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jharkhand-promotion-policy-झारखंड सरकार 15 दिनों के भीतर प्रोन्नति में आरक्षण को लेकर लेगी फैसला, झारखंड के सताधारी पार्टियों के 6 विधायकों ने मुख्यमंत्री से मिलकर जतायी आपत्ति, तमतमाये मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने जल संसाधन विभाग में हुए प्रोमोशन पर लगायी रोक, विधानसभा समिति कर चुकी है अनुशंसा, सरकार प्रोमोशन पर नहीं ले सकी है फैसला

रांची : झारखंड सरकार द्वारा प्रोमोशन में आरक्षण को लेकर रोक लगायी गयी है. इस रोक के बावजूद जल संसाधन विभाग ने बैक डेट से प्रोमोशन दे दिया था. इस मसले को लेकर राज्य के कांग्रेस विधायक बंधु तिर्की, झामुमो के चाईबासा से विधायक दीपक बिरुआ, चक्रधरपुर के झामुमो विधायक सुखराम उरांव, मंझगांव के झामुमो विधायक निरल पूर्ति, लातेहार से झामुमो के विधायक बैजनाथ राम और मनिका से झामुमो विधायक रामचंद्र सिंह ने मिलकर इसकी शिकायत की और कहा कि जब प्रोन्नति में आरक्षण को लेकर फैसला ही नहीं हुआ है तो कैसे यह प्रोमोशन दे दिया गया. बैक डेट से सारे प्रोमोशन दिये गये है. इस पर तत्काल मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने जवाब तलब किया और सारे प्रोमोशन पर रोक लगा दी और कहा है कि 15 दिनों के अंदर प्रोन्नति में आरक्षण को लेकर विधानसभा समिति की अनुशंसा पर कोई ना कोई फैसला राज्य सरकार ले लेगी. बताया जाता है कि जल संसाधन विभाग में रोक के बीच बैकडेट से कई लोगों को प्रोमोशन दे दिया गया था. जल संसाधन विभाग अभी मिथलेश ठाकुर उर्फ मुन्नु ठाकुर के अधीन है. आपको बता दें कि राज्य में पिछले छह माह से प्रोमोशन पर रोक लगायी गयी है. इसकी वजह से कई सरकारी अधिकारी और कर्मचारी रिटायर हो चुके है और उनको कोई प्रोमोशन भी नहीं मिल पा रहा है. दरअसल, झारखंड सरकार ने 24 दिसंबर 2020 को एक आदेश निकाला था और सरकार की सभी सेवाओं और पदों में प्रोन्नति पर अगले आदेश तक के लिए रोक लगा दी थी. इस रोक की वजह नहीं बतायी गयी थी, लेकिन बताया जाता है कि एससी-एसटी के प्रोन्नति के मामले से संबंधित विधानसभा की विशेष समिति की रिपोर्ट के बाद ही यह रोक लगायी गयी थी. वैसे यह मामला हाईकोर्ट में भी लंबित है.
झारखंड विधानसभा की विशेष समिति ने की गड़बड़ी की शिकायत

झारखंड विधानसभा की विशेष समिति ने राज्य में प्रोमोशन में गड़बड़ी की शिकायत राज्य सरकार से की थी. कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सौंपी और सररकार से प्रोमोशन पर तत्काल रोक लगाने की मांग की थी. समिति ने पहले के सारे प्रोमोशन की जांच की भी मांग की थी. विशेष समिति में कांग्रेस के विधायक बंधु तिर्की, भाजपा के विधायक नीलकंठ सिंह मुंडा, भाजपा के विधायक अमर बाउरी, झामुमो के विधायक दीपक बिरुआ ने प्रोन्नति में गड़बड़ी का मामला सामने लाया था और कहा था कि एससी और एसटी कर्मचारियों के साथ अन्याय हो रहा है. इस कमेटी की यह अनुशंसा थी कि झारखण्ड गठन से अब तक अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के वरीय कर्मचारियों को प्रोन्नति से वंचित कर सामान्य कर्मियों को दी गई प्रोन्नति को रद्द किया जाए. झारखण्ड गठन के बाद वैसे अनुसूचित जाति, जनजाति के वरीय कर्मियों को प्रोन्नति से वंचित रखा गया, उन्हें भूतलक्षी प्रभाव से आर्थिक लाभ के साथ प्रोन्नति देना सुनिश्चित किया जाए, नियम विरुद्ध प्रोन्नति की कार्रवाई में शामिल प्रोन्नति समिति के तत्कालीन सभी पदाधिकारियों को चिन्हित करते हुए एससी-एसटी, एट्रोसिटीज के तहत कानूनी कार्रवाई की जाए तथा विभागीय कार्रवाई प्रारंभ की जाए, प्रोन्नति समिति के लिए नियम विरुद्ध प्रोन्नति का प्रस्ताव गठित करने वाले कार्यालय के पदाधिकारी, कर्मी पर एससी एसटी, एट्रोसिटीज के तहत प्राथमिकी दर्ज कर विभागीय कार्रवाई की जाए, झारखण्ड सरकार के मुख्य सचिव तथा प्रधान सचिव व प्रधान सचिव कार्मिक विभाग के विरूद्ध कर्तव्य के प्रति लापरवाही और विशेष समिति को दिग्भ्रमित करने एवं एससी एसटी के सरकारी सेवकों को प्रताड़ित किए जाने के आलोक में एससी एसटी, एट्रोसिटीज के तहत कानूनी कार्रवाई की जाए, वर्तमान विषय वस्तु से हटकर एससी एसटी के प्रोन्नति से संबंधित कोई मामला अगर लंबे समय से न्यायालय में लंबित है तो सशर्त प्रोन्नति प्रदान की जाए.

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