jharkhand-big-story-झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास के खिलाफ होगी एसीबी की जांच, सरयू राय के उठाये गये मैनहर्ट घोटाले को लेकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने दिया आदेश

राशिफल

रांची/जमशेदपुर : झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री के खिलाफ एंटी करप्सन ब्यूरो (एसीबी) जांच करेगी. एसीबी की जांच करने को लेकर झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपनी सहमति दे दी है. आपको बता दें कि सरयू राय ने रांची के सिवरेज-ड्रेनेज सिस्टम को लेकर मैनहर्ट परामर्शी की नियुक्ति से लेकर उसको पैसे देने के मामले को उठाया था. जमशेदपुर पूर्वी के वर्तमान विधायक और पूर्व मंत्री सरयू राय ने इस मामले को लेकर एक पुस्तक तक लिखी है, जो काफी प्रचारित हुआ था. इस मामले को लेकर पिछले दिनों ही यह शिकायत की गयी थी कि रघुवर दास जब नगर विकास मंत्री के रुप में काम कर रहे थे, तब उन्होंने मैनहर्ट घोटाला किया था. इसको लेकर सरयू राय ने एक पत्र भी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को लिखा था. इस पत्र में उन्होंने कई सारे तर्क दिये थे. इस मामले में दोषियों पर कार्रवाई करने की मांग की थी. रांची में सीवरेज ड्रेनेज सिस्टम को लेकर लिखे गये पत्र में सरयू राय ने कहा है कि राज्य भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने अग्रेतर कार्रवाई के लिये सरकार से अनुमति मांगी थी. इसके पूर्व भी तत्कालीन निगरानी ब्यूरो ने 2009 से 2011 के बीच पांच बार इस मामले की जांच के लिये सरकार से अनुमति मांगी थी, जो नहीं मिली थी. अब तक हुई इस कांड की जांच में पाया गया है कि अयोग्य होने के बावजूद मैनहर्ट परामर्शी की नियुक्ति हुई, एक षड्यंत्र के तहत तथ्यों की अनदेखी की गई, जांच के निष्कर्षों को दबाया गया. श्री राय ने मुख्यमंत्री का ध्यान 22 बिंदूओं की ओर आकृष्ट कराया है. मुख्यमंत्री से सरयू राय ने मांग की है कि मैनहर्ट की बहाली और बहाली में हुई अनियमितताओं पर पर्दा डालने का षड्यंत्र विभिन्न समितियों की जांच के बाद उजागर हो गया है. इसके लिये जिम्मेदार व्यक्तियों का भ्रष्ट आचरण भी सबके सामने आ गया है. भ्रष्ट आचरण और षड्यंत्र रचने के दोषियों पर कार्रवाई होना बाकी है. भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने इसके लिये सरकार से अनुमति मांगी थी. इसके बाद हेमंत सोरेन ने अपना आदेश जारी कर दिया. मेनहर्ट परामर्शी की अवैध नियुक्ति झारखंड की राजधानी रांची के सिवरेज-ड्रेनेज की बदहाल स्थिति का बड़ा कारण है. उल्लेखनीय है कि झारखंड राज्य बनने के बाद का यह पहला षड्यंत्र है जिसने बाद के दिनों के लिये अस्वस्थ उदाहरण छोड़ा है. विगत पांच वर्षों के शासनकाल में भ्रष्टाचार, अनियमितता, षड्यंत्र के जो अनेक मामले आये हैं वे इसी मानसिकता का पृष्ठपोषण करने वाले हैं. जिन्होंने मैनहर्ट की अवैध नियुक्ति के मामले में भ्रष्ट आचरण और षड्यंत्रकारी मनोवृति का परिचय दिया है वे तो 2005 से 2019 के बीच शासन-प्रशासन में उंचाईयों को छूते रहे पर रांची का सिवरेज-ड्रेनेज और रांची की जनता उनकी करतूतों का खामियाजा भुगतती रही. झारखंड सरकार का राजकोष भी इनका शिकार होते रहा. आरम्भ मे ही इन पर कारवाई हो गई होती तो संभवतः झारखंड सुशासन की राह पर लंबी दूरी तय कर चुका होता.

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