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president-of-india-election-राष्ट्रपति उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू दिल्ली पहुंची, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा होंगे उनके नामांकन में प्रस्तावक, झारखंड बना राष्ट्रपति चुनाव का केंद्रबिंदू, द्रौपदी की बेटी ने क्या कहा दिल्ली पहुंचकर यह जानें

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नयी दिल्ली : राष्ट्रपति चुनाव को लेकर नयी दिल्ली में सरगर्मी तो तेज है, लेकिन राष्ट्रपति चुनाव का केंद्रबिंदू झारखंड ही है. झारखंड के हजारीबाग से सांसद रहे और देश के पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा जहां विपक्ष के प्रत्याशी बनाये गये है जबकि सत्ताधारी पार्टी भाजपा की ओर से प्रत्याशी झारखंड की राज्यपाल रह चुकी द्रौपदी मुर्मू को बनाया गया है. वैसे तो द्रौपदी मुर्मू का जीतना लगभग तय माना जा रहा है, लेकिन विपक्ष की ओर से यशवंत सिन्हा खुद मैदान में डटे हुए है. द्रौपदी मुर्मू गुरुवार को नयी दिल्ली पहुंची. नयी दिल्ली जाने के पहले उन्होंने अपने ओड़िशा के गांव रायरंगपुर में मंदिर में झाड़ू लगायी और फिर नयी दिल्ली के लिए रवाना हो गयी. उनकी सुरक्षा को बढ़ा दिया गया है. द्रौपदी मुर्मू नयी दिल्ली गयी, जहां उनका आने पर भाजपा के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा ने अभिनंदन किया. उनके साथ केंद्रीय मंत्री अर्जुन मेघवाल, मनोज तिवारी समेत अन्य लोग भी थे. केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा के साथ ही वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास में गयी, जहां उन्होंने प्रधानमंत्री से मुलाकात की. प्रधानमंत्री से मिलने के बाद वे गृह मंत्री अमित शाह से मिली, फिर नयी दिल्ली के कई लोगों से मुलाकात की. इस दौरान भाजपा ने केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा को भी प्रस्ताव बनाया. प्रस्तावक के रुप में उनके नाम को संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने आगे किया. इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी उनके प्रस्तावक है. (नीचे देखे पूरी खबर)

झामुमो के लिए मजबूरी, राष्ट्रपति पद पर द्रौपदी को कर सकती है समर्थन
झामुमो आदिवासियों की पार्टी मानी जाती है. ऐसे में एक आदिवासी चेहरा को भाजपा ने राष्ट्रपति का उम्मीदवार बनाया है. ऐसे में उनके समक्ष यह मजबूरी है कि राष्ट्रपति के तौर पर द्रौपदी मुर्मू का समर्थन करें. झामुमो की संसदीय समिति और केंद्रीय समिति की बैठक शुक्रवार को संभावित है. इसमें फैसला लिया जा सकता है कि उनका समर्थन यशवंत सिन्हा को होगा या द्रौपदी मुर्मू को किया जायेगा. (नीचे देखे पूरी खबर)

द्रौपदी मुर्मू की बेटी ने क्या कहा जानें
राष्ट्रपति की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू की बेटी इतिश्री मुर्मू भी दिल्ली एयरपोर्ट में साथ थी. इतिश्री मुर्मू ने अपनी मां के राष्ट्रपति की उम्मीदवार बनने पर खुशी का इजहार किया और कहा कि उनकी मां की सादगी और आदिवासी चेहरा के कारण काफी लाइक करते है. आदिवासी लोग पुलिस थाने या कोर्ट जाने से डरते है, जब वे किसी आदिवासी व्यक्ति को शीर्ष पद पर देखते हैं तो उनको कुछ विश्वास होता है कि वह भी कुछ कर सकते है. एनडीए की राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू अगर राष्ट्रपति चुनाव जीत जाती है तो भारत के इतिहास में पहली बार होगा कि कोई आदिवासी महिला राष्ट्रपति बन रहा है. पुरुष आदिवासी भी आज तक राष्ट्रपति नहीं बन सका है. (नीचे देखे पूरी खबर)

