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saraikela-heritage-सरायकेला-खरसावां के इस मंदिर में है महाभारत काल के अवशेष, भीम के पांव, अर्जुन के मारे गये तीर, पांडवों के खाना बनाने के लिए तैयार किये गये चूल्हे, अब झारखंड सरकार इसका करेगी विकास, प्रशानिक टीम पहुंची

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महाभारत के भीम के पैरों के निशान.

सरायकेला : झारखंड सरकार का सपना जल, जंगल, जमीन को सुरक्षित करने के साथ सौंदर्यीकरण का कार्य जोरों पर है. इसके तहत सरायकेला-खरसावां जिले के राजनगर प्रखंड का ऐतिहासिक पौराणिक व धार्मिक स्थल भीमखंदा अब और भी सुंदर एवं आकर्षक पर्यटन स्थल बनने जा रहा है. इसके सौंदर्यीकरण के लिए सोमवार को जिला प्रशासन की टीम द्वारा भीमखंदा पर्यटन स्थल का सर्वे किया गया. इस दौरान भीमखंदा ट्रस्ट के सचिव सह झामुमो केंद्रीय सदस्य गोपाल महतो भी उपस्थित थे. बता दें कि राजनगर प्रखंड के बाना पंचायत अंर्तगत बोंबोंगा नदी किनारे बना भीमखंदा बूढ़ा बाबा मंदिर पहले से ही काफी चर्चित है. (नीचे देखे पूरी खबर)

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ऐतिहासिक मंदिर.

ऐसी मान्यता है कि यहां जो भी मन्नते मांगी जाती है, वो पूरी हो जाती है. यहां राज्य के अन्य हिस्सों से भी पर्यटक एवं श्रद्धालु भगवान के दर्शन के लिए लोग आते है. भीमखंदा पौराणिक कथाओं पर आधारित स्थल है. यहां महाभारत काल की कुछ यादें भी छुपी हुई है. इसमे पांडवों द्वारा बनाया गया चुल्हा, जो आज भी उसी स्थान पर सुरक्षित है, बलशाली भीम के पैर के निशान तथा अर्जुन द्वारा छोड़ा गया बाण, जिसमे पेड़ के टहनी के बीचों बीच बना छेद, अब भी महाभारत काल की यादों को दर्शाता है. भीमखंदा को भव्य और आकर्षक पर्यटन स्थल बनाने एवं सौंदर्यीकरण के लिए झारखंड सरकार के परिवहन व आदिवासी कल्याण मंत्री चम्पई सोरेन ने अनुशंसा की थी. इसका परिणाम आनेवाले दिनों में जिलेवासियों को देखने को मिलेगा. बता दें मंत्री चम्पई सोरेन द्वारा वनों की रक्षा एवं धार्मिक स्थलों के संरक्षण हेतु जिले के कई गावों के जाहेर स्थान एवं धार्मिक स्थलों में चारदीवारी करने का कार्य किया जा रहा है, ताकि प्रकृति एवं धार्मिक स्थलों की रक्षा हो सके. उन्होंने बताया कि जनता की जो आस्था है पर्यटन स्थल के रूप में उस आस्था को और विकसित करना है. वहीं स्थानीयों के साथ- साथ दूर दराज से आने वाले दर्शनार्थियों में भी आस्था को विकसित किया जा सके, ताकि हमारी परंपरा और स्थल दोनों सुरक्षित रहे.

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