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kolhan-good-news-कोल्हान के लिए खुशखबरी, सरायकेला में शुरू होगी “सी-प्लेन” योजना, मुंबई की तर्ज पर विकसित करने की योजना

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काल्पनिक तस्वीरे

सरायकेला: आरसीएस उड़ान योजना के तहत सरायेकला खरसावां जिले में भी वाटर एरोड्रम का निर्माण किया जाएगा. केन्द्र सरकार की नागर विमानन मंत्रालय द्वारा बनाए जाने वाले उक्त वाटर एरोड्रम के लिए उपयुक्त स्थल की सूची विभाग द्वारा मांगी गयी है. इसको लेकर जिला प्रशासन द्वारा जिले के चांडिल डैम समेत अन्य उपयुक्त स्थलो की सूची बनाई जा रही है. इस संबंध में विमान संचालन के निदेशक कैप्टन एसपी सिन्हा ने जिले के उपायुक्त को पत्र भेज वाटर एरोड्रम के लिए उपयुक्त सभी जगहो की सूची मांगी गयी है, ताकि इस दिशा में जल्द कार्य शुरु हो सके. वाटर एयरोड्रम के बनने से पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और लोगों की कनेक्टिविटी भी अच्छी होगी. जिले में सी प्लेन के लिए वॉटर एयरोड्रम बनाया जाएगा जिसको लेकर नागरिक उड्डयन मंत्रालय द्वारा जिले में वॉटर एयरोड्रम बनाने के स्थल के प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद कार्य शुरु हो जाएगा. फिर जिले की प्राकृतिक वादियों के साथ-साथ अब डैम से हवाई जहाज उड़ान भरता नजर आएगा. विभिन्न बिंदुओं पर पड़ताल करते हुए एयरोड्रम बनाने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है.  इसके चलने से काफी सुविधा मिलेगी.
क्‍या होता है सीप्‍लेन
सी प्लेन जमीन-पानी दोनों से उड़ान भर सकता है. सी प्लेन को पानी और जमीन पर लैंड कराया जा सकता है. यह महज तीन सौ मीटर के रनवे से उड़ान भर सकता है. तीन सौ मीटर की लंबाई वाले जलाशय का इस्तेमाल हवाई-पट्टी के रूप में संभव है. यह एक घंटे में 250 किमी की दूरी तय कर सकता है.
प्राकृतिक आपदा में कारगर होगा वाटर एयरोड्रम
सरायकेला – खरसावां जिले में वाटर एयरोड्रम बनने से हवाई सेवा शुरू होगी और पर्यटन को गति भी मिलेगी. साथ ही जिले में रोजगार के नए अवसर विकसित होंगे.  प्राकृतिक आपदा के समय काफी उपयोगी साबित होगा. जिला प्रशासन इसका रखरखाव करेगी. साथ ही बिजली- पानी व अन्य सेवाएं उपलब्ध कराने की बात कही.  एक वाटर एयरोड्रम या सीप्लेन बेस खुले पानी का एक ऐसा क्षेत्र होता है, जिसका उपयोग सीप्लेन, फ्लोट-प्लेन और एम्फीबियस विमानों द्वारा लैंडिंग और टेक ऑफ के लिए किया जाता है.

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