saraikela-farmers-problem-सरायकेला-खरसावां के किसानों की बढ़ी मुश्किलें, हाथियों के तांडव से सैकड़ों एकड़ खेत बरबाद

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सरायकेला : वैश्विक महामारी कोरोना से जहां उद्योग धंधे बंद पड़े हैं. लाखों की संख्या में युवा बेरोजगारी का मार झेल रहे हैं वहीं किसानों का भी बुरा हाल है. हम बात कर रहे हैं सरायकेला- खरसावां जिले के किसानों की. आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र से बेरोजगार हुए कामगारों ने खेती का रास्ता चुना, लेकिन बदकिस्मती ने उन्हें यहां भी नहीं छोड़ा. ऊपरवाले ने बारिश अच्छी दी, तो किसानों ने भी ऊपरवाले पर भरोसा कर जमकर धान का फसल लगा दिया, लेकिन जैसा कि हर साल फसल के सीजन में होता रहा है वैसा ही इस साल भी शुरू हो चुका है. जहां गजराजों ने धान का फसल लगते ही तांडव शुरू कर दिया है, ये नजारा देखकर आप साफ समझ सकते हैं कि गजराजों ने किस तरह लहलहाते धान के फसलों को रौंदा है. ये नजारा है सरायकेला- खरसावां जिला के गम्हरिया प्रखंड अंतर्गत बुरुडीह गांव का. जहां शुक्रवार देर रात दर्जनों हाथियों के झुंड ने सैकड़ों एकड़ में लगे धान की फसलों को बुरी तरह रौंद दिया.

इतना ही नहीं, हाथियों ने घरों को भी नुकसान पहुंचाया है. आपको बता दें कि इलाके में लगभग सालों भर हाथियों का आतंक रहता है. जिससे ग्रामीण न केवल धान की फसल, बल्कि अन्य मौसमी फसलों से भी वंचित रह जाते हैं. हर सीजन में गजराज किसानों की मेहनत पर पानी फेर जाते हैं. उधर बात करें वन विभाग की तो वन विभाग के कर्मचारियों एवं अधिकारी ग्रामीणों के दुख में पहुंच कर सहानुभूति जरूर दिखा जाते है, लेकिन इनके लिए कोई स्थायी समाधान न तो सरकार के स्तर से अब तक किया गया है, ना ही शासन- प्रशासन की ओर से. ऐसे में वैश्विक महामारी के दौर में ये किसान जाएं तो कहां जाएं. आपको बता दें कि सरायकेला- खरसावां जिला के गम्हरिया, चांडिल ईचागढ़, तिरूल्डीह, खरसावां, कुचाई आदि इलाके में गजराजों का आतंक रहा है. जिन्हें रोक पाने में वन विभाग पूरी तरह से विफल रहा है. फिलहाल बुरुडीह के किसान अपनी किस्मत का रोना रो रहे हैं.

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