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jharkhand-tribal-advisory-council-भाजपा विधायकों के बहिष्कार के बीच झारखंड ट्राइबल एडवाइजरी काउंसिल की बैठक में कई अहम बातचीत, आदिवासी जमीन का थाना क्षेत्र का प्रावधान समाप्त करने की दी सलाह, स्थानीयता तय कर बहाली करने का सुझाव, झामुमो ने कहा-भाजपा और बाबूलाल मरांडी मानसिक अवसाद से पीड़ित हो चुकी है

राशिफल

रांची : भाजपा विधायकों के बहिष्कार के बीच झारखंड ट्राइबल एडवाइजरी काउंसिल (टीएसी) की बैठक हुई. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में भाजपा के बाबूलाल मरांडी, नीलकंठ सिंह मुंडा और कोचे मुंडा को छोड़कर सारे लोग इस पहली बैठक में मौजूद रहे. इस बैठक में काउंसिल के उपाध्यक्ष सह मंत्री चंपई सोरेन भी मौजूद थे. इस दौरान पूर्व में हुई बैठकों का ब्योरा का अध्ययन किया गया और पहले की भेजी गयी रिपोर्ट को भी खारिज कर दिया गया, जो रघुवर दास की सरकार में गहन अध्ययन के बाद तैयार करायी गयी थी. इस दौरान यह कहा गया कि थाना के स्तर पर जमीन को बेचने पर पाबंदी है. इससे कई काम रुक जाते है. थाना क्षेत्र का बंधन के कारण लोग घर तक नहीं बना पा रहे है. इसको समाप्त किया जाना चाहिए. कई लोगों ने यह भी सुझाव दिया कि जब तक स्थानीयता तय नहीं होती है, तब तक बहाली कराना ठीक नहीं होगा, इस कारण पहले स्थानीयता तय कर दी जाये. इसके अलावा भी कई सुझाव दिये गये. बाद में तय हुआ कि दूसरी बैठक में सारे मुद्दों पर अंतिम फैसला लिया जायेगा. मुख्यमंत्री ने कहा कि अलग-अलग क्षेत्रों का विकास होगा. तभी झारखण्ड को अग्रणी राज्य की श्रेणी में खड़ा किया जा सकता है. राज्य को अलग पहचान दिलाने के लिए आदिवासियों की भूमिका तय करनी होगी. जनजातीय समुदाय के लिए बेहतर कार्य योजना तैयार करने में काउंसिल मददगार साबित होगा. झारखण्ड के 27% आदिवासियों के लिए विशेष चिंतन मंथन करने की जरूरत है, उनके सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक और राजनीतिक पहलुओं को सुदृढ़ करना होगा. आदिवासियों को राज्य का सर्वांगीण विकास का हिस्सा बनाने के लिए कई मानकों को तय करना है. सभी सदस्यों का सुझाव इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा. हमें मिलकर योजनाबद्ध तरीके से विकास की मुख्यधारा से आदिवासी समुदाय को जोड़ना है. मुख्यमंत्री ने कहा कि आदिवासियों को शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में आगे बढ़ाने की जरूरत है. बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है. आदिवासियों के अस्तित्व में उनकी जमीन अहम है. बदलते समय के अनुरूप कार्य करने की आवश्यकता है. आदिवासियों की जनसंख्या में आ रही कमी को रोकना होगा. इसके लिए ठोस उपाय की आवश्यकता है. आदिवासियों के हित में लंबित मुद्दों का निबटारा जल्द से जल्द करने को प्राथमिकता देनी. झारखण्ड ट्राइबल एडवाइजरी काउंसिल के उपाध्यक्ष चम्पई सोरेन ने कहा कि हमें विभिन्न कानूनों के माध्यम से आदिवासियों को लाभ पहुंचाना होगा. सभी सदस्यों के सुझाव के अनुरूप अगली बैठक होगी. परिषद के मूल उद्देश्यों को धरातल में उतारेंगे. झारखण्ड और आदिवासी हित में कार्य होगा. राज्य निर्माण के 20 साल हो चुके हैं आदिवासी उत्थान, आदिवासियों की आर्थिक व्यवस्था, जनसंख्या की कमी का समाधान नहीं हुआ है. अब झारखण्ड ट्राइबल एडवाइजरी काउंसिल के अंतर्गत सभी सुझाव प्राप्त कर प्रदेश में निवास करने वाले आदिवासियों के हित में कार्य करने का प्रयास किया जायेगा. बैठक में झारखण्ड ट्राइब्स एडवाइजरी काउंसिल के सदस्य स्टीफन मरांडी, बंधु तिर्की, सीता सोरेन, दीपक बिरुवा, चमरा लिंडा, भूषण तिर्की, सुखराम उरांव, दशरथ गागराई, विकास कुमार मुंडा, नमन बिक्सल कोंगाडी, राजेश कच्छप, सोनाराम सिंकु एवं मनोनीत सदस्य विश्वनाथ सिंह सरदार और जमाल मुंडा ने अपनी बातों को बैठक के दौरान रखा. इस मौके पर मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव राजीव अरुण एक्का, मुख्यमंत्री के सचिव विनय कुमार चौबे, परिषद के सदस्य सचिव अमिताभ कौशल उपस्थित थे.
झामुमो ने भाजपा पर किया पलटवार

झामुमो ने भाजपा के विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी द्वारा टीएसी की बैठक का बहिष्कार करने का प्रतिवाद किया है. झामुमो के प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि जनजातियों की हित की बात करने वाले बाबूलाल मरांडी तो स्वयं जनजाति समाज से आते हैं, लेकिन उन्होंने इस बैठक का बहिष्कार कर यह साबित कर दिया है कि वे मानसिक अवसाद से पीड़ित है. उनको पहला मुख्यमंत्री बनने पर आदिवासी समाज भी शर्म महसूस करती है. सुप्रियो ने कहा कि जनजाति महिला सदस्य होने का मसला बाबूलाल मरांडी ने उठाया जबकि जामा से तीन बार विधायक सीता सोरेन टीएसी की सदस्य है और वे आदिवासी भी है और महिला भी है. मुख्यमंत्री की जगह आदिवासी बनाये जाने की मांग को भी खारिज कर दिया गया और कहा कि मुख्यमंत्री खुद आदिवासी है तो फिर आपत्ति किस बात की है. उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ के जनजातियों के हित में नियमावली बदली किया गया था और जनजातीय सलाहकार परिषद गठित की गयी थी, जिसका हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने मुहर लगा दी.

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