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शनिवार, मई 15, 2021
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jharkhand-high-court-news-झारखंड के ‘नियोजन नीति’ को लेकर हाईकोर्ट में सुनवाई पूरी, पीठ ने फैसला सुरक्षित रखा, बिहार के बाहुबली सांसद प्रभुनाथ सिंह के भाग्य का फैसला 28 अगस्त को करेगी झारखंड हाईकोर्ट

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रांची : नियोजन नीति के तहत झारखंड के 13 जिलों में तृतीय और चतुर्थ वर्ग के सभी पद आरक्षित करने को चुनौती देने वाली याचिका पर हाईकोर्ट में बहस पूरी हो गई है. तीन जजों की पीठ ने इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रखा है. सोनी कुमारी ने 13 जिलों के सभी पद आरक्षित करने को हाईकोर्ट में चुनौती दी है. झारखंड सरकार ने नियोजन नीति के तहत राज्य के 13 को अधिसूचित जिला और 11 को गैर अधिसूचित जिला घोषित किया है. अधिसूचित जिले की सभी पद उसी जिले के लोगों के लिए आरक्षित रखा गया है. 13 जिलों के सभी पद आरक्षित करने को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है, जिसमें सभी पक्षों का बहस सुनने के बाद पीठ ने इस मामलें में फैसला सुरक्षित रख लिया है.

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बिहार के पूर्व सांसद प्रभुनाथ सिंह को लेकर फैसले का इंतजार
बिहार के मशरख के पूर्व विधायक अशोक सिंह हत्याकांड में हजारीबाग जेल में बंद पूर्व सांसद प्रभुनाथ सिंह की अपील पर शुक्रवार को हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. कोर्ट ने सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों के दलील को सुना. अब जमानत पर 28 अगस्त को फैसला आएगा. यह जानकारी हाई कोर्ट के अधिवक्ता हेमंत सिकरवाल ने दी. पूर्व सांसद
प्रभुनाथ सिंह, उनके भाई दीनानाथ सिंह और रितेश सिंह हजारीबाग सेंट्रल जेल में बंद हैं. हजारीबाग न्यायालय ने प्रभुनाथ सिंह, उनके भाई दीनानाथ सिंह और रितेश सिंह को इस मामले में 18 मई 2017 को दोषी ठहराया था, जिसके बाद उनके अधिवक्ता ने हाईकोर्ट में फैसले को चुनौती दी थी. इस पर हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रखा है. ज्ञात हो कि 3 जुलाई 1995 को पटना में विधायक अशोक सिंह की हत्या कर दी गई थी. अशोक सिंह की हत्या के बाद उनकी पत्नी चांदनी देवी ने प्रभुनाथ सिंह और उनके दो भाइयों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कराया था. इस मामले को सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर केस को बिहार से झारखंड की हजारीबाग अदालत में स्थानांतरित कर दिया गया था. जहां सुनवाई के बाद प्रभुनाथ सिंह सहित अन्य लोगों को दोषी ठहराया गया था, जिसके बाद से तीनों हजारीबाग जेल में सजा काट रहे है.

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