spot_img

jharkhand-loss-6500-crore-in-iron-ore-mines-झारखंड की रघुवर सरकार ने 2019 में सेल को रायल्टी पर प्रीमियम लिये बिना पश्चिम सिंहभूम में दे दिया था आयरन ओर माइंस, कर्नाटक ने लड़कर केंद्र सरकार से हासिल किया 1500 करोड़ सालाना प्रीमियम, झारखंड को करीब 6500 करोड़ रुपये का नुकसान, क्यों चुप है झारखंड की हेमंत सरकार, सरयू राय ने भी उठाये सवाल

राशिफल

रांची/जमशेदपुर : झारखंड को खान खनिज के रुप में जाना जाता है. इस खनिज को लेकर केंद्र सरकार भी झारखंड को दोहन का ही माध्यम मानकर काम करती है. ऐसा ही वाक्या फिर से सामने आया है. 16 अक्टूबर 2019 को हुए कैबिनेट की बैठक में तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास की सरकार की कैबिनेट ने 14.15 हेक्टेयर भूमि सेल को लौह अयस्क खदान का खनन पट्टा को वर्ष 2040 तक के लिए अवधि विस्तार दे दिया था. यह लौह अयस्क खदान पश्चिम सिंहभूम जिले के गुवा माइंस में टोपाइलोर खनन पट्टा है, जिसको 2019 में ठीक चुनाव के पहले भाजपा की रघुवर सरकार ने दे दी थी. ऐसा ही वाक्या कुछ कर्नाटक में हुआ था, जहां कर्नाटक की सरकार ने केंद्र सरकार के खिलाफ हाईकोर्ट से लेकर केंद्र सरकार तक में लड़ाई लड़कर करीब 1500 करोड़ रुपये सालाना प्रीमियम हासिल किया है. कर्नाटक सरकार ने लड़ाई लड़ा तो केंद्र सरकार ने उनको लौह अयस्क के खदान के बदले 22.5 फीसदी प्रीमियम दिलवाया है, जो एनएमडीसी उपलब्ध करायेगी. अगर कर्नाटक सरकार की तर्ज पर झारखंड की सरकार की ओर से इसको लेकर अपना विरोध दर्ज कराया जाता है और सरकार इसकी लड़ाई लड़ती है तो सरकार को वर्ष 2040 तक के लिए करीब 6500 करोड़ रुपये का लाभ हो सकता है, जिसकी राशि खाली पड़े झारखंड के खजाने को भरने के लिए काफी होगा. इस मसले को पूर्व मंत्री और जमशेदपुर पूर्वी के विधायक सरयू राय ने भी इसको लेकर सवाल उठाये है और कहा है कि झाररखंड सरकार चाहेगी तो 6500 करोड़ रुपये हासिल कर सकती है.
क्या है कर्नाटक का मामला-कर्नाटक के खनन जिला माने जाने वाले बल्लारी जिले के डोनीमलाई खान से लौह अयस्क निकालने पर राज्य सरकार ने 80 फीसदी प्रीमियम लगा दिया था. इसके बाद देश की सबसे बड़ी खनन कंपनी एनएमडीसी ने लौह अयस्क निकालने का काम स्थगित कर दिया था. यह 3 नवंबर 2018 से बंद कर दिया गया. एनएमडीसी डोनिमलाई से 70 लाख टन लौह अयस्क (आयरन ओर) के खनन की अनुमति थी. लेकिन कर्नाटक सरकार ने 80 फीसदी प्रीमियम का डिमांड को जारी रखा. इस बीच एनएमडीसी ने कर्नाटक हाईकोर्ट का रास्ता अपनाया, जिसके बाद हाईकोर्ट ने कर्नाटक सरकार के खिलाफ फैसला सुनाया. इसके बावजूद सरकार ने हाईकोर्ट के फैसले को मानने के बजाय खनन के लीज को ही रद्द कर दिया. इसके बाद एनएमडीसी ने सरकार के ट्राइब्यूनल में इसको चुनौती दी. ट्राइब्यूनल में मामले का रास्ता निकाला गया, जिसके बाद यह तय हुआ कि कर्नाटक सरकार को केंद्र सरकार के माध्यम से एनएमडीसी रायल्टी का 22.5 फीसदी प्रीमियम देगा, जिससे करीब 1500 करोड़ रुपये की आमदनी कर्नाटक की सरकार को होगी. एमएमडीआर एक्ट के तहत कर्नाट सरकार और इस्पात मंत्रालय के बीच समझौता हुआ, जिसके बाद इसका रास्ता तय हो सका.
क्या है झारखंड के साथ कर्नाटक के मामले की समानता-झारखंड की रघुवर दास की सरकार ने 16 अक्टूबर 2019 को पश्चिम सिंहभूम जिले के गुवा माइंस में टोपाइलोर खनन पट्टा को वर्ष 2040 तक के लिए केंद्र सरकार की नवरत्न कंपनी सेल को प्रदान कर दी थी. इस मामले में राज्य सरकार की ओर से किसी तरह का प्रीमियम का डिमांड तक नहीं किया, जिससे झारखंड को खनन के बदले काफी नुकसान उठाना पड़ा. अब झारखंड सरकार चाहे तो इसको लेकर केंद्र सरकार के साथ इसकी राशि का डिमांड कर सकता है.

[metaslider id=15963 cssclass=””]

WhatsApp Image 2022-04-29 at 12.21.12 PM
WhatsApp-Image-2022-03-29-at-6.49.43-PM-1
Shiv Yog Physiotherapy And Yoga Classes
spot_img

Must Read

Related Articles

Don`t copy text!