टाटा स्टील में अब होगी बोनस वार्ता, वेज रिवीजन समझौता पर ‘किचकिच’ के बाद वार्ता बंद, जानिये क्यों बंद हो गयी वार्ता, ऐसा क्या बोल दिया मैनेजमेंट ने कि यूनियन को मान्य नहीं, आगे अब क्या होगा

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टाटा स्टील के एमडी टीवी नरेंद्रन व टाटा वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष आर रवि प्रसाद. (फाइल फोटो)


बोनस को लेकर एमडी या वीपी एचआरएम के साथ इन बिंदूओं पर नहीं बनी बात :

  1. टाटा स्टील प्रबंधन चाहती है कि वेज कॉस्ट (वेतन पर होने वाले खर्च) एक सीमा तक ही बढ़ायी जाये और यहां की प्रोडक्टिविटी को भी बढ़ाया जाये, जिसके लिए जरूरी है कि वेज कॉस्ट को घटाकर कर्मचारियों से ज्यादा काम लिया जाये. लेकिन यूनियन की दलील है कि वेज रिवीजन में एमजीबी को बढ़ाया जाये और डीए को भी पुराने स्टाइल में ही रहने दिया जाये
  2. टाटा स्टील मैनेजमेंट की दलील है कि डीए स्टील वेज का नहीं बढ़ सकता है. एनएस ग्रेड को डीए बदलना या एमजीबी बढ़ाने से क्या लाभ. एनएस ग्रेड को वेतन कम करने के लिए बनाया गया था. यूनियन की दलील है कि एनएस ग्रेड के कर्मचारी चाहते है कि 15 हजार रुपये एमजीबी हो, 6 रुपये प्रति प्वाइंट डीए हो और सात साल का समझौता नहीं हो. ऐसे में मैनेजमेंट का कहना है कि एनएस ग्रेड को अगर इतना कर दिया गया तो स्टील वेज से भी ज्यादा हो जायेगा वेज कॉस्ट, फिर एनएस ग्रेड बनाने का क्या लाभ
  3. स्टील वेज के कर्मचारियों को मिलने वाले महंगाई भत्ता (डीए) को किसी भी हाल में चालू नहीं रखा जा सकता है. डीए के फार्मूला को बदलना ही होगा. यूनियन इस पर राजी नहीं है. आंशिक बदलाव चलेगा, लेकिन पूरे तौर पर घटा देने से नुकसानस ही होगा, जो मंजूर नहीं है.
  4. सात साल का ही वेज रिवीजन समझौता किया जाये. यूनियन कह रही है कि छह साल का समझौता किया जाये.

डीए को लेकर क्या दिया गया है मैनेजमेंट का तीन फार्मूला :
फार्मूला 1-यूनियन का कहना है कि जनवरी 2018 के डीए और 31 दिसंबर 2017 तक के बेसिक को जोड़कर एमजीबी बनाया जाये और यहीं वेज रिवीजन हो. मैनेजमेंट का कगहना है कि डीए और एमजीबी को लेकर स्पेशल पे बना दिया जाये, जिस पर पीएफ और ग्रेच्यूटी तो दी जायेगी, लेकिन उस पर फिर से डीए की बढ़ोत्तरी नहीं की जायेगी.
फार्मूला 2-जिसका बेसिक 50 हजार रुपये है, उसको सौ फीसदी डीए, 50 हजार से 70 हजार रुपये तक के वेतन वाले को 60 फीसदी डीए, 70 हजार रुपये से ऊपर के बेसिक वाले को 50 फीसदी डीए देंगे
फार्मूला 3-बेसिक व डीए को मिलाकर एमजीबी बना दिया जाये, लेकिन जो बेसिक तैयार होगा, उस पर ही डीए दिया जायेगा, जो कोलियरी में फार्मूला लागू है. डीए मिलने पर जो वेतन बढ़ेगा, उस पर डीए नहीं मिलेगा बल्कि जो बेसिक अभी तय हुआ है और बेसिक जो बढ़ेगा (डीए की राशि छोड़कर) उस पर ही डीए दिया जायेगा. यानी डीए पर फिर से डीए की बढ़ोत्तरी नहीं दी जायेगी.

