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Jharkhand-lockdown-झारखंड में लॉकडाउन को लेकर अब तक कोई स्पष्ट गाइडलाइन नहीं, केंद्र ने दी है ग्रीन व ऑरेंज में छूट, मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव को दिये गाइडलाइन, निजी अस्पताल नहीं खुले तो निबंधन रद्द होगा, रांची अभी रेड जोन, 10 जिले ऑरेंज जोन और बाकी 13 जिले ग्रीन जोन में

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रांची : केंद्र सरकार ने लॉकडाउन को लेकर लोगों को राहत दी है, लेकिन इसको लेकर झारखंड में लॉकडाउन में केंद्र सरकार के गाइडलाइन के मुताबिक राहत देगी या नहीं, यह कोई स्प्ष्ट तौर पर जानकारी नहीं दी गयी है. वैसे रेड जोन, ओरेंज जोन और ग्रीन जोन को लेकर अलग-अलग गाइडलाइन केंद्र सरकार की ओर से जारी किया गया है.

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अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस के मौके पर आज से प्रवासी मजदूरों की झारखंड वापसी का सिलसिला शुरू हो चुका है.

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यह तबतक जारी रहेगा, जबतक लॉकडाउन की वजह से दूसरे राज्यों में फंसे मजदूर, किसान, विद्यार्थी और पर्यटक समेत अन्य लोगों को वापस नही ले आते हैं. मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने मुख्यमंत्री आवास में मंत्रिमंडल की उपसमिति और पदाधिकारियों के साथ बैठक में बताया कि प्रवासी मजदूरों और विद्यार्थियों समेत अन्य लोगों को वापस लाने की अनुमति दिए जाने के 24 घंटे के अंदर इनकी वापसी का सिलसिला शुरु हो चुका है. जहां हैदराबाद से 12 सौ मजदूर लौट रहे हैं, वहीं झारखंड में फंसे पश्चिम बंगाल के मजदूरों को बस से वापस भेजा गया है औऱ वहां फंसे झारखंड के मजदूर इसी बस से वापस अपने घर आएंगे. उन्होंने बैठक में कोरोना संक्रमण को लेकर हो रहे बदलाव को लेकर बनाई जा रही कार्ययोजना की जानकारी देने के साथ  मंत्रियों से सुझाव भी लिए, वहीं पदाधिकारियों से इससे निपटने की दिशा में किए जा रहे कार्यों की पूरी जानकारी ली.

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विशेष ट्रेन से आएंगे कोटा में फंसे विद्यार्थी

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मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्थान के कोटा में झारखंड के लगभग 2883 विद्यार्थी अभी फंसे हुए हैं. इन विद्यार्थियों को वापस लाने के लिए दो विशेष ट्रेन की व्यवस्था की गई है. एक ट्रेन संभवतः आज रात औऱ दूसरी कल रवाना होगी. वहीं अन्य राज्यों में फंसे विद्यार्थियों और भेल्लोर समेत दूसरे राज्यों के अस्पतालों में इलाज कराने गए झारखंड के मरीजों को लाने की दिशा में भी सरकार ने तैयारी शुरू कर दी है. बहुत जल्द इन्हें भी वापस लाया जाएगा.

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पहले चरण में पड़ोसी राज्यों में फंसे मजदूर वापस आएंगे

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मुख्यमंत्री को मुख्य सचिव  सुखदेव सिंह ने बताया कि मजदूरों को चरणबद्ध तरीके से लाने के लिए कार्य योजना तैयार कर ली गई है. पहले चरण में बिहार, पश्चिम बंगाल, ओड़िसा, छत्तीसगढ़ ओऱ मध्य प्रदेश के कुछ इलाकों से मजदूरों को बस से वापस लाया जाएगा. यहां लगभग 34 हजार झारखंड के मजदूर फंसे हुए हैं. इनकी पूरी सूची तैयार कर ली गई है. इसके उपरांत दूर के राज्यों से प्रवासी मजदूरों को विशेष ट्रेन से लाने की प्रक्रिया शुरु होगी. इसके अलावा जहां कम संख्या में लोग फंसे हैं, उन्हें हवाई जहाज से लाने पर भी सरकार विचार कर रही है.

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अंतरराज्यीय और अंतर जिला आवागमन के लिए भी दिशा निर्देश जारी

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मुख्यमंत्री को मुख्य सचिव ने बताया कि अंतरराज्यीय और अंतर जिला आवागमन को लेकर भी संबंधित अधिकारियों को दिशा निर्देश दे दिए गए हैं. इसके अंतर्गत जो लोग अपने वाहन से आना चाहंगे, उन्हें संबंधित जिलों के उपायुक्त द्वारा पास निर्गत किया जाएगा. वहीं, राज्य के बाहर जो फंसे हैं, वे संबंधित जिले के उपायुक्त के पास  के लिए आवेदन देंगे. अगर उन्हें किसी तरह की दिक्कतें आती हैं तो वे इसके लिए राज्य सरकार से संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा राज्य के अंदर दूसरे जिलों में फंसे लोग वहां के उपायुक्त से पास लेकर वापस आ सकेंगे, लेकिन यह पास एक निश्चित समय अवधि के लिए ही निर्गत किया जाएगा. इसका उन्हें हर हाल में पालन करना होगा.

