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jharkhand-horse-trading-case-झारखंड के विधायकों की खरीद-बिक्री मामले में कोर्ट में सरकार ने रखा पक्ष, सरकारी वकील ने कहा-केस के अनुसंधानकर्ता के पास पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास, अजय कुमार और एडीजी अनुराग गुप्ता के खिलाफ पर्याप्त सबूत, पीसी एक्ट को जोड़ने की इजाजत दी जानी चाहिए, कोर्ट के फैसले पर सबकी नजर

रांची : झारखंड हाईकोर्ट में 2016 के राज्यसभा चुनाव में विधायकों की खरीद-बिक्री मामले में (हार्स ट्रेडिंग) रांची के सिविल कोर्ट में सुनवाई हुई. इस दौरान सरकार का पक्ष सरकारी वकील (अपर लोक अभियोजक) श्रद्धा जया टोपने ने रखा. सरकारी वकील ने सुनवाई के दौरान यह जानकारी कोर्ट को दी कि केस के अनुसंधानकर्ता (आइओ) द्वारा कई सबूत इस मामले में इकट्ठा किये गये है. इसके तहत कई साक्ष्य है, जो यह साबित करता है कि भ्रष्टाचार निरोधक कानून प्रीवेंशन ऑफ करप्सन एक्ट (पीसी एक्ट) के तहत पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास, पूर्व प्रेस सलाहकार अजय कुमार और एडीजी अनुराग गुप्ता के खिलाफ केस चलाया जा सकता है. इसकी इजाजत दी जा सकती है. इस मामले में 5 जून को भी कोर्ट में सुनवाई हुई थी. सुनवाई में कोर्ट ने सारे मामले को जानने के बाद फैसला को सुरक्षित रख लिया था. सुनवाई के दौरान आइओ के आवेदन पर बहस हुई, जिसमें सारे लोगों ने अपना पक्ष रखा था. इस मामले में फिर से सुनवाई 10 जून को निर्धारित की गयी है.
2016 के राज्यसभा चुनाव में जानें क्या हुआ था और क्यों रघुवर दास और अन्य पर चल रहा केस, क्या है मामला
राज्यसभा के 2016 के चुनाव में हुए हार्स ट्रेडिंग के मामले में पूर्व सीएम रघुवर दास, रघुवर दास के सीएम रहते हुए पूर्व सलाहकार रहे अजय कुमार का नाम इस मामले में जोड़ने की इजाजत मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने दी थी. इसके बाद इस मामले के अनुसंधानकर्ता ने आरोपियों के खिलाफ पीसी एक्ट के तहत धारा जोड़ने की इजाजत मांगने के लिए कोर्ट में अर्जी दी है, जिसको लेकर बुधवार को सुनवाई चल रही है. आपको बता दें कि झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास, एडीजी अनुराग गुप्ता और रघुवर दास के कार्यकाल में उनके कार्यकाल में प्रेस सलाहकार रहे अजय कुमार के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक कानून (प्रीवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट) के तहत मुकदमा चलाने को मंजूरी दे दी थी. वर्ष 2016 में राज्यसभा चुनाव के दौरान विधायकों की खरीद-बिक्री से संबंधित यह मामला है, जिसमें पहले से ही अनुराग गुप्ता और अजय कुमार को नामजद आरोपी बनाया गया था और अब रघुवर दास को भी गैर प्राथमिक अभियुक्त बनाया था. 2016 के राज्यसभा चुनाव में भाजपा से धीरज साहू जीते थे जबकि कांग्रेस के एमजे अकबर ने चुनाव जीता था. आरोप है कि एडीजी अनुराग गुप्ता, अजय कुमार ने रघुवर दास के कहने पर भाजपा के राज्यसभा प्रत्याशी को जीताने के लिए अपने पक्ष में मतदान कराने के लिए कांग्रेस विधायक निर्मला देवी को घूस की रकम देने की कोशिश की थी. निर्मला देवी पूर्व कांग्रेस मंत्री योगेंद्र साव की पत्नी है और वर्तमान में कांग्रेस विधायक अंबा प्रसाद की मां है. इस मामले को लेकर एक वीडियो भी वायरल हुआ था, जिसमें रघुवर दास और अजय कुमार को रांची के धुर्वा स्थित योगेंद्र साव के घर पर भी गये थे. वीडियो में रघुवर दास ने सबकुछ ठीक कर देने की बात कह रहे थे. जब रघुवर दास योगेंद्र साव से मिले थे, तब पुलिस की नजर में वे फरार चल रहे थे. इस ऑडियो और वीडियो के बाद झारखंड विकास मोर्चा के अध्यक्ष रहते हुए बाबूलाल मरांडी (अब भाजपा विधायक दल के नेता है) ने इस मामले की शिकायत चुनाव आयोग से की थी. चुनाव आयोग ने अपनी जांच में शिकायत को सही पाया था, जिसके बाद झारखंड सरकार को चुनाव आयोग ने निदेशित किया था कि इस मामले में एफआइआर दर्ज कर अजय कुमार और अनुराग गुप्ता के खिलाफ कार्रवाई की जाये. इस मामले को लेकर जगन्नाथपुर थाना में एक एफआइआर अनुराग गुप्ता के खिलाफ रघुवर दास सरकार ने दर्ज कर दी थी. उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की गयी थी, लेकिन अजय कुमार के खिलाफ कोई कार्रवाई नही हुई. अजय कुमार उस वक्त प्रधान सचिव के स्तर पर राजनीतिक सलाहकार थे. बाद में हेमंत सोरेन की सरकार बनी तो अनुराग गुप्ता को हटाया गया और उनके खिलाफ कार्रवाई शुरु कर दी गयी.

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