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jamshedpur-proud-जमशेदपुर के लेखक अंशुमन भगत को मिली एक और बड़ी कामयाबी, इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स से मिला सम्मान, “लार्जेस्ट कलेक्शन ऑफ थॉट्स रिटेन इन ए बुक”

जमशेदपुरः लगातार सुर्खियों में चल रहे जमशेदपुर के युवा लेखक अंशुमन भगत को इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स के खिताब से नवाजा गया। यह अंशुमन के लिए एक बड़ी उपलब्धि है. लेखक अंशुमन ने न केवल उपलब्धि हासिल की है, बल्कि जमशेदपुर समेत पूरे झारखंड का नाम रौशन किया है। अंशुमन भगत आज के मौजूदा हालात में युवाओं के लिए प्रेरणा का स्त्रोत बन रहे है। उन्हें कुछ ही दिनों पहले ओएमजी बुक ऑफ रिकॉर्ड का खिताब भी मिला था। लगातार दूसरी बार एक और खिताब अपने नाम कर उन्होंने इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराया है। इस देश में पिछले एक सालों से भी अधिक समय से कोरोना महामारी ने अपना कहर मचा रखा है। इसी बीच युवा लेखक ने अपने विचारों को पुस्तक के माध्यम से लोगो तक पहुंचाया ताकि लोगो का मनोबल बना रहे और युवा अपने कार्य क्षेत्र में अपना ध्यान केंद्रित कर सके।(नीचे भी पढ़ें)

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अंशुमन का मानना है कि हर किसी के जीवन में कठिनाइयां होती है, कोई भी व्यक्ति सफल होकर जन्म नहीं लेता, सफल होने के लिए जीवन में कठिन परिश्रम और त्याग करने पड़ते हैं। यह जरूरी है कि कुछ बेहतर प्रयास करते रहे, जिसके लिए अच्छे और सकारात्मक सोच का होना आवश्यक है, जिससे हमें ऊर्जा मिलती रहे। हमारे समाज में दो तरह के लोग होते हैं, पहले वें, जो अपने पूर्वजों की संपत्ति का प्रयोग कर आगे बढ़ते हैं, उन्हें आधा सहयोग बनी बनाई मिलती है और दूसरे वे जिन्हें सब कुछ शून्य से शुरुआत करनी पड़ती है, ऐसे में व्यक्ति को अपने हालातों से समझौता करने के बजाए अपना ध्यान केन्द्रित करने की जरूरत पड़ती है फिर चाहे हालात कुछ भी क्यों न हो। हमें सफल बनने से कोई नहीं रोक सकता बस आपके इरादे मजबूत होने चाहिए। यह रिकॉर्ड पुस्तक में विचारों का सबसे बड़ा संग्रह लिखने का (“लार्जेस्ट कलेक्शन ऑफ थॉट्स रिटेन इन ए बुक”) रिकॉर्ड किया गया है. जमशेदपुर में जन्मे युवा लेखक का जन्म 7 मार्च, 1996 को हुआ है। ‘योर ओन थॉट् : ए लॉट ऑफ थॉट्स’ शीर्षक वाली पुस्तक, अंग्रेजी और हिंदी में लिखे गए कोट्स, प्रेरणात्मक विचारों का एक संग्रह है जो पाठक को सकारात्मक सोच विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करती है। पुस्तक का पहला संस्करण 2018 में इन्विंसिबल प्रकाशक द्वारा प्रकाशित किया गया था, 28 मई, 2021 को इसकी पुष्टि इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ के संपादकीय बोर्ड द्वारा किया गया था.

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