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jharkhand-high-court-रांची में 15 अक्टूबर तक अतिक्रमण हटाने के मामले में हाईकोर्ट में हुई सुनवाई, गरीबों को दो दिन का नोटिस देकर हटाना उचित नहीं, कोर्ट इतना निर्मम नहीं की बरसात में गरीबों का आशियाना उजाड़ने की इजाजत देगा

रांची : झारखंड हाइकोर्ट ने रांची नगर निगम और जिला प्रशासन को 15 अक्तूबर तक अतिक्रमण कर बनाये गये किसी भी निर्माण को ध्वस्त नहीं करने का निर्देश दिया है. अदालत ने अतिक्रमित जमीन पर निर्माण करनेवाले गरीबों को सरकार की योजना के तहत पुनर्वास करने का भी निर्देश दिया है. गुरुवार को अतिक्रमण से संबंधित मामले की सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस डॉ रवि रंजन और जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की अदालत ने यह निर्देश दिया.अदालत ने कहा कि मीडिया में आयी खबरों के अनुसार जिला प्रशासन और नगर निगम हाइकोर्ट के आदेश के बाद अतिक्रमण हटा रहा है. खबरों के अनुसार अतिक्रमण हटाने में जिला प्रशासन और नगर निगम भेदभाव कर रहा है. संपन्न और रसूख वालों का अतिक्रमण नहीं हटाया जा रहा है, लेकिन गरीबों को तुरंत बेघर कर दिया जा रहा है. जिला प्रशासन और नगर निगम की यह कार्रवाई गलत है और किसी के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए. गरीबों को दो दिन का नोटिस देकर हटाना उचित नहीं है और कोर्ट इतना निर्मम नहीं हो सकता. अदालत ने प्रशासन और निगम को गरीबों को निर्माण हटाने के लिए पर्याप्त समय देने का निर्देश दिया और कहा कि बरसात में किसी का भी निर्माण नहीं तोड़ा जाना चाहिए. इतनी मानवता सभी को दिखाने की जरूरत है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि अतिक्रमण की छूट दे दी गयी है.सुनवाई के दौरान मौजूद नगर विकास सचिव से अदालत ने पूछा कि ऐसे गरीबों के पुनर्वास के लिए सरकार के पास कोई योजना है या नहीं. इस पर सचिव ने बताया कि सरकार के पास योजना है. प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बेघरों को घर दिया जाता है. कई लोगों को इसका लाभ भी मिला है. इस पर अदालत ने कहा कि ऐसे लोगों के अतिक्रण हटते हैं और वह बेघर होते हैं, तो सरकार उनका पुनर्वास करे और गरीबों की इस योजना का उन्हें लाभ भी दिया जाये.

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