Jamshedpur : साहित्यकार नागेंद्र प्रसाद सिंह का निधन से जमशेदपुर के साहित्य जगत में शोक

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जमशेदपुर : हिंदी-भोजपुरी के सुप्रसिद्ध साहित्यकार और संपादक नागेंद्र प्रसाद सिंह का पिछले 8 सितम्बर 2021 को निधन हो गया. वह करीम सिटी कॉलेज के शिक्षा संकाय में प्राध्यापिका के रूप में कार्यरत तथा हिंदी व भोजपुरी साहित्यकार डॉ संध्या सिन्हा के पिता थे. उनके निधन से साहित्य समाज शोक संतप्त है. शहर के साहित्य प्रेमियों ने उनके निधन को हिंदी-भोजपुरी साहित्य के लिए अपूरणीय क्षति बताया है. नागेंद्र प्रसाद सिंह पटना विश्वविद्यालय से पढ़ाई पूरी कर मुद्रण व प्रकाशन के व्यवसाय में रहते हुए विभिन्न साहित्यिक सांस्कृतिक संस्था से जुड़े रहे. बिहार सरकार के भोजपुरी अकादमी के निदेशक के पद से सेवानिवृत्त हुए. नालंदा मुक्त विश्वविद्यालय, पटना और इंदिरा गांधी मुक्त विश्वविद्यालय, दिल्ली के भोजपुरी पाठ्यक्रम के निर्माण में इनका महत्वपूर्ण योगदान रहा. (नीचे भी पढ़ें)

इतना ही नहीं नागेंद्र प्रसाद सिंह ने विक्रमशिला विद्यापीठ से ‘विद्यावाचस्पति’ और इंटरनेशनल बायोग्राफिकल सेंटर की ओर से ‘ ट्‌वेंटिएथ सेंचुरी अवार्ड’ प्राप्त नागेंद्र प्रसाद सिंह ने 1962 में ‘बाल हिंदी व्याकरण’, 1963 में ‘ हिंदी में शिक्षा साहित्य : उपलब्धियां एवं संभावनाएं’, 1978 में भोजपुरी में शोधपरक निबंध ‘नवरंग’, 1978 में ही भोजपुरी के प्रतिनिधि गजल का सह-संपादन किया था. राष्ट्रभाषा परिषद से 1978 और 1987 में “भिखारी ठाकुर ग्रंथावली” भाग 1, भाग 2, मास्टर अजीज के रचना संग्रह का तथा अनेक पत्रिकाओं का संपादन किया. भारत सरकार के ‘ साहित्य अकादमी, दिल्ली’ से सहभाषा श्रृंखला में इनकी ‘भोजपुरी’ मोनोग्राफ 2017 में प्रकाशित हुई। कुल 5 भाग में “नागेंद्र प्रसाद सिंह समग्र रचनावली’ प्रकाशित है. प्रखर आलोचक नागेंद्र प्रसाद सिंह अपने पीछे पत्नी, दो पुत्र एवं तीन पुत्रियों का भरा पूरा परिवार छोड़ गए हैं.

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