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jharkhand-covid-19-failure-##हेमंत सोरेन जी, देखिये लोगों की जान से हो रहा खेल, बंगाल-ओड़िशा- झारखंड सीमा पर कोई सुरक्षा नहीं, स्वास्थ्य मंत्री के जिला में ”थर्मामीटर” से झारखंड आने वालों की सीमा पर हो रही जांच, झारखंड सीमा पर बने ”क्वारंटाइन सेंटर” में जानवरों की तरह रखे गये है 250 से ज्यादा लोग, आठ दिनों बाद भी स्वास्थ्य की जांच नहीं, बीमारी फैलने का खतरा, देखिये सीमांत इलाके की sharpbharat.com की ग्राउंड रिपोर्ट

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बिना किसी सुरक्षा के बंगाल, ओड़िशा और झारखंड सीमा.

ब्रजेश सिंह
जमशेदपुर : झारखंड सरकार के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भले ही कोरोना वायरस की लड़ाई लड़ने के लिए कोशिशें करने का दावा करते हो, लेकिन हकीकत यह है कि उनके सिपाहसलार बीमारी को रोकने के बजाय उसको बढ़ाने का काम कर रहे है. लोगों की जान से खेल रहे है. ऐसा सच सामने आया है http://www.sharpbharat.com की ग्राउंड रिपोर्टिंग में. ”शार्प भारत” की टीम जमशेदपुर से करीब 200 किलोमीटर दूर स्थित झारखंड, बंगाल और ओड़िशा की सीमा पर जब पहुंची तो वहां चौंकाने वाली चीजें देखने को मिली.

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बंगाल, झारखंड व ओड़िशा सीमा पर खोला गया स्वास्थ्य जांच केंद्र और तैनात अकेला कर्मचारी.

जमशेदपुर (पूर्वी सिंहभूम जिले) के अंतर्गत बहरागोड़ा से आगे तीन राज्यों के सीमा वाले चौक के हालात को देखकर हमारी टीम की आंखें फटी की फटी रह गयी. वहां कोई सुरक्षा नहीं थी. कोई पुलिसवाले तक नहीं थे. गाड़ियां आराम से बंगाल की ओर से ओड़िशा की ओर जबकि ओड़िशा से बंगाल की ओर जबकि बंगाल और ओड़िशा से झारखंड की आना जाना कर रही थी. उसी चौक पर झारखंड सरकार के स्वास्थ्य विभाग की ओर से एक काउंटर कोरोना वायरस की जांच के लिए बना दिया गया है. जहां सिर्फ एक व्यक्ति बैठा है.

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बंगाल, ओड़िशा और झारखंड की सीमा पर थर्मामीटर से जांच करने बैठे स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी.

वहां आने वाले लोग अगर रुक गये और खुद की जांच कराना चाहे तो उनकी जांच करने का कोई इंतजाम नहीं है. सोशल डिस्टेंशिंग की जहां बात हो रही है, लोग एक दूसरे से मिल तक नहीं सकते है, वैसी स्थिति में लोगों के स्वास्थ्य की जांच थर्मोमीटर से किया जा रहा है, यानी आदमी के शरीर का तापमान उनके मुंह में या फिर शरीर में लगाकर देखा जा रहा है. वहीं थर्मोमीटर फिर दूसरे में भी लगा दिया जा रहा है. वैसे लोग रुक ही नहीं रहे और कोई जांच करने वाला ही नहीं है कि कौन ओड़िशा से या कोलकाता से झारखंड में प्रवेश कर रहा है तो कोई रुकेगा क्यों. वैसे उनके पास जांच के नाम पर सिर्फ थर्मामीटर ही है. वैसे आपको बता दें कि देश के साथ झारखंड में थर्मोस्कैनर से जांच हो रही है, जिसको दूर से ही शरीर का तापमान जांच लिया जाता है ताकि संक्रमण नहीं फैला. ऐसी स्थिति उस जिले का है, जहां खुद स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता खुद रहते है.

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बंगाल, झारखंड और ओड़िशा सीमा पर बहरागोड़ा उच्च विद्यालय में बनाया गया क्वारंटाइन सेंटर.

यहां से करीब आधा किलोमीटर की दूरी पर ही एक क्वारंटाइन सेंटर बनाया गया है. बहरागोड़ा प्लस टू उच्च विद्यालय को क्वारंटाइन सेंटर बनाया गया है. 250 से ज्यादा लोगों को यहां रखा गया है. 30 मार्च से ही सारे लोगों को यहां रखा गया है. यहां रहने वाले लोग ओड़िशा या बंगाल से किसी दूसरे राज्य या जिला जाने के दौरान सीमा पर 30 मार्च को पकड़े गये थे. उस दिन से उनको यहां एक स्कूल में रख दिया गया है.

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जानवरों जैसे हालात में ये सारे लोग रहने को मजबूर है. वैसे यह उन लोगों की ही गनिमत है कि वे लोग खुद से ही नहीं निकल रहे है नहीं तो गेट पर कोई सुरक्षा तक नहीं है. एक सुरक्षाकर्मी हाथों में डंडा लेकर खड़ा है. खाने के लिए दोपहर में और शाम के वक्त गाड़ी आती है, खाना देकर चला जाता है. दो से तीन दिनों से वहां नाश्ता सामाजिक लोग देकर चले जा रहे है.

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यहां न तो सोशल डिस्टेंशिंग ही रखी जा रही है और न ही साबुन या किसी सामान का इंतजाम किया गया है. लोग जानवरों की तरह रहने को मजबूर है. कोई उत्तर प्रदेश का है, कोई ओड़िशा का तो कोई झारखंड तो कोई दक्षिण भारत का रहने वाला है. सभी लोग एक साथ रह रहे है. वहीं खाना है, वहीं सोना है. वहां न तो सोने के लिए कुछ दिया गया है, ना खाने को दिया गया है.

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सबसे ज्यादा आपत्तिजनक है कि एक साथ 250 लोग रह रहे है, लेकिन अब तक उनके स्वास्थ्य की जांच भी नहीं हो सकी है जबकि उनके वहां रहते हुए आठ दिन बीत चुके है. वे लोग तो खुद डरे हुए है कि उनके बीच ही कोई बीमारी नहीं फैल जाये. लोग तो चाहते है कि या तो उनको उनके घर भेज दिया जाये या फिर उनको रखना है तो ठीक से रखे.

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हालात यहां है कि सिर्फ स्कूल को खोल दिया गया है. स्कूल में साबुन, खाने के सामान समेत तमाम अभाव ही अभाव है, लेकिन लोगों को वहां से निकलना नहीं है. वे लोग जानते है कि अगर निकलेंगे तो कहीं न कहीं पकड़े जायेंगे. घरवालों से बात तो हो रही है, लेकिन अगर रिचार्ज खत्म हो गया तो रिचार्ज करना मुश्किल होगा, इस कारण कम ही बात करते है क्योंकि मोबाइल को चार्ज करने का भी समस्या है.

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हकीकत डराने वाली है. चाहे बड़ी-बड़ी बातें सरकार करती होगी, लेकिन हकीकत यह है कि धरातल पर कोई जांच तक नहीं हो रहा है और जांच के नाम पर कोई व्यवस्था तक नहीं है. यह तो झारखंड के एक सीमावर्ती इलाके का सर्वे में यह खुलासा हुआ है, लेकिन अन्य सारे जगहों पर भी ऐसे हालात होंगे तो निश्चित तौर पर परेशानियां ही होगी. ऐसे में झारखंड कैसे कोरोना वायरस से लड़ेगा, यह देखने वाली बात होगी.

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