अब आगे क्या होगा :

  • अब यूनियन मैनेजमेंट के बुलावे का इंतजार करेगी. बुलावा के बाद फिर से वेज रिवीजन की वार्ता शुरू होगी
  • वैसे टाटा स्टील में दस साल पर भी वेज रिवीजन हुआ है और कर्मचारियों को एरियर की राशि मिला भी है. ऐसे में अभी तो सिर्फ दो साल ही टाटा स्टील के वेज रिवीजन का बीता है, इस कारण यूनियन भी इसको लेकर नहीं हड़बड़ायेगी ताकि मजदूर हित के साथ किसी तरह का समझौता नहीं हो.
  • पहले बोनस समझौता हो जायेगा, जिसके बाद फिर से वेज रिवीजन समझौता की वार्ता होगी.

जमशेदपुर : टाटा स्टील में अब बोनस वार्ता होगी. बोनस को लेकर अब नये सिरे से वार्ता होगी. टाटा स्टील में यह तय किया गया था कि वेज रिवीजन और बोनस का समझौता एक साथ ही होगा, लेकिन यह अब संभव होता नजर नहीं आ रहा है. वेज रिवीजन समझौता को लेकर हुए मैनेजमेंट व यूनियन के बीच की तल्खी और दबाव के साथ हुए ‘किचकिच’ और एमडी टीवी नरेंद्रन के दो टूक जवाब के बाद वार्ता फिलहाल बंद हो गया है. यह तय है कि वेज रिवीजन को लेकर समझौता का वार्ता फिर से आगे बढ़ेगा, लेकिन फिलहाल इसकी वार्ता बंद हो चुकी है. इसका कोई भी रास्ता नहीं निकलने के बाद अब वार्ता को बंद कर दिया गया है. यूनियन के अध्यक्ष आर रवि प्रसाद, महामंत्री सतीश सिंह और डिप्टी प्रेसिडेंट अरविंद पांडेय ने एकजुट होकर फैसला लिया है कि फिलहाल वे लोग वार्ता नहीं करेंगे. इसको लेकर कोई संशोधित तिथि तय होगी, तब वार्ता होगी. वैसे यह मैनेजमेंट और यूनियन का सांझा ‘स्ट्रैटेजी’ (रणनीति) भी हो सकती है क्योंकि हाल के दिनों में वेज रिवीजन समझौता को लेकर चारो ओर से मजदूरों का दबाव अपने डिमांड को लेकर यूनियन पर बनने लगा था और मीडिया की भी नजर थी. इस कारण हो सकता है कि इसको भटकाने की दिशा में भी यह कोशिश हो सकती है, लेकिन यह भी सही बात है कि मैनेजमेंट की ओर से यूनियन को साफ तौर पर कह दिया गया है कि वे लोग किसी भी हाल में ज्यादा ‘वेज कॉस्ट’ (कर्मचारियों के वेतन मद में होने वाले खर्च) को बढ़ाना नहीं चाहते है और ऐसा होने नहीं दी जायेगी. वेज कॉस्ट को एक तय सीमा तक ही बढ़ाया जा सकता है जबकि यूनियन मजदूरों की भावनाओं से मैनेजमेंट को अवगत करा चुकी है, जिसको लेकर वार्ता अब टूट गयी है. एमडी ने भी पूरे मामले को वीपी एचआरएम सुरेश दत्त त्रिपाठी के पास भेज दिया है. इस कारण अभी एक या दो दिनों में वेज रिवीजन समझौता होता नजर नहीं आ रहा है. ऐसे में यूनियन अब चाहती है कि बोनस का समझौता करने की तैयारी चल रही है. बोनस की वार्ता अब एक बार फिर से शुरू होगी. यह उम्मीद है कि दुर्गा पूजा के पहले बोनस समझौता हो जायेगा. बोनस में कोई दिक्कत नहीं है क्योंकि फार्मूला पहले से तैयार है और उसी फार्मूला के तहत ही बोनस का समझौता हो जाना है.

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