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jharkhand-health-camp-गुजरात में चल रही तीन दिवसीय स्वास्थ्य चिंतन शिविर का दूसरा दिन, स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता ने झारखंड में स्वास्थ्य से संबंधित समस्याओं से केंद्र को कराया अवगत, जमशेदपुर, धनबाद व रांची में एम्स की मांग

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रांची : केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा गुजरात के केवड़िया में तीन दिवसीय स्वास्थ्य चिंतन शिविर का आयोजन किया गया. कार्यक्रम गुरुवार से शनिवार तक चलेगी. इस चिंतन शिविर की अध्यक्षता केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ मनसुख मांडविया कर रहे हैं. इस सम्मेलन का उद्देश्य चिकित्सा और सार्वजनिक स्वास्थ्य क्षेत्रों से संबंधित नीतियों व कार्यक्रमों के कार्यान्वयन की समीक्षा और आम लोगों के लाभ के लिए इन नीतियों व कार्यक्रमों के बेहतर कार्यान्वयन के तरीकों और साधनों की सिफारिश करना है. टैंट सिटी नर्मदा, केवड़िया में आयोजित स्वास्थ्य चिंतन शिविर का उदघाटन गुजरात के माननीय मुख्यमंत्री भूपेंद्र भाई पटेल ने किया. शिविर में भारत सरकार की स्वास्थ्य राज्य मंत्री डॉ भारती प्रवीण पवार, नीति आयोग के सदस्य डॉ व्ही के पॉल, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के उपराज्यपाल एडमिरल डी. के जोशी, उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे सहित उन्नीस राज्यों व केंद्रीय शासित प्रदेशों के मंत्री व आला अधिकारियों ने भाग लिया. स्वास्थ्य चिंतन शिविर में झारखंड का प्रतिनिधित्व स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता, अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य चिकित्सा शिक्षा परिवार कल्याण विभाग अरुण कुमार सिंह एवं झारखंड राज्य एड्स कंट्रोल सोसायटी के कार्यक्रम निदेशक भुवनेश प्रताप सिंह कर रहे हैं. (नीचे भी पढ़ें)

चिंतन शिविर के दौरान भारत सरकार के स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ पदाधिकारियों से मिलकर झारखंड में व्याप्त कुपोषण जैसी समस्याओं से अवगत कराया गया. साथ ही बताया गया कि खनिज संपदा से भरपूर होने के बावजूद झारखंड पिछड़ा हुआ है क्योंकि यह राज्य अपने हक से वंचित रहा है. इसका मुख्य कारण है कि केंद्रीय सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं के चयन के समय झारखंड के साथ सदैव पक्षपात किया जाता रहा है. मंत्री बन्ना गुप्ता ने कहा कि राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता में राज्यों का विकास बाधित नहीं होना चाहिए. राज्यों में किसी भी पार्टी की सरकार है, केंद्र को योजनाओं के आवंटन में दोहरा मापदंड नहीं अपनाना चाहिए. मंत्री बन्ना गुप्ता ने जमशेदपुर, धनबाद एवं रांची के लिए तीन एम्स की मांग रखी. उन्होंने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री से आग्रह किया कि बुजुर्गों के लिए बूस्टर डोज निःशुल्क मुहैया कराई जाए. झारखंड एक गरीब राज्य है, यहां की जनता पर बूस्टर डोज के शुल्क का बोझ डालना उचित नहीं है. 

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