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Saraikela-plight-of-pandra-panchayat : गांव की सरकार बनने के 11 वर्ष बाद भी बदहाली के आंसू बहा रही पांड्रा पंचायत, विकास के नाम पर दिखावा

राशिफल

संतोष कुमार
सरायकेला : लगभग 23 वर्ष बाद 2010 में राज्य में पंचायत चुनाव होने के बाद जब गावं की सरकार बनी तो लोगो को उम्मीद थी कि अब गावों का विकास होगा. गांव में सड़के, नाली बनेगी और सभी सुविधाओं का लाभ होगा, लेकिन सरायकेला प्रखंड के पांड्रा पंचायत में इससे इतर हुआ है. पंचायत मुख्यालय पांड्रा में ही जनसमस्याओं की अंबार लगी हुई है. गावं में सड़के तो है, लेकिन बरसात के मौसम में पानी की निकासी नही होने से गावं टापू बन जाता है. गांव की मुख्य सड़क पर चार- पांच फीट ऊपर पानी बहता है जिससे लोगो के घरो में भी पानी घुस जाता है. ग्रामीणों ने पानी निकासी की समस्या व नाली निर्माण को लेकर कई बार आवेदन दिया लेकिन कोई सुनवाई नही हुई. पंचायत के पांड्रा गांव में ही 3,92214 रुपये की लागत से खेल मैदान बनाया गया जो अनुपयोगी है. खेल मैदान के नाम पर यहां सरकारी राशि का दुरुपयोग किया गया है. खेल मैदान में केवल पत्थर ही दिख रहा है. (नीचे भी पढ़ें)

खेल का मैदान

ग्रामीणों ने कहा खेल मैदान का निर्माण सही नहीं होने से इसका उपयोग खेल के लिए नहीं होता है. वैसे विकास के नाम पर गांव में स्ट्रीट लाइट लगी है, लेकिन अधिकांश खराब पड़े हैं. पंचायत में सोलर जलमीनार का निर्माण कराया गया है, जिससे लोगो को शुद्व पेयजल उपलब्ध हो रहा है. पांड्रा पंचायत की आबादी करीब पांच हजार है. इतनी आबादी वाले पंचायत में न अच्छी सड़क है और न ही बिजली की अच्छी व्यवस्था. कुल मिलाकर पिछले 5 सालों में पंचायत का अपेक्षित विकास नहीं हुआ है. करीब-करीब सभी शौचालय उपयोगहीन हैं. वर्तमान में मुखिया अनुसूचित जाति पुरुष आरक्षित सीट से हैं. इस बार पंचायत चुनाव के लिए यह अनुसूचित जाति महिला के लिए आरक्षित हो गया है. (नीचे भी पढ़ें)

वीरन्द्र केराई, मुखिया

वीरेन्द्र केराई, मुखिया : पंचायत के मुखिया वीरेन्द्र केराई ने कहा पिछले पांच वर्षो में पंचायत में समुचित विकास के कार्य किए गए. सभी गावों में सड़कें बनाई गई. सभी योग्य लोगो को पेंशन, आवास, उज्जवला योजना समेत अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ दिया गया. कोविड संकट काल में लोगों को मनरेगा से रोजगार उपलब्ध कराए गए, ताकि मजदूरों को अपने गांव में रोजगार मिल सके. उन्होंने कहा पंचायत के विकास में सभी लोगो की भागीदारी रही. वे अपने पांच साल के कार्यकाल से संतुष्ट हैं. (नीचे भी पढ़ें)

लेदु महतो

क्या कहते है ग्रामीण
लेदु महतो : मुखिया वीरेन्द्र केराई का कार्यकाल अच्छा रहा. उन्होंने सभी के लिए अच्छा काम किया और सभी गांव के योग्य लोगो को सरकारी योजना का लाभ दिलाया. गांव के लोगो को जब भी किसी प्रकार की जरुरत होती है तो मुखिया खड़े होते है. (नीचे भी पढ़ें)

केसी महतो

केसी महतो : पंचायत में विकास के नाम पर कुछ काम नही हुआ है. गांव में लगे लगभग सभी स्ट्रीट लाइट खराब हैं. पेयजल के लिए पाइप लाइन लगाया गया, लेकिन घरो तक पानी नही पहुंच पाया है. गांव में सड़कें है लेकिन नाली नही है, जिससे लोगो को भारी असुविधा होती है. आज भी ग्रामीण नारकीय जिंदगी जीने को मजबूर हैं. अधिकांश गांवों में जल निकासी बड़ी समस्या है. इसके चलते सड़कों ने गंदे पानी के तालाब का रूप ले रखा है. ग्रामीणों को इसी गंदगी के बीच होकर गुजरना पड़ता है. (नीचे भी पढ़ें)

ठिबी महतो

ठिबी महतो : कई बार पीएम आवास योजना के लिए पंचायत सचिवालय में जाकर गुहार लगायी, लेकिन अब तक पीएम आवास योजना का लाभ नही मिल पाया है. जिससे मजबूरन जर्जर मकान में रहने को विवश है. गावं में स्ट्रीट लाइट खराब होने से अंधेरा रहता है. शिकायत करने पर भी ठीक नही होता. (नीचे भी पढ़ें)

रोहिनी महतो

रोहिनी महतो : पंचायत में विकास के नाम पर कुछ काम नही हुआ है. गांव में स्ट्रीट लाइट खराब होने से अंधेरा रहता है, जिससे आए दिन चोरी की घटनाएं भी बढ़ रही है. सोलर जलमीनार से कम पानी निकलता है. पीएम आवास का लाभ नही मिल पाया है. टोला में सड़क भी नही बना है बरसात में बहुत परेशानी होती है.

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