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jharkhand-Budget-2022- झारखंड बजट को लेकर सत्ता व विपक्ष के नेताओं ने दी अपनी अपनी प्रतिक्रिया, सत्ताधारी कांग्रेस व झामुमो ने जनहित में बताया, भाजपा और विधायक सरयू राय ने दिशाहीन व निराशाजनक बताया

राशिफल


रांचीः गांव, गरीब किसान, नौजवान, महिलाओं एवं आम जनता को केन्द्र बिन्दु मानकर पेश किया गया, विकासोन्मुख बजट मील का पत्थर साबित होगा. वैश्विक महामारी कोरोना से उबरने के बाद झारखंड की जनता से किये गये चुनाव के पूर्व वायदों को गति देने की दिशा में यह बजट कारगर साबित होने वाला है. उक्त बातें झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमिटी के प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर ने प्रतिक्रिया में कही. श्री ठाकुर ने कहा कि इस बजट में सभी का ख्याल रखा गया है. चाहे वृद्धजन हो, गृहणियां हो, विद्यार्थी हो, बेटियां हो, व्यवसायी जगत हो, किसान हो, सरकारी कर्मचारी हो, या राज्य के नवजवान हो सभी का खास ख्याल रहते हुए तथा आमजनता के जीवन यापन के बेहतर सुविधाओं के साथ-साथ रोजगार सृजन के मद्देनजर औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने लिए कार्यक्रमों और योजनाओं के प्रावधान के लिए वित्त मंत्री और राज्य के युवा एवं दूरदर्शी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को हार्दिक बधाई है. (नीचे भी पढ़े)

किसानों को 100 यूनिट बिजली मुफ्त देना अच्छी पहल : मंगल कालिंदी


विधायक मंगल कालिंदी ने कहा है कि बजट में आम लोगों और खासकर युवाओं के सुझावों को प्राथमिकता दी गई है. हेमंत सरकार ने बिजली, सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा की रचनाओं के विकास पर जोर दिया है. 40 हजार किसानों को स्वरोजगार से जोड़ा जाएगा जो कि अच्छी पहल है और साथ ही किसानों को 100 यूनिट बिजली मुफ्त देने से सीधा फ़ायदा किसानों को होगा.पारा शिक्षकों पर पिछली सरकार ने लाठियां बरसाई थी पर हमारी सरकार ने मानदेय के लिए अतिरिक्त 600 करोड़ रुपए का प्रस्ताव बजट में किया गया है जो सराहनीय हैं.

बजट घोषणा पत्र की तरह खोखला व दिशाहीन- रघुवर दास


झारखंड सरकार का बजट सत्ताधारी दलों के घोषणा पत्र की तरह ही खोखला और दिशाहीन है. फंड का रोना रोने वाली सरकार ने बजट का आकार तो बढ़ा दिया है, पैसे कैसे खर्च होंगे इसकी कोई ठोस नीति पेश नहीं की है. पिछले बार के 92,000 करोड़ के बजट को आधी राशि भी यह अक्षम सरकार खर्च नहीं कर पाई, इसके बावजूद बजट का आकार बढ़ाना समझ से परे है. खुद को किसान हितैषी और ग्राम हितैषी बताने वाली सरकार को न तो किसानों की चिंता की है, ना गांव की चिंता की है. युवाओं, महिलाओं के साथ किए चुनावी वादों को भी पूरा करने की मंशा नहीं दिखाई. बजट में न तो बहनों के लिए चूल्हा खर्च के लिए प्रावधान किया है, न ही युवाओं के बेरोजगारी भत्ता के लिए विशेष प्रावधान किया गया है. जब नीति, नियत और नेतृत्व दिशाहीन हो तो बजट भी ऐसा ही पेश होता है.

