टाटा वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष, महामंत्री व डिप्टी प्रेसिडेंट हुए ‘अवतरित’, कल या परसो हो जायेगा वेज रिवीजन व बोनस समझौता, मैनेजमेंट के हित में सिर्फ समझौता करने से महामंत्री व डिप्टी प्रेसिडेंट ने किया इनकार, अध्यक्ष के खिलाफ ही खोला मोरचा, मैनेजमेंट बोनस व वेज साथ करने पर अड़ी

Advertisement
Advertisement


जमशेदपुर : टाटा स्टील के कर्मचारियों के बहुप्रतीक्षित वेज रिवीजन और बोनस समझौता को लेकर चल रहे उठापटक के बीच टाटा वर्कर्स यूनियन में एक बार फिर से हलचल तेज हो चुकी है. यूनियन के अध्यक्ष आर रवि प्रसाद, महामंत्री सतीश सिंह और डिप्टी प्रेसिडेंट अरविंद पांडेय करीब 48 घंटे बाद अचानक से गुरूवार की सुबह टाटा वर्कर्स यूनियन कार्यालय में आ गये, जिसको ‘अवतरित’ होना बताया जा रहा है. करीब 48 घंटे से तीनों पदाधिकारी मैनेजमेंट के साथ एक रिसोर्ट में आनंद के साथ बोनस समझौता और वेज रिवीजन समझौता को लेकर मंत्रणा कर रहे थे. वे लोग न तो मैनेजमेंट और न ही यूनियन के अधिकारियों या कमेटी मेंबरों या मजदूरों से ही मिल रहे थे या उनकी भावनाओं को ही सुन रहे थे. मीडिया, कमेटी मेंबरों, कर्मचारियों के साथ यूनियन के पदाधिकारियों के दबाव के बाद गुरुवार को तीनों ही पदाधिकारी आ गये. हालांकि, वे लोग वेज रिवीजन समझौता करने को तैयार नहीं दिख रहे है.

Advertisement
Advertisement
Advertisement

बताया जाता है कि यूनियन के महामंत्री सतीश सिंह और डिप्टी प्रेसिडेंट अरविंद पांडेय ने अध्यक्ष आर रवि प्रसाद की इच्छा के खिलाफ हमला बोल दिया. एक साथ डीए में बदलाव, सात साल का समझौता, एमजीबी भी कम करने के प्रस्तावों को एक सिरे से नकार दिया. दरअसल, यूनियन के अध्यक्ष आर रवि प्रसाद का यह अंतिम कार्यकाल है. वे भी अगले चुनाव तक रिटायर हो जायेंगे. लेकिन महामंत्री सतीश सिंह और डिप्टी प्रेसिडेंट अरविंद पांडेय का कार्यकाल काफी लंबा है और करियर भी बड़ा है. ऐसे में वे लोग मजदूरों और कमेटी मेंबरों के प्रति महामंत्री और डिप्टी प्रेसिडेंट के प्रति ज्यादा जवाबदेही है. बताया जाता है कि सिर्फ मैनेजमेंट के ही एकतरफा बातों को मानने से महामंत्री और डिप्टी प्रेसिडेंट ने साफ तौर पर इनकार कर दिया. इसके बाद वार्ता नहीं हो पायी, जिसके बाद सारे पदाधिकारी वापस लौट गये. अब यह उम्मीद है कि शुक्रवार या शनिवार को फिर से वार्ता होगी और एक से दो बिंदू पर यूनियन के ऑब्जेक्शन के दूर होने के बाद समझौता हो ही जायेगा. मैनेजमेंट का साफ कहना है कि बोनस और वेज रिवीजन समझौता एक साथ हो जाये क्योंकि सिर्फ यहीं काम मैनेजमेंट के पास नहीं बचा है. इस कारण दोनों मुद्दा साथ-साथ निबटा लेना चाह रहे है.

Advertisement
Advertisement
Advertisement

Advertisement
Advertisement

Advertisement
Advertisement
Advertisement

Advertisement