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jharkhand-elephant-death-पश्चिम सिंहभूम जिले में करंट लगने से हाथी की मौत, 6 माह में 5 हाथियों की मौत, वन विभाग का सिस्टम फेल

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चाईबासा : पश्चिमी सिंहभूम जिले के अंतर्गत पड़ने वाले तांतनगर प्रखंड और मंझारी प्रखंड में हाथियों पर सामंत आ गयी है. वन विभाग द्वारा गजराजों को बचाने वाली योजना धरातल पर नहीं उतर पा रही है. इसके कारण कभी करंट लगने से गजराज की मौत हो जाती है तो कभी हाथियों की आपस में लड़ाई होने से मौत हो रही है. बीती रात कोल्हान प्रमंडल के पश्चिम सिंहभूम जिला के मंझारी थाना अंतर्गत रंकुई जंगल के पास बिजली तार की चपेट में आने से एक हाथी की मौत हो गई. इसमें वन विभाग और बिजली विभाग की घोर लापरवाही सीधे देखने को मिल रही है. जांगीबुरु घाटी के ऊपर रंकुई गांव के पास हाथी के आने-जाने का कोरिडोर है. हमेशा उसी रास्ते से हाथियों का झुंड आना-जाना करता है. इसके बावजूद वन विभाग की टीम को नीचे झूल रहे बिजली की तार की फिक्र हुई और ना ही बिजली विभाग को ठीक करने की जरूरत समझते है. इसका परिणामस्वरूप एक हाथी उसकी चपेट में आ गया और घटनास्थल पर ही मौत हो गई. स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार घटना रात करीब 12 से 1 बजे के बीच बताई जा रही है. बिजली की लाइट गांव में कटी थी. चर्चा हो रही है कि उसी दौरान हाथी नीचे झुल रही बिजली तार की चपेट में आ गया होगा. उसी की वजह से गांव का भी लाइट कट गया. सुबह जब ग्रामीण देखें तो एक हाथी मरा पड़ा हुआ था. समाचार लिखे जाने तक न ही वन विभाग और न बिजली विभाग की टीम घटनास्थल पर पहुंची थी. पिछले 6 माह में पश्चिम सिंहभूम जिला में 5 हाथियों की मौत हो चुकी है. उसमें से दो हाथी बिजली की चपेट में आने से मरे हैं जबकि एक ट्रेन की चपेट में और दो बच्चा हाथियों के झुंड में कुचलने की वजह से मौत हुई है.

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