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Jamshedpur : मोहरदा पेयजल परियोजना की स्थिति सुधाने के लिए विधायक सरयू राय ने विभागीय सचिव को लिखा पत्र, कहा-वैकल्पिक परियोजना नये सिरे से तैयार करना अपरिहार्य है तो इसके लिए भी जनहित में आवश्यक पहल यथाशीघ्र की जाये

जमशेदपुर : जमशेदपुर पूर्वी के विधायक सरयू राय ने मोहरदा पेयजल परियोजना की स्थिति सुधारने तथा समय पर गुणवत्तायुक्त पेयजल आपूर्ति करने की मांग करते हुए राज्य के नगर विकास एवं आवास विभाग के सचिव को पत्र लिखा है. पत्र में उन्होंने कहा है कि वर्ष 2005 में विश्व बैंक पोषित मोहरदा पेयजल परियोजना के निर्माण के लिये तत्कालीन झारखंड सरकार ने जुस्को को अनापत्ति प्रमाण पत्र नहीं दिया और 28 करोड़ रूपये की लागत पर इसका निर्माण स्वयं करने का निर्णय लिया। तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने 2006 में इसका शिलान्यास किया। परियोजना 2008 में पूरा होनी थी, परंतु किन्हीं कारणों से विलंब हुआ और यह महत्वाकांक्षी परियोजना 2013 में अंशतः पूरा हुई. परियोजना के पोषण क्षेत्र की जनता के बीच पानी का कनेक्शन लेने के लिये फार्म बंटे, जलापूर्ति आरंभ हुई, पर परियोजना सुचारू रूप से परिचालित नहीं हो सकी. इसके विरूद्ध पानी की आपूर्ति एवं गुणवता के बारे में शिकायतों का अंबार लग गया। तब जाकर सरकार ने 2017 में इसके परिचालन, उन्नयन एवं रख-रखाव के लिये उसी जुस्को के साथ समझौता किया जिसे उसने 2005 में निर्माण की अनुमति नहीं दिया था, इससे करीब डेढ़ लाख लोगों को पेयजल देने का लक्ष्य था. (नीचे भी पढ़ें)

श्री राय ने कहा है कि पहले योजना का परिचालन, उन्नयन एवं रख-रखाव करने का जिम्मा सरकार के पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के जिम्मे था। परिचालन एवं रख-रखाव तथा जलापूर्ति के संबंध में आम जनता के असंतुष्ट होने के कारण यह परियोजना जुस्को के हवाले की गई। वर्ष 2017 के जून महीने में इसके लिए जुस्को और जमशेदपुर अक्षेस के बीच एक समझौता हुआ। जुस्को ने उस समय कहा था कि इस परियोजना की अधोसंरचना को उन्नत किया जाएगा और पेयजल गुणवत्ता में 2 महीने के भीतर सुधार किया जाएगा। इसके बाद जुस्को ने तथा सरकार ने समझौता शर्तों के अनुरूप इस परियोजना पर कितना व्यय किया, इसकी जानकारी मुझे नहीं है। अपुष्ट सूचना के अनुसार इस पर कुल 35 से 40 करोड़ रुपए से अधिक का व्यय हुआ है। (नीचे भी पढ़ें)

सरयू राय ने पत्र में कहा है कि जुस्को और सरकार के बीच मोहरदा पेयजलापूर्ति परियोजना के संचालन, उन्नयन, रख-रखाव के बारे में हुए समझौते का 5 वर्ष पूरा हो चुका है। कतिपय क्षेत्रों में परियोजना का उन्नयन हुआ है, पाइपलाइन बिछाया गया है, परन्तु पेयजल आपूर्ति के बारे में संतोषजनक प्रगति नहीं हुई है। इस बीच कोई भी दिन ऐसा नहीं गुजरता है, जिस दिन परियोजना क्षेत्र के लोग पेयजल गुणवत्ता, आपूर्ति आदि के बारे में तथा समय पर आपूर्ति नहीं होने के कारण कोई न कोई शिकायत नहीं करते हैं। इस क्षेत्र के लोगों की शिकायत है कि परियोजना से उन्हें पीने योग्य साफ पानी की आपूर्ति नहीं हो रही है और समय पर निश्चित घरों में पानी की आपूर्ति भी नहीं हो पा रही है। यह आम जनता की ओर से परियोजना के बारे में एक गंभीर शिकायत है, सरकार द्वारा इसे संज्ञान में लेना आवश्यक है। (नीचे भी पढ़ें)

