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राजनगर : मनरेगा में फर्जी निकासी का मामला-रजिस्ट्रेशन तीन नवंबर 2019 का, मार्च से ही की जा रही है फर्जी निकासी, पत्नी व दिव्यांग बेटी के नाम पर जॉब कार्ड बना कर रुपये कमा रहे मुखिया

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सरायकेला : उदित झारखंड में खबर छपते ही सरायकेला जिले के राजनगर प्रखंड के गोविंदपुर पंचायत के बनकाटी गांव के मनरेगा और नरेगा के तहत फर्जीवाड़ा कर 15 मजदूरों के नाम पर पैसे निकासी का मामला रफा दफा किए जाने की रणनीति बनाने में सभी घोटालेबाज जुट गए हैं. हमारे 25 सितम्बर के अंक में खुलासे के बाद लगातार हम इस घोटाले के जड़ तक पहुंचने में जुटे हुए हैं. वैसे यह काम सरकारी विभाग का होना चाहिए, लेकिन कुम्भकर्णी निंद्रा में लीन सरायकेला प्रशासन सबकुछ लुट जाने के बाद लकीर पीटने पहुंचेगा.

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खबर छपते ही गोपनीय तरीके से चुनिंदा लोगों को बुलाकर जनसभा करायी गयी. जूरी के समक्ष सभी 15 लाभुकों को खड़ा करा दिया गया और उनके समर्थन में फैसला सुनाने का फरमान जारी करा दिया गया. सवाल सोशल ऑडिट रिपोर्ट तैयार करनेवाले अधिकारी पर भी उठ रहा है, जिन्होंने एक दिन पहले अपने रिपोर्ट में घोटाले की पुष्टि की और एक दिन बाद जनसभा में अपनी ही रिपोर्ट को गलत बताते हुए घोटालेबाजों को क्लीन चिट दे दिया. हमने अपने 27 तारीख के अंक में सूत्रों के हवाले से खबर छापी थी, जिसमे हमने दावा किया था कि शिकायतकर्ता वहां पहुंचा था, लेकिन दूसरे पक्ष के लोग इतना हावी थे कि उन्हें अपनी बात रखने का मौका नहीं दिया गया.

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सभा स्थल पर कुछ नोक-झोंक की भी बात हमने बताई थी, जो सही साबित हुई. राजनगर थाना में फर्जी निकासी की आरोपी रसोइया मेमवती महतो ने शिकायतकर्ता आशीर्वाद महतो, करमू महतो, अर्जुन कुमार महतो और सुरेश महतो के खिलाफ शिकायत दर्ज करा दी. इसको लेकर पिछले शुक्रवार को राजनगर थाना में काफी गहमा-गहमी देखने को मिली. दिनभर मामले को रफा-दफा करने की रणनीति बनती बिगड़ती रही. इधर ‘उदित झारखंड’ की पड़ताल में मनरेगा घोटाला में एक और नाम जुड़ गया है. हमारे हाथ एक ऐसे जॉब कार्ड धारी का बुक हाथ लगा है जिसमें लाभुक केशववती महतो का रजिस्ट्रेशन तिथि 3 नवंबर 2019 दर्ज है. जबकि लाभुक पिछले मार्च महीने से ही लाभ उठा रही है. ये ग्राम प्रधान नीलकंठ महतो की पत्नी हैं. इतना ही नहीं हमारे हाथ एक और जॉब कार्ड लगा है जिसकी लाभुक एक दिव्यांग है. उस लाभुक का नाम सबिता महतो है, ये ग्राम प्रधान नीलकंठ महतो की बेटी है. उसे दिव्यांता का पेंशन भी मिलता है. सबसे हैरानी की बात ये है कि इससे मिट्टी खुदाई का काम लिया गया है. अब जरा कोई ये तो बताए कि दिव्यांग भला मिट्टी कैसे खुदाई कर सकती है.

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सरकारी बाबुओं और जनप्रतिनिधियों के आंखों पर आखिर कौन सा चश्मा चढ़ गया है कि इतने बड़े पैमाने पर राजनगर प्रखंड में भ्रष्टाचार जारी है और बस चुपचाप देख रहे हैं. घोटालेबाज और भ्रष्टाचारियों की हिमाकत तो देखिए कि गलती करने के बाद स्वीकार करने के बजाय उल्टे थाना पहुंच घोटाले का खुलासा करने वाले शिकायतकर्ताओं के खिलाफ ही मामला दर्ज कराने पहुंच गए. आपको याद दिलाना चाहेंगे कि हमने अपने 25 सितंबर के अंक में इस मामले का खुलासा किया था कि किस तरह से सरायकेला-खरसावां जिला के राजनगर प्रखंड में नरेगा और मनरेगा के नाम पर लूट और फर्जीवाड़े का खेल चल रहा है. महज 24 घण्टे के भीतर सभी घोटालेबाज सक्रिय हो उठे और सोशल ऑडिट टीम के समक्ष कथित पांच सौ ग्रामीणों की भीड़ जुटा कर सोशल ऑडिट द्वारा सौंपे गए रिपोर्ट को गलत साबित करा दिया गया. वैसे इस बात की जानकारी न तो प्रखंड कार्यालय और न ही स्थानीय जनप्रतिनिधियों द्वारा मीडिया को दी गी. सवाल सोशल ऑडिट टीम पर भी उठता है कि आखिर किस आधार पर उनके द्वारा रिपोर्ट जारी की गई थी? फिलहाल सरायकेला जिले का राजनगर प्रखंड फिर से विवादों में घिर गया है.

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