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jamshedpur- मिनी बस के कारोबारी एक साल से खस्ताहाल जिंदगी जीने को विवश, सरकार ने रोड टैक्स व परमिट में नहीं दी किसी तरह की रियायत


जमशेदपुर: वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के दूसरे लहर का संक्रमण अब कम हो रहा है. लेकिन इस त्रासदी ने हर वर्ग को प्रभावित किया है. हम बात कर रहे हैं झारखंड के आर्थिक राजधानी जमशेदपुर के लाइफलाइन की. जी हां लौहनगरी जमशेदपुर की लाइफ लाइन मिनी बसों को मानी जाती है. पिछले एक साल से मिनी बस कारोबारी खस्ताहाल जिंदगी जीने को विवश है. लॉकडाउन के कारण उपजे हालात के बाद से इनके समक्ष भुखमरी की नौबत आन पड़ी है. हालांकि जिला प्रशासन द्वारा इनके गाड़ियों का प्रयोग समय-समय पर किया जाता रहा है, लेकिन अब तक उन्हें उनका किराया नहीं देने से स्थिति और भी बिगड़ने लगी है. जमशेदपुर में लगभग एक सौ मिनी बस हैं. जिसमें काम करने वाले कर्मचारियों से लेकर इस व्यवसाय से जुड़े कारोबारियों का बुरा हाल है. इनके लिए ना तो सरकार की ओर से रोड टैक्स, ना परमिट में कोई रियायत दी गई है. न ही इन्हें कोई आर्थिक पैकेज की घोषणा की गई है. कई मिनी बस मालिक तो कर्ज में डूब चुके हैं. ऐसे में सरकार और जिला प्रशासन अगर इन मिनी बस मालिकों के मामले पर गंभीरता नहीं दिखाती है, तो निश्चित तौर पर आने वाले दिनों में शहर की सड़कों से मिनी बसें गायब हो जाएंगी.

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