बजट में आम लोगों को नहीं रखा गया ख्यालः केंद्रीय अर्जुन मंत्री मुंडा

बजट पर केंद्रीय जनजाति मामलों के मंत्री एवं पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि विकास को नकारने वाला प्रतीत होता है. यह कहीं से भी राज्य के लिए अपेक्षित विकास और चुनौतियों के लिए समीचीन नहीं कहा जायेगा. एक ओर संसाधन अभिवृद्धि में वित्तीय प्रबंधन नकारा सिद्ध हो रहा है, वहीं उपबंधित राशि के विनियोजन सही समय पर सफलतापूर्वक नहीं किये जाने के कारण जमीनी स्तर पर इसके आउटकम नहीं दिखाई पड़ता है. झारखंड में विकास की असीम संभावनाएं हैं. आवश्यकता इस बात की है कि समय सापेक्ष चुनौतियों को अपने आर्थिक प्रबंधन एवं सकल विनियोजन को साकार करने की. केंद्र सरकार ने जहां ससमय केंद्रीय करों, अंशदान एवं आर्थिक सहायता में कोताही नहीं बरती, वहीं राज्य सरकार कई मामलों में पीछे है.

बजट दिशाहीन व जनविरोधी : राजेश शुक्ल


प्रदेश भाजपा के वरिष्ठ नेता और वरीय अधिवक्ता राजेश कुमार शुक्ल ने झारखंड बजट को दिशाहीन , जनविरोधी और निराशा जनक बताया. सरकार ने बिजली मुफ्त देने का वादा तो जरूर किया है लेकिन यह महज घोषणा है. वर्तमान झारखंड सरकार ने लाखों लाख बेरोजगारों को नौकरी देने का वादा तो किया लेकिन उसे पूरा नही किया. शिक्षा के क्षेत्र में पर्याप्त बजट का प्रावधान नही है. महिला ,युवा और किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की कोई बृहद योजना नही है. पूर्व की रघुवर दास की सरकार ने इन क्षेत्रों में जो विकास किया था उसे अवरुद्ध करने का काम वर्तमान राज्य सरकार ने किया है. इससे विकास अवरुद्ध होगा. पुलिस के आधारभूत संरचना के आधुनिकीकरण और पर्यटन के क्षेत्र में विकास के लिए सरकार की कोई बृहद योजना इस बजट में नहीं है. श्री शुक्ल ने बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस बजट में अधिवक्ताओं की कल्याणकारी योजनाओं पर राज्य सरकार ने न तो ध्यान दिया है और न ही अधिवक्ता हित को महत्व दिया है जबकि दूसरे राज्यों में अधिवक्ताओं की कल्याणकारी योजनाओं के लिए बजट में निधि का आवंटन किया जाता है. इसलिए यह बजट निराशा जनक भी है.

जो दिखाता हो बहुत है लेकिन वास्तविकता कुछ औरविधायक सरयू राय


जमशेदपुर पूर्वी के विधायक सरयू राय ने झारखंड सरकार द्वारा पेश किए गए बजट को सरकारी दस्तावेज की तरह बताया, कहा कि जो दिखाता तो बहुत है लेकिन वास्तविकता को छिपा लेता है. इस बजट में क्रियान्वित होने वाली योजनाओं का उल्लेख तो वित्त मंत्री के बजट भाषण में है पर गत वर्ष की योजनाओं के वित्तीय एवं भौतिक प्रगति की समीक्षा का उल्लेख नहीं है. सिविल डिपोजिट और पीएल अकाउंट में जमा निधि की उपयोगिता का विश्लेषण नहीं है. अब तक राज्य सरकार ने योजना व्यय का मात्र 40 प्रतिशत ही खर्च किया है. बजट वस्तुतः राज्य के प्रशासनिक ढांचा की योजना कार्यान्वयन क्षमता के पंगु होने का संकेत है. झारखंड की वित्त व्यवस्था को एक निर्मम विश्लेषण की ज़रूरत है जो ग़ैर सरकारी व्यक्तियों एवं विशेषज्ञों तथा सक्षम संस्थानों से ही संभव है.ज़मीनी स्तर पर पूंजी निर्माण की प्रक्रिया को गतिशील करने के आलोक में झारखंड के प्रचुर प्राकृतिक संसाधनों को जनहित के दृष्टिकोण से उदार एवं समावेशी दृष्टिकोण से विस्तारित करना राज्य की वित्त व्यवस्था को गति देने के लिये एक आवश्यक शर्त है जिसका बजट में अभाव है. इसके बिना बजट मात्र निर्जीव आंकड़ों का पुलिंदा बनकर रह जाता है.

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