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मंगलवार, मई 11, 2021
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jharkhand-highcourt-order-झारखंड हाईकोर्ट ने 2019 के बाद की बहाली में सवर्णों को 10 फीसदी आरक्षण देने का सुनाया फैसला, 22 जनवरी से होने वाली इंजीनियरों की बहाली की परीक्षा रद्द, बहाली का विज्ञापन नये सिरे से निकालने का आदेश

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रांची : झारखंड हाईकोर्ट ने गुरुवार को आर्थिक रुप से कमजोर सवर्ण जाति को 10 फीसदी आरक्षण देने के मामले में अहम फैसला सुनाया है. झारखंड हाईकोर्ट ने जेपीएससी द्वारा निकाली गयी असिस्टेंट इंजीनियर (एइ) की बहाली को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है. जेपीएससी को फिर से विज्ञापन निकालने का निर्देश दिया गया है. झारखंड हाईकोर्ट ने अपने आदेश में वर्ष 2019 के बाद से जितनी भी बहाली हुई है, उसमें सवर्णों को दस फीसदी आरक्षण देने का आदेश दिया है. आपको बता दें कि रंजीत कुमार शाह ने सहायक अभियंता की नियुक्ति को चुनौती देते हुए अदालत में एक याचिका दायर की थी. उनका कहना था कि सहायक अभियांता नियुक्त वर्ष 2015 से लेकर 2019 तक की है. राज्य सरकार ने 23 फरवरी 2019 को सवर्णों को दस फीसदी आरक्षण देने का फैसला लिया है. इसके अनुसार ही नियुक्ति के लिए जेपीएससी को बहाली निकालने का आदेश दिया था. इस नियुक्ति में 2015 और 2016 की वेकेंसी को भी शामिल कयिा गया था. ऐसे में इस वर्ष में आर्थिक रुप से कमजोर सवर्णों को आरक्षण नहीं दिाय जा सकता है क्योंकि कानून 2019 से लागू हुई है. जेपीएससी की ओर से अधिवक्ता संजय पिपरवाल और अधिवक्ता प्रिंस कुमार सिंह ने दलील दी थी कि सरकार की अधिसूचना के मुताबिक ही जेपीएससी बहाली निकाली है. वहीं सरकार का यह दलील थी कि सरकार के पास अधिकार है कि वह बहाली निकाल सकती है, जिसको हाईकोर्ट ने खारिज कर दी और कहा कि 2019 में कानून लागू हुई तो उससे पहले के बहालियों में इसको नहीं ल ागू किया जा सकता है. जस्टिस एसके द्विवेदी की अदालत ने तत्काल सहायक अभियंता के विज्ञापन को रद्द करने का आदेश दिया. इसके बाद नये सिरे से इसके लिए विज्ञापन निकालने को कहा. गौरतलब है कि 22 जनवरी से पूरे राज्य में यह परीक्षा होने वाली थी, जिसके तहत 542 पोस्ट पर बहाली होनी है. सिविल इंजीनियर के पद पर 542 और मैकेनिकल इंजीनियर के 92 पद के लिए यह बहाली निकाली गयी है.

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