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jharkhand-cm-in-action-झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भ्रष्टाचार को लेकर उठाया अहम कदम, बिजली बोर्ड के पूर्व चेयरमैन समेत अन्य लोगों के खिलाफ अभियोजन की दी मंजूरी

राशिफल

रांची : मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने झारखंड राज्य विद्युत बोर्ड के पूर्व चेयरमैन शिवेंद्रनाथ वर्मा और तत्कालीन बोर्ड के वित्त सदस्य आलोक शरण के खिलाफ जांच के आदेश जारी कर दिये है. उनके खिलाफ पहले से ही केस दायर है, जिसकी जांच करने का आदेश दिया गया है. उनके अलावा उत्तर प्रदेश की दोनों कंपनियों के अधिकारियों के खिलाफ जांच करन ेको कहा गया है. प्राथमिकी अभियुक्तों पर वर्ष 2011-2012 में झारखण्ड राज्य विद्युत बोर्ड, भारत हेवी इलेक्ट्रीक्लस लिमिटेड (भेल), भोपाल एवं मेसर्स नॉर्दन पावर इरेक्टर लिमिटेड (एनपीईएल) के पदाधिकारियों के साथ मिलीभगत कर आपराधिक षड्यंत्र के तहत बेईमानी से स्वर्णरेखा जल विद्युत यंत्र, सिकीदरी (स्वर्ण रेखा हाइड्रो इलेक्ट्रसिटी प्रोजेक्ट, सिकीदरी) के मरम्मती एवं रख-रखाव के लिए मनोनयन के आधार पर 2.5 करोड़ रूपये के कार्य को बहुत ही ऊचें दर 20.87 करोड़ रूपये में भेल को दे दिया. झारखण्ड राज्य विद्युत बोर्ड के पदाधिकारियों ने बेईमानी से भारत हेवी इलेक्ट्रीक्लस (भेल ), भोपाल द्वारा निर्धारित भुगतान की शर्तों के आधार पर स्थापित वित्तीय नियमों के विरूद्ध एवं सीवीसी के नियमों का उल्लंघन करते हुए भुगतान कर दिया. साथ ही, भारत हेवी इलेक्ट्रीक्लस लिमिटेड (भेल), भोपाल के पदाधिकारियों ने बेईमानी से स्वर्णरेखा जल विद्युत यंत्र, सिकीदरी (स्वर्ण रेखा हाइड्रो इलेक्ट्रसिटी प्रोजेक्ट, सिकीदरी) के मरम्मती एवं रख-रखाव से संबंधित कार्य को मेसर्स नॉर्दन पावर के साथ 15.32 करोड़ रूपये में सबलेट/कॉन्ट्रैक्ट कर लिया, जो सीवीसी के नियमों के विरूद्ध है तथा मेसर्स नॉर्दन पावर द्वारा उक्त कार्य को 5.55 करोड़ रूपये की लागत पर निष्पादित कर दिया. इस प्रकार भारत हेवी इलेक्ट्रीक्लस लिमिटेड (भेल). भोपाल एवं मेसर्स नॉर्दन पावर इरेक्टर लिमिटेड द्वारा खराब गुणवत्ता के कार्य करने एवं विलंब से कार्य संपादित करने के कारण झारखण्ड राज्य विद्युत बोर्ड को वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा. इसके अतिरिक्त वर्ष 2005 के दौरान मरम्म्ती और रख-रखाव का कार्य झारखण्ड राज्य विद्युत बोर्ड द्वारा मेसर्स हेवी इलेक्ट्रीक्लस (भेल) लिमिटेड, भोपाल को निविदा के आधार पर 59.75 लाख रूपये में दिया गया था, जबकि वर्ष 2012 में कार्य को बेईमानी से बहुत ही ऊचें दर 20.87 करोड़ रूपये पर नोमिनेशन के आधार पर दे दिया गया. इस प्रकार उपरोक्त प्राथमिकी अभियुक्तों पर सरकारी पद का दुरूपयोग करते हुए, लापरवाही, धोखाधड़ी, बेईमानी, जालसाजी के नीयत से आपराधिक षड्यंत्र के तहत वित्तीय अनयिमितता करते हुए गैर कानूनी ढंग से सरकारी राशि के गबन करने आरोप है.

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