tata-workers-union-trouble-टाटा वर्कर्स यूनियन ने झारखंड हाईकोर्ट में दाखिल किया जवाब, चुनाव को चुनौती देने वाली याचिका पर होनी है सुनवाई, अध्यक्ष, महामंत्री और निर्वाची पदाधिकारी ने रखा पक्ष, जानें क्या रखा गया पक्ष और क्या है मामला

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जमशेदपुर : टाटा स्टील की अधीकृत यूनियन टाटा वर्कर्स यूनियन के हुए चुनाव को चुनौती देने वाली याचिका में प्रतिशपथ पत्र टाटा वर्कर्स यूनियन की ओर से दायर कर दिया गया है. प्रतिशपथ पत्र के जरिये जवाब दे दिया गया है. टाटा वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष संजीव चौधरी टुन्नु, महामंत्री सतीश सिंह और चुनाव कराने वाले निर्वाची पदाधिकारी संतोष सिंह ने संयुक्त रुप से यह जवाब दिया है. रांची जाकर झारखंड हाईकोर्ट में अधिवक्ता के माध्यम से यह जवाब दाखिल किया गया है. इसमें कहा गया है कि चुनाव की सारी प्रक्रिया सही तरीके से कराया गया है. चुनाव के दौरान भी की गयी शिकायतों के बाद यूनियन की ओर से सारे जवाब दिये गये है, जिसके बाद श्रम विभाग ने भी मंजूरी दी. इसके बाद रजिस्टर बी में भी श्रम विभाग की ओर से नयी कमेटी को सूचीबद्ध कर दिया गया है. इस दौरान चुनाव कराने के लिए पर्याप्त समय दिया गया है. इन तीनों ने जवाब दाखिल किया है. अब नये सिरे से यूनियन के मसले पर सुनवाई शुरू होगी. आपको बता दें कि टाटा स्टील की अधीकृत यूनियन टाटा वर्कर्स यूनियन को एक बार फिर से अस्थिर करने की कोशिश की गयी है. यूनियन के ही कमेटी मेंबर रहे अनिल सिंह ने टाटा वर्कर्स यूनियन के चुनाव को अवैध करार देते हुए ट्रेड यूनियन रजिस्ट्रार द्वारा यूनियन की नयी कमेटी के नाम को रजिस्टर बी में दर्ज करने की कार्रवाई को झारखंड हाईकोर्ट में चुनौती दी है. हाईकोर्ट में अनिल सिंह ने याचिका दाखिल कर यह मांग की है कि वर्तमान की 11 पदाधिकारियों और 214 कमेटी मेंबरों के नाम जो रजिस्टर बी में दर्ज किया गया है, उसको खारिज कर दिया जाये क्योंकि गलत तरीके से चुनाव हुआ था. इस चुनाव को खारिज करते हुए नये सिरे से चुनाव कराने की भी मांग की गयी है. इस याचिका में श्रम विभाग, ट्रेड यूनियन रजिस्ट्रार, टाटा स्टील प्रबंधन, टाटा वर्कर्स यूनियन समेत कई लोगों को आरोपी (पार्टी) बनाया गया है. टाटा वर्कर्स यूनियन के चुनाव की वैधता को लेकर अभी हाईकोर्ट का चक्कर भी है. ट्रेड यूनियन रजिस्ट्रार और डीएलसी को चुनाव की वैधता को लेकर की गयी शिकायत के साथ ही हाईकोर्ट में भी एक याचिका दायर की गयी है. इसके तहत कर्मचारी अनिल कुमार सिंह ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. 19 मार्च 2021 को ही एक याचिका दायर की गयी है, जिसकी सुनवाई अभी पेंडिंग है. इसमें ट्रेड यूनियन रजिस्ट्रार, श्रमायुक्त, टाटा वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष और निर्वाची पदाधिकारी संतोष कुमार सिंह को पार्टी बनाया गया है. इसकी सुनवाई हाईकोर्ट में पहले जस्टिस आनंद सेन कर रहे थे, लेकिन चूंकि वे टाटा स्टील और टाटा वर्कर्स यूनियन से संबंधित कई केस अधिवक्ता रहते हुए जस्टिस आनंद सेन देख रहे थे, इस कारण उन्होंने इस केस में सुनवाई से इनकार करते हुए चीफ जस्टिस को केस रेफर कर दिया था. इसके बाद अब अनिल सिंह ने भी एक याचिक हाईकोर्ट में दायर कर दी. इन दो मामलों के बाद यूनियन मुश्किलों में घिरता नजर आ रहा है.
क्या है पूरा मामला
टाटा वर्कर्स यूनियन का चुनाव करीब डेढ़ साल पहले हुआ था. यूनियन के पूर्व सहायक सचिव जे आदिनारायण, अनिल कुमार सिंह और सुनील कुमार सिंह ने चुनाव की निष्पक्षता को लेकर ट्रेड यूनियन रजिस्ट्रार से शिकायत दर्ज कराई थी. उप श्रमायुक्त राजेश प्रसाद ने शिकायतों की जांच कर ट्रेड यूनियन रजिस्ट्रार को सौंप दिया था. ट्रेड यूनियन रजिस्ट्रार ने 9 जून 2021 से लेकर 11 जून 2021 के बीच दो दिनों तक लगातार शिकायतकर्ताओं को और एक दिन अध्यक्ष तथा महामंत्री को पक्ष रखने के लिए तलब किया था. दो दिनों तक लगातार सुनवाई हुई और 11 जून 2021 को अंतिम सुनवाई हुई थी. हालांकि चुनाव के दौरान रजिस्ट्रार ने खुद यूनियन अध्यक्ष व चुनाव पदाधिकारी को निर्देश दिया था कि आपत्तियों का निपटारा कर ही चुनाव कराएं. उस दौरान चुनाव पदाधिकारी ने डीएलसी को जवाब सौंपते हुए यह कहा था कि चुनाव रोकने का अधिकार उनके पास नहीं है. वहीं चुनाव पदाधिकारी के जवाब पर डीएलसी ने शिकायतकर्ताओं से उनका पक्ष लिया जिसमें उन्होंने बिना आपत्तियों के निष्पादन के चुनाव कराने की अपनी शिकायत को दोहराया व चुनाव पदाधिकारी के जवाब पर असंतोष जताया था. इस वजह से चुनाव के करीब छह माह बीत जाने के बाद भी यूनियन के कमेटी को रजिस्टर बी में दर्ज नहीं हो सका था. बाद में ट्रेड यूनियन रजिस्ट्रार ने 11 जून 2021 को रजिस्टर बी में दर्ज किया था.

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