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jamshedpur-rural-बांस के कारण ही चाकुलिया को मिली अलग पहचान, राज्य में ही नही बल्कि हरियाणा, यूपी और छत्तीसगढ़ में यहां के बांस की मांग

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चाकुलिया : चाकुलिया वन क्षेत्र के आस पास के कई प्रखंडों में करीबन 250 एकड़ में बांस की खेती की जाती है. बांस की खेती कर यहां के किसान हर वर्ष लाखों रुपए की आमदनी करते हैं. यहां के किसान अन्य फसलों की भांति बांस की खेती प्रमुख रुप से करते हैं. यहां के किसानों की आय का मुख्य स्रोत खेती है, किसान धान की खेती के अलावा बांस की भी खेती करते है. बांस की खेती में आदमनी ज्यादा होने से किसानों को रुझान इस और रहता है. हालांकि चाकुलिया वन क्षेत्र के बांस की क्वालिटी अन्य प्रखंडों से बेहतर है जिस कारण यहां की बांस की मांग ज्यादा होती है. चाकुलिया की बांस ने राज्य में ही नही बल्कि अन्य राज्यों में भी अपनी अलग पहचान बनायी है. यहां की बांस की मांग अन्य राज्यों में ज्यादा है. यहां से यूपी, हरियाणा और छत्तीसगढ़ बांस भेजे जाते हैं. साथ ही यहां की बांस से बनी वस्तुओं की मांग रहने के कारण बाहर के व्यापारी यहां से बांस से निर्मित वस्तुओं को अन्य राज्यों में ले जाकर कारोबार करते है. अन्य राज्यों में यहां के बांस से बनी वस्तुओं की मांग अधिक है. इन वस्तुओं में कारीगिरी रहने के कारण बाहर के बाजार में मांग है.

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चाकुलिया में बांस की खेती होती है मगर राज्य सरकार द्वारा यहां बम्बू प्रोसेसिंग प्लांट नही लगाने से यहां के किसानों और ग्रामीणों को इसका लाभ नही मिल पा रही है. वन विभाग के अनुसार चाकुलिया वन क्षेत्र में 250 हेक्टेयर भूमि पर बांस की खेती की जाती है. इसके अलावा गांव के किसानों द्वारा प्रखंड में लगभग तीन से चार हजार एकड़ पर बांस की खेती की जाती है. वन विभाग के कर्मचारियों ने बताया कि सरकार ने नेशनल बम्बू( बांस) मिशन के तहत बांस के व्यापार को फ्री कर दिया है जिससे किसानों को बांस की खेती से ज्यादा लाभ मिल सके. केंद्र सरकार ने भी देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए कृषि क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाओं का लागू किया. किसान खेती कर अपने आय का स्रोत बढ़ा सकते है, इसके लिए सरकार किसानों को छूट भी दे रही है. चाकुलिया में बांस की खेती को बढ़ावा देने के लिए वन रोपन विभाग द्वारा विगत माह बहरागोड़ा वन विश्रामागार में बम्बू प्रोसेसिंग प्लांट लगाया गया है. प्लांट में बांस की वस्तुओं का निर्माण किया जाएगा और निर्मित वस्तुओं को विभाग द्वारा बाजार उपलब्ध कराया जाएगा. इससे किसान और मजदूरों को रोजगार प्राप्त होगा. इससे दोनों की आमदनी बढ़ेगी. बहरागोड़ा के तर्ज पर चाकुलिया वन रोपन कार्यालय परिसर में भी बम्बू प्रोसेसिंग प्लांट का निर्माण किया जा रहा है. ताकि स्थानीय लोगों को रोजगार मिल सके.

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