द्रौपदी मुर्मू ने रायरंगपुर में की गौ सेवा
यह फोटो द्रौपदी मुरमू की है. 15 जून को रात करीब 8 बजे गौ सेवा समिति के लोगों को फोन करके बोली की सुबह में गौ माता की सेवा के लिए गौशाला आना चाहती हैं. इस पर कमेटी के लोगों ने कहा कि इस नेक काम के लिए गौशाला में उनका स्वागत है . रायरंगपुर गौशाला कमेटी के गौशाला में ठीक सुबह 8:30 बजे अपने हाथों से 40-50 रोटी बनाकर गौ माता के लिए लेकर आई थी. कमेटी के करीब 15 सदस्य गौशाला में मौजूद थे. सभी ने द्रौपदी मुर्मू के साथ में गो सेवा की. उसके बाद गौशाला प्रांगण मै स्थित गार्डन में बैठकर सभी ने चाय का आनंद लिया. तत्पश्चात सभी मेंबर द्वारा द्रौपदी मुर्मू की राष्ट्रपति होने के लिए गौ माता से प्रार्थना की और अपनी शुभकामनाएं भी दी. गौ माता की आशीर्वाद से, जो मनोकामना लेकर आई थी, गौ माता ने उनको भरपूर आशीर्वाद के साथ उनकी मनोकामना को भी पूरा किया. (नीचे देखे पूरी खबर)

कौन हैं द्रौपदी मुर्मू?
द्रौपदी मुर्मू का जन्म 20 जून 1958 को ओडिशा में हुआ था. वह दिवंगत बिरंची नारायण टुडू की बेटी हैं. मुर्मू की शादी श्याम चरम मुर्मू से हुई थी. द्रौपदी मुर्मू ओडिशा में मयूरभंज जिले के कुसुमी ब्लॉक के उपरबेड़ा गांव के एक संथाल आदिवासी परिवार से आती हैं. उन्होंने 1997 में अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की और तब से उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा. द्रौपदी मुर्मू 1997 में ओडिशा के राजरंगपुर जिले में पार्षद चुनी गईं. 1997 में ही मुर्मू बीजेपी की ओडिशा ईकाई की अनुसूचित जनजाति मोर्चा की उपाध्यक्ष भी बनी थीं. श्रीमति मुर्मू राजनीति में आने से पहले श्री अरविंदो इंटीग्रल एजुकेशन एंड रिसर्च, रायरंगपुर में मानद सहायक शिक्षक और सिंचाई विभाग में कनिष्ठ सहायक के रूप में काम कर चुकी थीं. द्रौपदी मुर्मू ने 2002 से 2009 तक और फिर 2013 में मयूरभंज के भाजपा जिलाध्यक्ष के रूप में भी कार्य किया. द्रौपदी मुर्मू ओडिशा में दो बार की बीजेपी विधायक रह चुकी हैं और वह नवीन पटनायक सरकार में कैबिनेट मंत्री भी थीं. उस समय बीजू जनता दल और बीजेपी के गठबंधन की सरकार ओडिशा में चल रही थी. ओडिशा विधान सभा ने द्रौपदी मुर्मू को सर्वश्रेष्ठ विधायक के लिए नीलकंठ पुरस्कार से उन्हें सम्मानित किया. द्रौपदी मुर्मू ने ओडिशा में भाजपा की मयूरभंज जिला इकाई का नेतृत्व किया था और ओडिशा विधानसभा में रायरंगपुर क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया था. वह झारखंड की पहली महिला राज्यपाल भी रह चुकी हैं. झारखंड हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश वीरेंद्र सिंह ने मुर्मू को शपथ दिलाई थी. द्रौपदी मुर्मू ने जीवन में आई हर बाधा का मुकाबला किया. पति और दो बेटों को खोने के बाद भी उनका संकल्प और मजबूत हुआ है. द्रौपदी मुर्मू को आदिवासी समुदाय के उत्थान के लिए काम करने का 20 वर्षों का अनुभव है और वे भाजपा के लिए बड़ा आदिवासी चेहरा हैं.

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