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सोमवार, मई 17, 2021
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jamshedpur-naman-sansthan-नमन ने गरिमामय तरीक़े से मनाई स्वामी विवेकानंद जयंती, संस्थापक काले बोले-सोच ही सर्वोपरी-अपने को कमजोर कभी ना समझे

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जमशेदपुर : नमन संस्था ने मंगलवार को जमशेदपुर के साकची कालीमाटी कार्यालय में राष्ट्रीय युवा दिवस पर स्वामी विवेकानंद की 158 वीं जयंती के अवसर पर एक संक्षिप्त लेकिन भव्य समारोह का आयोजन किया. नमन के संस्थापक अमरप्रीत सिंह काले के नेतृत्व में स्वामी जी के आदमकद तस्वीर पर माल्यार्पण व धूप बत्ती के साथ कार्यक्रम की शुरूआत हुई जिसमें कई गण्यमान्य लोगों ने स्वामीजी की प्रेरक बातों और जीवन मंत्रों से सभी खासकर युवाओं को अभिभूत किया. इस अवसर पर संस्था द्वारा पूर्व में चयनित तीन युवा आइकॉन को सम्मानित और प्रोतसाहित किया गया. इनमें प्रथम प्रयास में ही नीट 2020 में सफलता पानेवाली संजना सिन्हा, भारतीय सेना में सूबेदार एवं वर्तमान में चीन बॉर्डर पर लेह में पदस्थापित अपनी सेवा के दौरान ठंढ और बर्फ के कारण होने वाली भयानक बीमारी ‘ फोर्सबाईट ‘ से संक्रमित होने के कारण छुटी पर शहर आये सोनू मिश्रा एवं वर्ष 2020 में राष्ट्रीय स्तर पर प्रतियोगिता में युवा सांसद चुने गए सागर तिवारी सम्मिलित हैं.

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सुश्री संजना ने कक्षा 12 की परीक्षा के तत्काल बाद बिना किसी कोचिंग के स्वाध्याय के बल पर ही मेडिकल की उक्त एंट्रेंस परीक्षा में सफलता पाई जिसको भुवनेश्वर के एक मेडिकल कॉलेज में सीट भी मिल गयी. संस्थापक श्री काले ने अपने सारगर्भित उद्गार में कहा कि युवाओँ की भागीदारी सुनिश्चित किये बिना किसी भी सार्थक बदलाव की कल्पना नहीं की जा सकती. ज़िम्मेदारी को संकल्प बनाकर ही समाज मे बदलाव लाया जा सकता हैं. जब तक हम समाज में अंतिम व्यक्ति के विषय में चिंतन कर उनके उत्थान के प्रति खुद को जवाबदेह नहीं बनाते हम एक सच्चे देशभक्त और नागरिक होने का कर्तव्य पूरा नहीं कर सकते. इसी विश्वास को स्थापित करने के लिए विवेकानन्द ने अपना जीवन संदेश दिया और खण्डित हो रही मानवता के प्रति लोगों का ध्यान दिलाते हुए सनातन संस्कृति की वैभवता की ओर दुनिया का ध्यान खींचा जिसमे वसुधैव कुटुम्बकम की सोच सदियों से पल्लवित, पुष्पित और फलित होती रही हैं जिसपर साम्राज्यवाद की काली छाया ने क्षणिक अंधेरा फैला रखा था. उन्होंने कहा आज युवाओं जहां कहीं दिग्भ्रमित देखे जा रहे उन्हें स्वामीजी के विचारों से ही रास्ते पर लाया जा सकता है. अन्य तमाम बुराइयों का सामना भी विवेकानन्द के विचारों को आत्मसात कर ही किया जा सकता हैं. सभा को संस्था के संरक्षण ब्रजभूषण सिंह, जयप्रकाश राय, शिवशंकर सिंह, राम केवल मिश्रा आदि ने संबोधित किया जबकि कार्यक्रम का संचालन डीडी त्रिपाठी ने किया. इस अवसर पर राघवेन्द्र शर्मा, जसवंत सिंह भोमा, महेंद्र सिंह, रोमी सिंह, परमजीत सिंह, संदीप सिंह पप्पू, जुगुन पांडेय, महेश मिश्रा, प्रिंस सिंह, विभाष मजुमदार, घनश्याम भिरभरिया, अभिषेक पांडे, सुमन कुमार, संध्या रानी महतो,आभा वर्मा,अनीशा सिन्हा, बंदना नामता, सीमा दास, किरण सिंह,रीता सिंह,हेमलता पात्रो, मधु माला, नीतू दुबे, मनोज मिश्रा, दीपक सिंह, मनीष सिंह, किशोर ओझा, शेखर मुखी, कार्त्तिक जुमानी, बिनोद ओमंग, विक्रम ठाकुर, अशोक राय, राजकुमार सिंह, बिट्टू मिश्रा, विक्की तारवे, मोहन दास,भोला दास, सूरज चौबे, रामा राव, अनूज मिश्रा, मनोज हलदर, प्रशांत कुमार, मनोज मुखी, लकी जयसवाल,सहित सैकड़ों कार्यकर्ता उपस्थित थे.

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