jamshedpur-rural-गालूडीह में आदिम जनजाति सबरों की बस्ती का हाल, अत्यधिक मात्रा में देशी शराब का सेवन करने से बीमारी की चपेट में आ रहे सबर, 12 परिवार में मात्र 23 सबर जीवित

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प्रकाश दास / गालूडीह : आदिम जनजाति सबर का अस्तित्व खत्म होने के कगार पर है. गालूडीह थाना क्षेत्र के दारीसाई स्थित सबरों की बस्ती कभी गुलजार रहा करती थी. लेकिन अब इस बस्ती में सबरों के 12 परिवारों में कुल 23 व्यक्ति अभी जीवित है बाकी लोगों की मौत हो चुकी है. आये दिन इस बस्ती में एक बाद एक मौतें होती रहती है. दारिसाई ग्राम प्रधान तारा ने बताया कि अत्यधिक मात्रा में देशी शराब के सेवन से सबर लगातार टीबी बीमारी के चपेट में आ रहे है. जिसके कारण बस्ती में लगातार मौतें होती रहती है. यहां के सबर कम उम्र से ही शराब का सेवन करना शुरू कर देते है. कई परिवारों के बिरसा आवास वीरान पड़े है. गरीबी और बीमारी में जी रहे इन सबर परिवारों को देखनेवाला कोई नहीं है. सहिया के अनुसार बस्ती में टीबी के 2 मरीज है जिनका इलाज चल रहा है. सरकारी सुविधाओं की बात करे तो खैसा सबर ने बताया कि यहां के स्ट्रीट लाइट कई महीनों से खराब पड़े है. (नीचे भी पढ़ें)

बस्ती में दो जलमीनार है जिनमे से एक खराब पड़ा हुआ है. वहीं आवास की बात जाए तो सभी आवासों के खपरा टूटी हुई है. बरसात के समय घर में रहना मुश्किल हो जाता है. घर पानी से तालाब में तब्दील हो जाता है. सरकार दावा करती है कि जनधन योजना का लाभ देश के हर आखरी व्यक्ति को मिला है लेकिन बस्ती के बुधेश्वर सबर, दिनेश सबर, खेसा सबर, बिसु सबर ऐसे हैं जिनके पास अभी तक बैंक खाता नहीं है. बस्ती के स्व: सनातन सबर के शम्भू सबर दिव्यांग है मगर उनके पास दिव्यांगता प्रमाणपत्र नहीं है. विलुप्त होती आदिम जनजाति की रक्षा और उत्थान के लिए सरकार को इस और ध्यान देने की आवश्यकता है.

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