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मंगलवार, अप्रैल 13, 2021
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    Jamshedpur : असहयोग आंदोलन भूल गई है केंद्र सरकार, झारखंड में ननकाना साहिब शताब्दी समारोह मनाएंगे : सरदार इंद्रजीत सिंह

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    जमशेदपुर : तखत श्री हरिमंदिर साहिब प्रबंधन कमेटी पटना के उपाध्यक्ष सरदार इंद्रजीत सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार देश के आजादी आंदोलन खासकर असहयोग आंदोलन को भूल गई है। यदि अपने शहीदों और देशभक्तों के प्रति जरा भी सम्मान होता तो किसान आंदोलन का बदला सिख श्रद्धालुओं से नहीं लेती। इंद्रजीत सिंह ने कहा कि पूरी दुनिया में सिख समुदाय 21 फरवरी 1921 की उस ऐतिहासिक घटना को याद कर रहा है जब सिखों के प्रमुख ऐतिहासिक गुरुद्वारों पर से सिख सनातनी महंतों का कब्जा मुक्त कराया गया। उन्होंने बताया कि 21 फरवरी 2021 को पाकिस्तान में श्री गुरु नानक देव जी के जन्म स्थान ननकाना साहिब में पूरी दुनिया से सिक्सर धालू जूते और वहां भारत से भी 600 श्रद्धालुओं का प्रतिनिधिमंडल जाना था। लेकिन अंतिम समय में गृह मंत्रालय ने यह कहते हुए वीजा नहीं दिया कि पाकिस्तान में कोरोना फैला हुआ है और स्वास्थ्य सुविधा नहीं है। केंद्र सरकार का यह फैसला पूरी तरह से भ्रमित करने वाला है। उन्होंने सवाल दागा कि भारत ने भी एक करोड़ से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं और एक लाख से ज्यादा लोग मर चुके हैं। तो क्या विदेश से भारत में लोग नहीं आ रहे हैं।सरदार इंद्रजीत सिंह ने पुलवामा कांड को याद करते हुए कहा कि वह तनाव के मौके पर भी सिख श्रद्धालुओं को पाकिस्तान जाने की इजाजत मिलती रही है। क्योंकि किसान आंदोलन में पंजाब की बड़ी भागीदारी रही है। धार्मिक मामलों से राजनीतिक कारण को जोड़कर केंद्र सरकार ने शायद इजाजत नहीं दी है, जो अच्छा नहीं है। (नीचे भी पढ़ें)

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    इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि फरवरी 1921 में 200 निहत्थे सत्याग्रही सिखोंको गोलियों से भून दिया गया या जलाकर अथवा उबलते पानी में डालकर मार दिया गया।तब 21 फरवरी को अंग्रेज सरकार को झुकना पड़ा और ननकाना साहिब का प्रबंधन 1920 में स्थापित शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी को देना पड़ा।यह ऐतिहासिक तथ्य है कि महात्मा गांधी भी 3 मार्च 1921 को ननकाना साहब पहुंचे थे और उस कांड को जालियांवाला बाग से भी ज्यादा वीभत्स बताया था।महात्मा गांधी के आह्वान पर ही पंजाब ने असहयोग आंदोलन में शानदार भूमिका अदा की थी और सिखों के दबाव पर ही केंद्र सरकार ने 1925 में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी को कानूनी रूप दिया था। तब इससे आशान्वित होकर महात्मा गांधी एवं पंडित जवाहरलाल नेहरू ने कहा था कि देश की आजादी की पहली जंग हमने जीत ली है और अब आजादी मिल कर रहेगी। सरदार इंद्रजीत सिंह ने कहा कि देश एवं धर्म की रक्षा के लिए सिखों की कुर्बानी सभी के लिए प्रेरक है परंतु केंद्र सरकार इसे झूठलाने में लगी हुई है। उन्होंने बताया कि इस शताब्दी समारोह से देश को अवगत कराने के लिए झारखंड के धनबाद रांची जमशेदपुर तथा अन्य शहरों के साथ ही बिहार के प्रमुख स्थानों पर भी स्थानीय धार्मिक जत्थे बंदियों के साथ मिलकर इसका आयोजन किया जाएगा।

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