प्रधानमंत्री से मिल कर लौटी आयुष्मान योजना की लाभुक दासी कर्मकार, मंत्री सरयू राय व डॉ नागेंद्र सिंह ने किया स्वागत

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जमशेदपुर : आयुष्मान के तहत इलाज कराकर नया जीवन पाने वाली दासी कर्मकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलकर गुरुवार रात जमशेदपुर पहुंची। जमशेदपुर से अपने घर जाने के बजाय वे उन्होंने इलाज करने वाले डॉ नागेंद्र सिंह से मिलने की इच्छा जताई। लेकिन देर रात होने के कारण आयुष्मान के डिस्ट्रिक को-आर्डिनेटर प्रकाश कुमार ने उन्हें घर भेज दिया। लेकिन शुक्रवार को वह गंगा मेमोरियल अस्पताल पहुंचीं, जहां उनका स्वागत खाद्य आपूर्ति मंत्री सरयू राय व अस्पताल के प्रमुख डॉ नागेंद्र सिंह ने किया। इस दौरान मंत्री सरयू राय ने दासी से प्रधानमंत्री से उनकी बातचीत के बारे में पूछा, तो उन्होंने ने बताया कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि कभी प्रधानमंत्री से मिलने का मौका मिलेगा। उन्होंने प्रधानमंत्री को बताया कि आयुष्मान भारत योजना, सिविल सर्जन और गंगा मेमोरियल अस्पताल की बदौलत ही वह जीवित हैं। मंत्री ने दासी से यह भी पूछा कि वह किस प्रकार से आयुष्मान भारत योजना से लाभन्वित हुईं। दासी के परिजनों के साथ डॉ नागेंद्र ने मंत्री सरयू राय को बताया कि दासी कर्मकार को पिछले 22 सालों से ट्यूमर था। उनका ऑपरेशन कर 39 किलो 600 ग्राम का ट्यूमर निकाला गया। इस दौरान मंत्री सरयू राय ने डॉ नागेंद्र सिंह और दासी कर्मकार को पुष्पगुच्छ और अनार का पौधा भेंट कर सम्मानित किया।

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आयुष्मान के तहत इलाज में आनाकानी करनेवाले अस्पतालों पर सख्ती की जरूरत
इसके अलावा मंत्री ने योजना के डिस्ट्रिक को-ऑर्डिनेटर प्रकाश कुमार से जिले के अस्पतालों में योजना के तहत होने वाले इलाज की जानकारी ली। साथ ही निर्देश दिया कि आयुष्मान के तहत इलाज में आनाकानी करने वाले अस्पतालों पर सख्ती की जरुरत है। अगर कोई अस्पताल नफा-नुकसान देखकर कोई पैकेज नहीं लेता है और वह सुविधा उसके अस्पताल में है तो वैसे अस्पतालों के लिए गाइडलाइन बनायी जानी चाहिए। साथ ही मंत्री ने गंगा मेमोरियल अस्पताल में गरीब मरीजों के इलाज में विशेष दिलचस्पी लेने पर डॉ नागेंद्र सिंह को बधाई दी। साथ
ही अस्पताल के विकास में हरसंभव मदद का आश्वासन दिया।

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आयुष्मान योजना से अब तक 1088 मरीजो का इलाज
डॉ नगेंद्र सिंह ने कहा कि योजना के तहत अबतक 1088 मरीजों का इलाज किया जा चुका है। जरूरतमंद व आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को पैकेज के तहत नहीं आने पर भी इलाज किया जाता है। अस्पताल चलाने के लिए धन की जरूरत है, लेकिन पेशे के वसूल व समाज के प्रति दायित्व के तहत यह निर्णय लिया गया है कि पैसे के आभाव में कोई जरूरतमंद इलाज से वंचित नहीं रह सकता है। इसी संकल्प के साथ काम किया जा रहा है और आगे भी किया जाएगा।

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