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मंगलवार, अप्रैल 13, 2021
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    jharkhand-andolankari-झारखंड आंदोलनकारी 20 साल भी महसूस कर रहे है ठगे, मांगी सुविधाएं

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    जमशेदपुर : झारखण्ड आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा ने जमशेदपुर के उपायुक्त द्वारा मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नाम एक ज्ञापन सौंपा गया. इसके तहत इन लोगों ने एक मांत्रपत्र सौंपकर कार्रवाई की मांग की. इन लोगों ने कहा कि 20 साल बाद भी उनको किसी तरह की कोई सुविधा नहीं मिली है. इस मौके पर विश्वजीत प्रामाणिक, रसराज महतो, मेघनाथ महतो,आशुतोष सिंह सरदार,नासिर उद्दीन आंसारी, मदन मोहन महतो, शेखसुलतान आंसारी, अनिल चन्द्र महतो ,तपन महतो एंव शिवशंकर महतो आदि शामिल थे. झारखंड आंदोलनकारियों के त्याग, बलिदान एवं लंबे संघर्ष के परिणामस्वरूप झारखंड अलग राज्य का गठन हुआ. झारखंड आंदोलनकारियों ने अपने संघर्ष काल में अनेक तरह की उपेक्षाएं एवं तमाम यातनाएं झेली है, पलायन हुए हैं, हाशिए का जीवन जीते रहे हैं, घर-व्यापार सभी बर्बाद हुए हैं. झारखंड आंदोलनकारियों के मान, सम्मान, पहचान एवं पेंशन सुनिश्चित हों, ऐसी मांग की गयी..
    इन लोगों की मांगें यह है : (नीचे पूढ़े डिटेल खबर)