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मजदूरों की होगी स्क्रीनिंग, फिर भेजा जाएगा

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बैठक में बताया गया कि लौटने वाले प्रवासी मजदूरों और विद्यार्थियों के चिकित्सीय जांच, भोजन औऱ रहने की व्यवस्था की जा रही है. लौटने के बाद उन्हें भोजन उपलब्ध कराया जाएगा. इसके बाद उनके एक निश्चित किए गए जगह पर रहने की व्यवस्था की जाएगी. फिर, सभी का चिकित्सीय जांच कराया जाएगा. जो स्वस्थ पाए जाएंगे उन्हें घर भेजा जाएगा औऱ पूरी एहतियात बरतने का निर्देश दिया जाएगा, वहीं जिनमें थोड़ा सा भी संक्रमण का खतरा होगा, उसका कोविड अस्पताल अथवा उनके घर में ही क्वारेंटीन कर इलाज किया जाएगा.

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मजूदरों की घर वापसी के बाद बढ़ेगी चुनौती, निपटने के लिए राज्य सरकार तैयार कर रही कार्य योजना

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मुख्यमंत्री ने कहा कि लाखों प्रवासी मजदूरों की वापसी के बाद चुनौतियां बढ़ेंगी. खासकर उनको रोजगार देना सबसे बड़ा चैलेंज होगा. इस वजह से अभी से ही इस दिशा में कार्ययोजना तैयार की जा रही है. ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में रोजगार सृजन के लिए अलग-अलग वृहद कार्ययोजना बनाई जा रही है.  राज्य के सभी उद्योग-धंधों का आकलन किया जा रहा है. इन उद्योग धंधों में लगभग 75 प्रतिशत स्थानीय लोगों को रोजगार देना सुनिश्चित करने के लिए सरकार कदम उठाएगी. सरकार की कोशिश यही है कि राज्य की आंतरिक क्षमता का पूरा इस्तेमाल हो, ताकि ना सिर्फ यहां के लोगों को रोजगार मिलेगा, बल्कि दूसरे प्रदेशों के लोग भी यहां रोजगार करने के लिए आ सकेंगे.

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मनरेगा का बढ़ेगा बजट, जिनका जॉब कार्ड नहीं होगा उनका बनाया जाएगा

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मुख्यमंत्री ने कहा कि बड़ी संख्या में मजदूरों के वापस लौटने पर उनके सामने रोजगार सबसे बड़ी समस्या होगी. ऐसे में इन मजदूरों को उनके घर पर ही रोजगार देने के लिए सरकार ने विस्तृत कार्ययोजना बनाई है. इसके तहत मनरेगा का बजट बढ़ाया जाएगा. इसमें नई योजनाओं को शामिल किया जाएगा और मनरेगा मजदूरी दर बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार को पत्र भेजा जाएगा.

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ई-संजीवनी व्यवस्था शुरू, टेलीमेडिसीन से मरीजों को मिलेगा परामर्श

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मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना के अलावा दूसरे बीमारियों से ग्रसित मरीजों के इलाज को लेकर सरकार गंभीर है. इस सिलसिले में टेलीमेडिसीन की सुविधा शुरू की जा रही है और ई-संजीवनी की शुरूआत भी हो चुकी है. मरीज इसके माध्यम से स्वास्थ्य परामर्श विशेषज्ञ डॉक्टरों से ले सकते हैं.

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निजी अस्पताल नहीं खुले तो निबंधन रद्द होगा

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मुख्यमंत्री को स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव ने बताया कि अभी भी ज्यादा निजी अस्पताल औऱ नर्सिंग होम बंद हैं. इस कारण दूसरे रोगों के मरीजों का इलाज नहीं हो पा रहा है. इस बाबत निजी अस्पताल के संचालकों को चेतावनी दी गई है कि वे अपने अस्पताल को खोलें, वरना उनका निबंधन रद्द करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी.

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राज्य में चिन्हित किए जा चुके हैं 34 कंटेनमेंट जोन

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स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव ने मुख्यमंत्री को बताया कि कोरोना संक्रमण को लेकर राज्य में 34 कंटेनमेंटे जोन चिन्हित किए गए हैं.  इसके अलावा रांची अभी रेड जोन, 10 जिले ऑरेंज जोन और बाकी 13 जिले ग्रीन जोन में हैं. फिलहाल 800 से 900 सैंपलों के टेस्ट हर दिन किए जा रहे हैं. इस बैठक में मंत्री रामेश्वर उरांव, मंत्री चंपई  सोरेन , मंत्री बन्ना गुप्ता और मंत्री सत्यानंद भोक्ता के अलावा मुख्य सचिव सुखदेव सिंह, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव राजीव अरुण एक्का, स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव डॉ नीतिन मदन कुलकर्णी और प्रधान सचिव श्विअनाश कुमार मौजूद रहे.

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