विधायक श्री राय ने पत्र में कहा है कि इस क्षेत्र से प्रतिनिधि चुने जाने के बाद से इस क्षेत्र में मेरे लिए मानसून का यह दूसरा मौसम है। विगत दिनों ‘यास’ तूफान के कारण भी स्वर्णरेखा नदी का जल प्रवाह काफी बढ़ गया था। उस समय से दो दिन तक पेयजलापूर्ति ठप हो गई थी। नदी में जब भी जलस्तर एवं प्रवाह बढ़ता है तो एक दिन, दो दिन, तीन दिन के लिए परियोजना का संचालन ठप हो जाता है। आज तीसरा दिन है जब इस परियोजना से पेयजल की आपूर्ति ठप है। परियोजना क्षेत्र में पानी के बिना हाहाकार मचा हुआ है। जुस्को के अधिकारियों द्वारा यह तर्क दिया जाता है कि नदी में जल प्रवाह बढ़ने के साथ ही पूरे जमशेदपुर एवं मानगो से प्लास्टिक युक्त कुड़ा-कचरा का अंबार नदी से बहकर परियोजना के पम्प हाउस तक आता है, जिसके कारण इंटेक वेल से पानी खींचने वाली पंप मशीन में कचरा फँस जाता है और मशीन बन्द हो जाती है। इसके कारण जलापूर्ति ठप हो जाती है। मशीन को ठीक करने के लिए उन्हें काफी मशक्कत करनी पड़ती है। जुस्को के अधिकारियों के अनुसार उन्होंने मशीन के चारो ओर नदी के भीतर जाली भी लगवाया है, परन्तु यह व्यवस्था कूड़ा-कचरा को मशीन में फँसने से नहीं रोक पा रही है। जुस्को के अधिकारी कहते हैं कि इस परियोजना की डिजाईन सही नहीं है। (नीचे भी पढ़ें)

विधायक सरयू राय ने कहा है कि जिस स्थान पर इंटेक वेल बनाकर नदी से पानी खींचा जाता है, वह स्थान भी इसके लिए उपयुक्त नहीं है। आज जुस्को के एक वरीय अधिकारी ने मुझे बताया कि यह परियोजना कब पूरी तरह ठप हो जाएगी और जमशेदपुर की एक बड़ी आबादी पेयजल के लिए त्राहिमाम करने लगेगी, कहा नहीं जा सकता। उनके अनुसार एक वैकल्पिक योजना बनाना जरूरी हो गया है ताकि इस परियोजना के डिजाईन एवं स्थल की कमियों से होने वाले नुकसान की भरपाई हो सके। उक्त विवरण के आलोक में जुस्को, जमशेदपुर अक्षेस और पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के तकनीकी अधिकारियों की एक संयुक्त बैठक बुलाने की पहल की जाय। मोहरदा पेयजल परियोजना की पिछली डिजाईन कितनी सही और कितनी गलत है, इसके बारे में विश्लेषण करके इसकी खामियां जितनी जल्दी दूर हो सकती है, उतनी जल्दी उन्हें दूर करने का प्रयत्न किया जाय। यदि तकनीकी अधिकारियों को लगता है कि एक वैकल्पिक परियोजना नये सिरे से तैयार करना अपरिहार्य है तो इसके लिए भी जनहित में आवश्यक पहल यथाशीघ्र की जाय।

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