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Jamshedpur : रात के अंधेरे में पुलिस की आंखों में बालू झोंक दिन के उजाले में काला कारोबार कर रहे माफिया, मरीन ड्राइव के किनारे बसी बस्तियों के छुटभैया लोगों को भी मिल गया है रोजगार

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Jamshedpur : कहा जाता है कि पुलिस डाल- डाल, तो चोर पात- पात. ऐसा ही कुछ नजारा इन दिनों जमशेदपुर में आपको देखने को मिल जाएगा, जिसे आम लोग या तो समझ नहीं पाते या समझना नहीं चाहते. पुलिस की भूमिका पर हम प्रश्नचिन्ह नहीं लगाते, लेकिन पुलिस की आंखों में धूल नहीं, बल्कि रात के अंधेरे में बालू माफिया बालू झोंक दिन के उजाले में बड़े पैमाने पर बालू का काला खेल खेल रहे हैं. पुलिस इन बालू माफियाओं की करतूत से अनजान है, ये कहना थोड़ा असहज होगा. फिर भी हम पुख्ता तौर पर पुलिस को आरोपित नहीं कर रहे हैं. लेकिन इन तस्वीरों को देखकर आप ही आंकलन कीजिए कि जमशेदपुर में ग्रीन ट्रिब्यूनल एक्ट का कैसे उल्लंघन हो रहा है. ये नजारा है, जमशेदपुर के सोनारी और कदमा थाना क्षेत्र से होकर गुजर रहे मरीन ड्राईव का. खरकई और स्वर्णरेखा नदी के किनारे बने इस मरीन ड्राईव पर आप इन बालुओं के ढेर को देखकर कुछ खास नहीं समझ पाएंगे, लेकिन जब गौर से देखेंगे तो आपको पूरा खेल पता चलेगा. दरअसल ये पूरा खेल होता है रात के अंधेरे में. जहां मरीन ड्राईव से सटी बस्तियों के मजदूर रातभर बोरों में भरकर खरकई और स्वर्णरेखा नदीं से बालू सड़क के किनारे डंप करते हैं और दिन के उजाले में बालू माफिया यहां से अपने-अपने ठिकानों के लिए बालू ढुलवाते हैं. वैसे बड़े पैमाने पर इस तरह का खेल इस सड़क पर आपको देखने को मिल जाएगा.

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जानकार बताते हैं कि इस खेल का असली खिलाड़ी पूरे सीन में कहीं भी सामने नहीं आता है. हर काम के लिए स्थानीय युवकों का दर तय है. नदी से बालू उठाव से लेकर बड़ी गाड़ियों में लोड करने तक पूरा सिस्टम काम करता है. अब आपको तो इस खेल का मतलब समझ में आ ही गया होगा. अब चलिए आपको ये भी बता देते हैं कि पुलिस को हम क्यों पाक-साफ नहीं मान सकते. वो इसलिए कि इस सड़क पर 24 घंटे किसी न किसी थाना की पेट्रेलिंग गाड़ी आपको विचरण करता नजर आ ही जाएगा, तो जब हम इस खेल को पकड़ लिए तो पुलिस को इस खेल का भनक कैसे नहीं लगा, ये थोड़ा हजम नहीं हो रहा. आपको बता दें कि देशभर में अभी अक्टूबर तक ग्रीन ट्रिब्यूनल एक्ट कानून लागू है, ताकि नदियों से बालू का उठाव न हो, वैसे इस दौरान बालू का भंडारण भी अवैध माना जाएगा. हालांकि सरकारी कामों के लिए बालू उठाव की अनुमति है, लेकिन सरकारी आदेश के तहत चुनिंदा घाटों से ही, लेकिन निजी भवनों और इमारतों का भी काम भी बदस्तूर जारी है, तो सवाल ये उठता हैं कि इन निजी भवनों में बालू आ कैसे रहा है, तो इस खेल के जरिए ही बालू माफिया, ऊंचे दामों में बालू सप्लाई कर रहे हैं. वैसे इस अवैध काम में मरीन ड्राईव के किनारे की बस्तियों के बेरोजगारों और छुटभैयों को बड़ा रोजगार भी मिल गया है. कोरोना के कारण बेरोजगार हुए लोगों के लिए बालू माफियाओं ने रोजगार के नए अवसर ढूंढ दिया है, भले ही वो गैरकानूनी ही क्यों न हो.

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