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saraikela- मौसमी बीमारियों ने बढ़ाई स्वास्थ्य विभाग की चिंता, सदर अस्पताल के सभी बेड फुल, सिविल सर्जन ने जारी किया अलर्ट, डायरिया व दस्त की शिकायत ज्यादा

राशिफल

संतोष कुमार
सरायकेला:
भीषण गर्मी व बरसाती बीमारी को ले जिला स्वास्थ्य विभाग चौकस है. सदर अस्पताल ओपीडी में पेट संबंधी रोगियों की संख्या अचानक बढ़ गई है. प्रतिदिन पहुंच रहे 200 से अधिक मरीजों में 40 से 50 फीसदी संख्या उल्टी, दस्त के रोगियों की है, जिनमें से कई मरीजों को भर्ती करना पड़ रहा है. इन दिनों वार्ड मरीजों से फुल हैं. उधर, निजी चिकित्सकों के यहां भी मरीजों की भीड़ बढ़ रही है. सदर अस्पताल में अधिकतर मरीज पेट संबंधी, टायफाइड, मलेरिया व वायरल बुखार से पीड़ित आ रहे हैं. इन मरीजों में 80 से 90 मरीज दस्त और उल्टी की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं. ज्यादातर मरीजों को दवा से आराम लग रहा है, जिनको आराम नहीं है उनको वार्ड में भर्ती कर ग्लूकोज चढ़ाया जा रहा है. सदर अस्पताल में सभी बेड फुल हैं.(नीचे भी पढ़े)

वहीं टायफाइड, मलेरिया, वायरल बुखार और डायरिया पर नियंत्रण के लिए सिविल सर्जन डॉ. विजय कुमार ने टास्क फोर्स को चौबीस घंटे मुस्तैद रहने का निर्देश दिया है. कहा कि डायरिया से निपटने के लिए जिला व प्रखंड स्तर पर टास्क फोर्स का गठन किया गया है. सदर अस्पताल व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में कंट्रोल रूम का गठन किया गया है, ताकि कहीं से भी डायरिया की सूचना आने पर मेडिकल टीम गांव पहुंच कर इलाज कर सके. उन्होंने बताया कि ग्रामीण क्षेत्र के साहियाओं को प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी का मोबाइल नंबर दिया गया है ताकि कहीं भी डायरिया की सूचना मिले तो तुरंत इसकी सूचना प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को दी जा सके. उन्होंने बताया कि प्रत्येक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से लेकर आंगनबाड़ी केंद्र में ओआरएस उपलब्ध हैं. अगर कहीं भी डायरिया के लक्षण दिखते हैं, तो मरीजों को ओआरएस का घोल दिया जा सकता है.
सदर अस्पताल में डायरिया, मलेरिया व टायफाइड के 96 मरीज भर्ती
सदर अस्पताल में डायरिया, मलेरिया व टायफाइड के 96 मरीज इलाजरत हैं सबकी स्थिति ठीक है. सदर अस्पताल में डायरिया के 48 मलेरिया के 22 व टायफाइड के 26 मरीज इलाजरत हैं. सदर अस्पताल के डॉ. खेला राम ने बताया कि गर्मी बरसाती बीमारियों से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग अलर्ट है. सभी दवा सदर अस्पताल में उपलब्ध हैं. उन्होंने बताया कि अभी सदर अस्पताल में दो सौ से अधीक मरीज रोज आ रहे हैं. इसमें डायरिया, मलेरिया व टायफाइड के सबसे ज्यादा मरीज आ रहे हैं. डॉ. खेलाराम ने बताया कि टायफायड एक तरह की बुखार है, जो संक्रामक होते हैं. इसी कारण घर में किसी एक सदस्य को टायफाइड होने पर अन्य सदस्यों को भी इसके होने का खतरा रहता है. मौसम में बदलाव और कुछ गलत आदतों के कारण बुखार के वायरस आपको परेशान कर सकती है. टायफायड होने पर आमतौर पर जुकाम, खांसी, सिर दर्द, बदन दर्द, बुखार जैसी समस्याओं की शिकायत रहती है. टायफाइड मरीजों को 103 से 104 डिग्री बुखार रह्ती है. एक सप्ताह के इलाज के बाद मरीज ठीक हो जाते हैं. पूरी तरह मरीज को ठीक होने में चार से छह हफ्ते लग जाते हैं. टायफाइड के दौरान मरीजों को कई तरह की समस्याओं का अनुभव होता है.

डायरिया के लक्षण
उल्टी और दस्त आना. पेट दर्द, कमजोरी और थकान होना.
बुखार और चक्कर आना.

क्या करें जब डायरिया हो
डायरिया से शरीर में हुई पानी की कमी को तुरंत पूरा करने के लिए अधिक से अधिक पानी पीयें.
ओआरएस (ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन) का घोल पीयें.
खाना कम खाएं, पानी, जूस पर्याप्त मात्रा में लेते रहें. फैटी, मसालेदार और तला हुआ खाना न खाएं.

डायरिया से बचाव
खाने से पहले फल और सब्जियों को अच्छे से धो लें.जितनी भूख हो उससे थोड़ा कम खाएं और साफ पानी पीयें.खुले में बिकने वाले खाने से परहेज करें..नाखून छोटे रखें और उनकी साफ-सफाई का ध्यान रखें.

डॉक्टरी सलाह के बाद लें दवा
डा. खेलाराम ने बताया कि मौसम बदलने पर लोगों को कई बीमारियां अपनी चपेट में ले लेती हैं. जैसे जुखाम, खांसी, बुखार. कई लोग ऑफिस या काम पर जाने के लिए एंटीबायोटिक का सेवन करते हैं. ऐसा करना गलत है. बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी दवा लेना शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकता है. साथ ही मानसून में होने वाला बुखार भ्रम भी पैदा करता है. बुखार कई प्रकार के होते हैं. इसमें मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया, पीलिया और टायफायड शामिल हैं. इन सभी के लक्षण मिलते-जुलते हैं. मानसून के बुखार में एस्प्रिन लेना नुकसानदायक हो सकता है, क्योंकि कई किस्म के बुखार में प्लेटलेट्स की संख्या घटने लगती है.

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