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jharkhand-government-big-decision-झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का क्षेत्रीय भाषाओं और जातियों को बढ़ावा देने के लिए उठाया गया दो अहम कदम, ”मुंडारी हो एवं उरांव-कुड़ुख” जनजातीय भाषाओं को 8 वीं अनुसूची में शामिल करने के लिए केंद्र को भेजा पत्र, ”कुड़मी” समेत ”बैकवर्ड क्लास” बीसी-1 और बीसी-2 के 36 जातियों के नाम केंद्रीय ओबीसी सूची में शामिल करने के लिए भेजेगा प्रस्ताव, सीएम ने दी मंजूरी, किन जातियों को केंद्रीय ओबीसी बनाने का भेजा जाना है प्रस्ताव, देखें सूची

रांची : झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने शनिवार को केंद्र सरकार को दो अहम फैसला लेने के लिए दबाव बढ़ाया है. इसके तहत भाषा और जातियों की पहचान को बढ़ाने के लिए दबाव बनाया गया है और केंद्र सरकार को अलग-अलग दो पत्र और प्रस्ताव भेजा है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने जनजातीय भाषा मुंडारी हो एवं कुड़ुख को भारत के संविधान की आठवीं अनुसूची में सम्मिलित किए जाने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को को पत्र लिखा है. श्री सोरेन ने पत्र में कहा है कि झारखंड एक आदिवासी बहुल राज्य है और यहां एक बड़े क्षेत्र में जनजातीय भाषाएं प्रचलन में है. ऐसे में उम्मीद जतायी है कि संताली भाषा की ही तरह इन जनजातीय भाषाओं को भी आठवीं अनुसूची में शामिल किया जाएगा. मुख्यमंत्री ने पत्र में कहा है कि राज्य सरकार जनजातीय भाषाओं के विकास और संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है. इस दिशा में कई कदम भी उठाए गए हैं. उन्होंने यह भी लिखा है कि झारखंड में मुंडारी, हो एवं कुड़ुख को पहले ही द्वितीय राजभाषा का दर्जा दिया जा चुका है. मुख्यमंत्री ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से आग्रह किया है कि इन भाषाओं को आठवीं अनुसूची में शामिल करने से इनके विकास का मार्ग प्रशस्त होगा.

बीसी -एक और बीसी- दो कोटि के अधिसूचित कुल 36 जातियों का नाम केंद्रीय ओबीसी की सूची में सम्मिलित करने के लिए केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय को भेजा जाएगा प्रस्ताव
झारखंड में बीसी (बैकवर्ड क्लास)-एक और बीसी- दो कोटि के अधिसूचित कुल 36 जातियों का नाम केंद्रीय ओबीसी की सूची में सम्मिलित करने के लिए केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय से अनुरोध करने के प्रस्ताव को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने स्वीकृति दे दी है. झारखंड में यह सभी जातियां बीसी-एक और बीसी-दो में शामिल है लेकिन केंद्रीय ओबीसी की सूची में शामिल नहीं होने की वजह से इन्हें केंद्र सरकार और केंद्रीय उपक्रमों की नौकरियों में आरक्षण का लाभ नहीं मिल पा रहा है.

इन जातियों को शामिल करने का भेजा जाएगा प्रस्ताव
1- कुड़मी
2-माहिस्य
3-मगदा -गौड़ महाकुड़ /गोप, ग्वाला
4-चंद्रवंशी/ रवानी
5-हजाम
6-बारी
7-बागची
8-राजभट (मुसलिम)
9-शाह, फ़क़ीर, मदार, देवान
10-शेख
11-कुम्हार/ कुंभकार
12-सोय
13-तिली /एकादश तिली /द्वादश टिली /एकादश तेली/ द्वादश तेली
14-वागाल/ खंडवाल खंडुवाल खंडाइत
15-खैरा
16-परघा/ परीधा/पैरधा / पलीआर/
17-मड़ैया
18-कुलु/गोराई
19-सुंडी/
20- वीयार
21-वेश बनिया एवं एकादश बनिया
22-ग्वाला {मुस्लिम }
23-जदुपतिया
24-गोसाई, गिरि सन्यासी ,अतित, अतिथ
25-परथा
26-बनिया { रॉकी एवं बियाहूत कलवार, जयसवाल, जैशवार, कमलापुरी, वैश्य, बनिया, माहुरी, बैस्य, बंगी वैश्य, वर्णवाल, गधबनिक/ गधबनिया /ओमर /उमर वैश्य /वर्णवाल/गंधबनिया / गंधबनिक/ ओमर/उमर वैश्य/ बनिया / बनवार}
27-घासी महाकुल /म्हकुल
28-सुवर्ण वणिक अष्टलोही कर्मकार, स्वर्णकार
29-सूत्रधार
30-जैसवार कुर्मी एवं चंदेल कुर्मी
31- राजभाट /ब्रह्मभाट
32-वैष्णव
33-पाइक,
34-चासा
35- क्याली
36-मलिक (मुस्लिम)शामिल है.

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