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    1. मारांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा एनई होरो, विनोद बिहारी महतो, निर्मल महतो, हिरामन महतो, देवेंद्र माझी, सीपी तिर्की, डा. रामदयाल मुंडा, डा. बी.पी. केसरी, लाल रणविजय नाथ शाहदेव, सुदर्शन भगत, रमेश सिंह मुण्डा, रीतलाल प्रसाद वर्मा, एके राय, दुर्गा सोरेन, सोबरन अंसारी, बसीर अहमद सहित हमारे सभी अमर पुरोधा झारखंड आंदोलनकारियों को महान झारखंड रत्न देकर अविलंब राजकीय पहचान व सम्मान प्रदान किया जाए। राज्य के दिशोम गुरू शिबू सोरेन से लेकर सुदेश कुमार महतो तक 1-1 झारखंड आंदोलनकारियों, साहित्यकारों, कलाकारों एवं पत्रकारों की सुनिश्चित कर राजकीय सम्मान से सम्मानित किया जाए। साथ ही सभी आंदोलनकारियों का नाम गजट में प्रकाशित किया जाए।
    2. झारखण्ड आंदोलनकारियों को स्वतंत्रता सेनानी का दर्जा दिया जाए व झारखंड अलग राज्य निर्माण की तिथि 15 नवंबर 2000 से झारखण्ड आंदोलनकारियों को मान सम्मान पेंशन दिया जाए। साथ ही झारखंड सरकार गृह विभाग द्वारा घोषित, संकल्प संख्या- 6 विविध-1013/2008-2018 का पालन करते हुए झारखंड आंदोलनकारियों को चिकित्सा सुविधा, आश्रितों को पेंशन, नियोजन एवं बच्चों को नियोजन आदि का लाभ सुनिश्चित किया जाए। बच्चों को निःशुल्क प्राइमरी स्तर से उच्चतर शिक्षा तक प्रदान किया जाए।
    3. झारखंड आंदोलनकारी चिन्हितिकरण आयोग का पुनर्गठन अविलंब किया जाए। आयोग में अध्यक्ष सहित कम से कम 11 सदस्य हों एवं आयोग का कार्यकाल कम से कम 3 वर्ष के लिए हों। आयोग में लंबित आवेदनों को चिन्हित करने के कार्य समयबद्ध हो। छूटे हुए आंदोलनकारियों के लिए विज्ञापन प्रकाशित कर सभी आवेदन आमंत्रित किया जाए।
    4. भारत सरकार के गृह एवं कारा आपदा प्रबंध अधिनियम 1952 के तहत जेल जाने की बाध्यता को समाप्त करते हुए सभी झारखंड आंदोलनकारियों को रु0 50,000/सम्मान पेंशन दिया जाए। यह लाभ राज्य गठन की तिथि 15/11/2000 से लागू किया जाए।
    5. झारखंड आंदोलनकारियों के लिए शहीद काॅरिडोर का निर्माण हो, राजधानी सहित सभी चैक-चैराहों, मार्गों व सरकारी संस्थानों का नामकरण किया जाए।
    6. झारखंड आंदोलनकारियों को झारखण्ड राज्य आवास बोर्ड की काॅलोनियों में मकान आवंटित करने की नीति तय की जाए एवं आवास हेतु न्यूनतम 20 डिसमिल जमीन एवं कृषि कार्य हेतु न्यूनतम 5 एकड़ जमीन की बन्दोबस्ती की जाए। झारखण्ड आंदोलनकारियों के वाणिज्य व्यापार के लिए ब्याज रहित ऋण रु0 50,00,000 तक मुहैया कराया जाएं। साथ ही विशेष योजना बनाकर शहरी/ग्रामीण व अधिसूचित क्षेत्रों में झारखण्ड आंदोलनकारियों एवं उनके उत्तराधिकारी को स्वरोजगार का लाभ प्रदान किया जाए।
    7. झारखंड आंदोलनकारियों के लिए राज्य व जिलों के परिसदनों में निःशुल्क ठहरने की व्यवस्था हो। राज्य के अंदर कहीं भी भ्रमण के लिए निःशुल्क यात्रा व रेलवे कूपन की नीति सरकार तय करें। आंदोलनकारियों के परिवार सहित सभी चिकित्सालय में विशिष्ट श्रेणी की मुफ्त चिकित्सा सुविधा प्रदान की जाए।
    8. राज्य/कमिश्नरी/जिला/अनुमंडल/प्रखंड स्तरीय राज्य सरकार की सभी समितियों, निगम, बोर्ड प्राधिकारों में झारखंड आंदोलनकारियों की सहभागिता 50 फीसदी तय किया जाए एवं राज्य सरकार की 20 सूत्री/15 सूत्री/ निगरानी समितियों के सभी अवसरों पर आंदोलनकारियों को 50 फीसदी स्थान दिया जाए।
    9. खनन, पट्टा स्वीकृति हेतु सभी प्रकार के खनिजों लीज, आॅर्डर में झारखंड आंदोलनकारियों को प्राथमिकता दी जाए एवं राज्य सरकार द्वारा निर्गत किए जाने वाले सभी प्रकार के व्यापारिक लाइसेंसों में आंदोलनकारियों कोटा 25 फीसदी तय किया जाए एवं कार्य आदेश भी सुनिश्चित की जाए।
    10. झारखंड आंदोलनकारियों व परिजनों की समस्याओं के समाधान करने के लिए स्थाई रूप से 1 सेल का गठन होना चाहिए।
    11. खेवट-2, जमीन के राजमार्ग का नामकरण झारखण्ड आंदोलनकारी एन ई होरो के नाम पर किया जाए।
    12. रांची-टाटा राजमार्ग का नामकरण झारखण्ड आंदोलनकारी शहीद निर्मल पथ किया जाए। रांची-चाईबासा मार्ग का नामकरण शहीद देवेंद्र माझी पथ किया जाए।
    13. पूर्व विधायक व झारखण्ड आंदोलनकारी कमल किशोर भगत, झारखण्ड आंदोलनकारी अलेस्टर बोदरा व मोहम्मद नईम को आरोपमुक्त किया जाए।

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