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jamshedpur-labours-incoming-जमशेदपुर और सरायकेला-खरसावां में कई मजदूरों को रोका गया, नहीं थम रहा मजदूरों के आने का सिलसिला

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जमशेदपुर : वैश्विक संकट का यह दौर कबतक जारी रहेगा, किसी को नहीं मालूम. इन सबके बीच देशभर के प्रवासी मजदूर पलायन को विवश हैं. भूख और पैसों के अभाव में लगातार मजदूरों का पलायन जारी है. वैसे पलायन कर रहे मजदूर वतन वापसी के लिए अपनी जान को जोखिम में डालने से भी नहीं चूक रहे. जहां देश के अलग- अलग हिस्सों से पैदल या चोरी छिपे पलायन कर रहे प्रवासी मजदूरों के मौत के कई मामले सामने आ रहे हैं, बावजूद इसके मजदूर पलायन के लिए मजबूर हैं, क्योंकि इन्हें अब सराकर पर भरोसा नहीं रहा. अभी जो तस्वीरें हम आपको दिखा रहे हैं, ये झारखंड को बंगाल और ओडिसा से जोड़नेवाली सड़क एनएच 33 है. आप देख सकते हैं, इस छोटे से गाड़ी में किस तरह प्रवासी मजदूर खचाखच भरकर मुंबई से पहुंचे हैं. इस गाड़ी में कुल 62 प्रवासी मजदूर बताए जा रहे हैं. वैसे जमशेदपुर सीमा में प्रवेश करते ही इन्हें रोक लिया गया. जहां मेडिकल परीक्षण के बाद ही इन्हें आगे के सफर की अनुमति दी जाएगी. आपको बता दें पहले ये मजदूर एक टैंकर में आ रहे थे, जहां पुलिस की सख्ती के बाद ये सभी मजदूर एक छोटे से ट्रॉली से आगे के सफर पर निकले हैं. इन मजदूरों में जमशेदपुर, पुरूलिया के अलावे राज्य के अलग- अलग हिस्सों के मजदूर हैं. फिलहाल सभी को मेडिकल जांच के लिए रोका गया है. वैसे केंद्र सरकार के राहत पैकेज की घोषणा के बाद भी प्रवासी मजदूरों के पलायन का सिलसिला लगातार जारी है.

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मजदूरों की बेबसी देखिये
देश में कोरोना संकट कम होने का नाम नहीं ले रहा. उधर मजदूर हैं, कि रूकने का नाम नहीं ले रहे. हजारों किलोमीटर के अनंत सफर पर देशभर के असंख्य मजदूर चलते चले जा रहे हैं. जहां इनका मंजिल तो तय है, लेकिन वहां तक पहुंचना निश्चित नहीं. वैसे शहरों में भूखे मरने से बेहतर इन्होंने पदयात्रा कर अपने गांवो तक जाना ही बेहतर समझा. और खाली जेब देशभर के मजदूर जान की परवाह किए बगैर शहरों के चकाचौंध छोड़ अपने गांवों की ओर निकल पड़े. वैसे इनमें कुछ मजदूर सफल हो रहे हैं, तो कुछ को अपनी जान भी गंवानी पड़ी. जीवन की खुशियां कमाने की चाह में गांव छोड़ गए इन मजदूरों को रोक पाना अब सरकार से बूते की बात नहीं रही. इन तस्वीरों में देखिए. ये झारखंड के पलामू के मजदूर हैं. जो पश्चिम बंगाल के झाड़ग्राम में मजदूरी करते थे, जहां पेट की आग ने इन मजदूरों को वापस अपने वतन लौटने पर मजबूर कर दिया. और फिर क्या था सभी मजदूर पैदल ही अनंद सफर पर निकल पड़े. जहां से सैकड़ों किलोमीटर की दूरी तय जमशेदपुर के रास्ते पलामू जा रहे हैं. हालाकिं जमशेदपुर प्रखंड कार्यालय पर इन्हें पुलिस द्वारा रोक दिया गया है. लेकिन इन्हें न तो भोजन उपलब्ध कराया गया न पानी. वैसे संयुक्त ग्राम सुरक्षा समीति ने इन मजदूरों को भोजन- पानी मुहैया कराने का दावा किया है. ऐसे में लॉकडाउन का सबसे बुरा प्रभाव दिहाड़ी मजदूरों पर पड़ा है, इससे इंकार नहीं किया जा सकता. वहीं ग्राम सुरक्षा समीति के अध्यक्ष राम सिंह मुंडा ने मजदूरों और मध्यम वर्ग के लोगों की पीड़ा को देखते हुए 14 मई को पीएम मोदी को एक चिट्ठी लिखने का दावा किया है. उन्होने बताया कि राहत पैकेज का वास्तविक लाभ बैंकों के माध्यम से गरीबों और मध्यम वर्गों तक पहुंचना संभव नहीं इसके लिए कोई विशेष नीति बनाने की बात उन्होने कही. फिलहाल देश के मजदूरों का हाल बेहाल है.

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