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रविवार, मई 9, 2021
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चाकुलिया : सिजबेड़िया गांव को अहिल्या की तरह किसी राम की तलाश

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  • समस्याओं के मकड़जाल में फंसा गांव, एक बार सांसद को छोड़ कोई भी जनप्रतिनिधि नहीं आये गांव

चाकुलिया : चाकुलिया प्रखंड के सिजबेड़िया गांव को अहिल्या की तरह किसी राम की तलाश है, जो इस गांव की सूरत को बदल सकें. सिदबेड़िया गांव के ग्रामीण समस्याओं के मकड़जाल में उलझे हुए हैं .आलम यह है कि गांव तक आने के लिए एक सड़क तक नहीं है. ग्रामीण और बच्चे खेत की पगडंडियों से चलकर आना-जाना करते हैं.
पेयजल की भी घोर समस्या : गांव के ग्रामीण सतीश चंद्र महतो प्रमिला माहतो दुर्गा चरण माहतो और सावित्री माहतो ने बताया कि गांव में 15 परिवार हैं. गांव की कुल जनसंख्या 100 है. ग्रामीणों ने बताया कि गांव में एकमात्र सरकारी कुआं है, जिससे ग्रामीण पानी पीते हैं. बताया कि गांव में लगा एकमात्र चापाकल वर्षो से खराब है. ग्रामीणों ने कई बार उक्त चापाकल की मरम्मत के लिए पंचायत के जनप्रतिनिधियों से गुहार लगायी है, परंतु अब तक किसी ने भी पहल नही की है. न ही चापाकल का निर्माण किया गया है. इससे ग्रामीणों के समक्ष पेयजल की समस्या बनी हुई है.
प्राथमिक विद्यालय का हो गया है विलय : गांव के ग्रामीणों ने बताया कि गांव के प्राथमिक विद्यालय का सरकार की नीति के कारण मलागोड़ा गांव के विद्यालय में विलय कर दिया गया है, जिस कारण गांव का विद्यालय बंद हो गया है. विद्यालय बंद होने से गांव के बच्चों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. बताया कि बरसात के चा माह ग्रामीण और स्कूली बच्चों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. स्कूली बच्चे हाथ में जूता और चप्पल लेकर एक से डेढ़ किमी दूर खेत की पगडंडियों पर चलकर स्कूल जाते हैं और वापस घर आते हैं.
सड़क नहीं होने के कारण होती है परेशानी : ग्रामीणों ने बताया कि गांव तक आने के लिए एक अदद सड़क नहीं है. गांव तक सड़क नहीं होने के कारण बरसात के दिनों में लोगों को काफी परेशानी होती है .बताया कि बरसात में अगर कोई बीमार हो जाए तो उसे उपचार के लिए खटिया पर लादकर एक से डेढ़ किमी दूर ढोकर सड़क तक ले जाना पड़ता है, तब जाकर मरीज का उपचार हो पाता है. लोगों ने बताया कि गांव तक सड़क निर्माण कराने के लिए सांसद विद्युत वरण महतो से कई बार आग्रह किया गया, परंतु अब तक सड़क निर्माण नहीं हो पाया है. गांव में सिर्फ एक बार ही सांसद आए हैं, उनके पश्चात इस गांव में किसी भी जनप्रतिनिधि का पांव नहीं पड़ा है. इस कारण गांव उपेक्षित है. ग्रामीणों ने कहा कि सिदबेड़िया गांव के ग्रामीण अहिल्या की तरह किसी राम की तलाश में है, जो गांव में आएंगे और उद्धार करेंगे.

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