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रविवार, जून 20, 2021
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jharkhand-health-workers-strike-called-off-झारखंड के हड़ताली स्वास्थ्यकर्मियों हड़ताल स्थगित, स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता व स्वास्थ्य सचिव ने की पहल, हड़ताल को कोरोना के कारण स्थगित करने का ऐलान, गम्हरिया स्वास्थ्य केंद्र में प्रभावित रहा कामकाज, भारतीय मजदूर संघ के नेता कृष्णा सिंह ने भी किया था समर्थन

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रांची : झारखंड के हड़ताली झारखंड अनुबंधित पारा चिकित्सा कर्मचारियों ने अपनी हड़ताल को स्थगित कर दी है. शुक्रवार को राज्य के स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता, स्वास्थ्य सचिव डॉ नीतिन मदन कुलकर्णी के साथ अलग-अलग बैठक हुई, जिसके बाद उनकी हड़ताल को स्थगित कर दिया गया. स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता के साथ देर शाम को मीटिंग हुई. इस मीटिंग के बाद स्वास्थ्य विभाग के हड़ताली कर्मचारियों ने साफ तौर पर कहा कि अभी कोरोना वायरस के संक्रमण को देखते हुए वे लोग हड़ताल को स्थगित कर रहे है. कर्मचारियों के प्रतिनिधियों ने कहा कि सरकार ने कहा है कि उनके संबंध में ठोसपूर्ण फैसला लेने वाले है. अगर फैसला सकारात्मक नहीं लिया गया तो वे लोग फिर से आंदोलन करेंगे. सरकार के आश्वासन के बाद हड़ताल को इन लोगों ने समाप्त कर दिया है. इस बैठक के बाद स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता ने कहा कि हड़ताल को कर्मचारियों ने समाप्त किया है. उनके संबंध में की गयी मांगों को लेकर सकारात्मक कदम उठाया जायेगा. इसको लेकर वार्ता जारी रखा जायेगा और झारखंड की जनता की सेवा के लिए सारे लोग काम पर लौट जाये. स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि हम लोगों के आग्रह को स्वास्थ्य कर्मचारियों ने हड़ताल को वापस ले लिया है, यह सम्मान की बात है. इन लोगों ने कहा है कि हड़ताल को वापस लेने के बाद भी बातचीत जारी रखते हुए उनकी मांगों को पूरा करने पर विचार होगा. स्वास्थ्यकर्मियों ने इस वार्ता के बाद घोषणा की है कि शनिवार से वे लोग काम पर लौट आयेंगे.

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गम्हरिया में स्वास्थ्य कर्मियों का आंदोलन का असर
एक ओर जहां भारत पूरे विश्व के साथ कोरोना महामारी की लड़ाई लड़ रहा है और कोरोना को हराने का भरपूर प्रयास कर रहा है. वहीं इन सब के बीच लड़ाई लड़ने वाले सैनिक का मैदान छोड़ अनशन पर चले जाना काफी गंभीर विषय बन सकता है. जी हां हम बात कर रहे हैं विगत चार दिनों से सरायकेला जिले के गम्हरिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में अनशन पर बैठे उन तमाम एएनएम एवं एनएचआरएम के अनुबंध कर्मियों का. जिन्हें सरकार से अब यह अल्टीमेट मिल गया है, कि अगर अनशन जारी रहा तो अनशन में भाग लेने वाले तमाम अनुबंध कर्मियों को बर्खास्त कर दिया जाएगा. ऐसे असंवेदनशील फैसले की खबर सुनते ही तमाम अनुबंध कर्मियों ने अपना आंदोलन और उग्र कर दिया है. जहां इंकलाब जिंदाबाद के नारों के साथ सरकार के इस फैसले का विरोध उन्होंने बर्खास्त करेगा नहीं निकलेंगे और लाठी चलेगी नहीं सहेंगे जैसे नारों से किया. सरायकेला-खरसावां जिले के गम्हरिया सथित सामुदायिक भवन में आंदोलन की अध्यक्षता रूबी कुमारी कर रही है. उन्होंने बताया कि पूरे झारखंड में 7 सूत्री मांगों को लेकर आंदोलन किया जा रहा है जिसमें से 5 मांगों पर सरकार ने अपनी सहमति बनाई है, लेकिन वे और उनके साथी तमाम मांगों को लेकर अनशन जारी रखे हुए हैं. वहीं उन्होंने बताया कि अनुबंध कर्मियों से सरकार की कोई भी संवेदनाएं नहीं जुड़ी हुई है. एक तरफ पिछले13 वर्षों से वे लगातार निर्बाध सेवा देते जा रहे हैं, लेकिन इस कोरोना जैसी वैश्विक महामारी के काल में जब एक अनुबंध कर्मी कोरोना से संक्रमित होने के बाद मर जाता है, तो भी सरकार के तरफ से उनके लिए कोई मुआवजा नहीं दिया जाता है, वहीं जब उनसे पूछा गया कि सरकार ने अनशन में जुड़े अनुबंध कर्मियों को बर्खास्त करने का आदेश जारी किया है, तो उसके जवाब में अध्यक्ष रूबी कुमारी ने बताया ऐसी धमकियों से अब वे और उनके साथी डरने वाले नहीं हैं. जहां स्वास्थ्य केंद्र का प्रांगण इंकलाब के नारों से गूंज रहा था वहीं अनशन करने वालों में से एक एएनएम की आंखों में दर्द देखा गया पूछने पर उसने बताया की उनका 1 साल का बच्चा है जिसे छोड़कर वे लगातार कोरोना संक्रमण काल में सेवा देती चली आ रही है, लेकिन उसके बाद भी सरकार उनके प्रति संवेदनशील नहीं दिख रही है. वेतन की वृद्धि नहीं होने के कारण अपने साथ परिवार का भरण पोषण कर पाना अब इनके लिए मुश्किल होता जा रहा है.

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भारतीय मजदूर नेता कृष्णा सिंह पहुंचे
झारखंड अनुबंधित पारा चिकित्सा कर्मचारियों की हड़ताल के बीच भारतीय मजदूर संघ के कोल्हान अध्यक्ष कृष्णा सिंह स्वास्थ्यकर्मियों का समर्थन करने के लिए पहुंचे. उनके साथ कृष्णा चंद्र महतो, रोशन कुमार समेत अन्य लोग भी थे. सभी कर्मचारियों के बीच कृष्णा सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि इस विषय को झारखंड सरकार के साथ-साथ केंद्र सरकार के समक्ष भारतीय मजदूर संघ रखेगा और समस्या का समाधान जल्द से जल्द करने की ओर तत्पर रहेगा. सभी मजदूरों ने कर्मचारियों के साथ मिलकर आधे घंटे तक नारेबाजी की. कृष्णा सिंह ने कर्मचारियों के बीच अपने संबोधन में कहा कि सरकारी कर्मचारी घोषित करना होगा या समान काम का समान वेतन देना होगा या 60 साल की उम्र तक काम पर से नहीं हटाया जाए और सम्मानजनक वेतन देते रहे.

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