहरी पारसी युवाओं के घर के रूप में इस अनूठी औपनिवेशिक शैली की इमारत का निर्माण किया था. बिष्टुपुर स्थित भरुचा मेंशन को ऐतिहासिक धरोहर माना जाता है.

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