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Deoghar-व्यापार और व्यापारियों के प्रति सरकार असंवेदनशील, लगातार आंदोलनों के बावजूद अब तक सरकार नहीं ले रही सुध – संप चैम्बर

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देवघर: 25 मार्च को विधानसभा से पारित झारखण्ड राज्य कृषि उपज एवं पशुधन विपणन विधेयक के विरोध में 17 मार्च को फेडरेशन ऑफ झारखण्ड चैम्बर द्वारा आयोजित राज्य स्तरीय सम्मेलन के निर्णय के आलोक में राज्य सरकार द्वारा 2 प्रतिशत बाजार समिति शुल्क लगाने के विरोध में राज्य भर के खाद्य सामग्रियों के व्यापारी आंदोलन कर रहे हैं.चैम्बर द्वारा 15 मई तक विधेयक पर पुनर्विचार करने की समय सीमा देने के बावजूद सरकार ने अभी तक कोई सुध नहीं ली. विवश हो कल 16 मई से पूरे राज्य में खाद्य वस्तु, कृषि एवं वन उपज तथा पशु आहार की आवक यानि खरीद बंद की जा रही है. देवघर सहित राज्य के सभी जिलों में खाद्य वस्तुओं के व्यापारी अपने यहां खाद्य सामग्रियों का नया स्टॉक मंगाना बन्द करेगी.(नीचे भी पढ़े)

जिसके स्टॉक में जितनी सामग्री होगी वह बेची जाएगी. उसके बाद उपभोक्ताओं के लिए बाजार में खाद्य वस्तुओं की कमी हो सकती है. फेडरेशन ऑफ झारखंड चैम्बर के आह्वान पर आवक बंद करने के निर्णय में देवघर के व्यापारी पूरी तरह एकमत और गोलबंद हैं. चैम्बर और संबंधित विभिन्न व्यापारिक संगठन कल से आवक बंद के निर्णय के सुनिश्चित अनुपालन हेतु समुचित अपील और निगरानी करेगी. चैम्बर ने कहा कि खाद्य आपूर्ति की कमी के कारण जन सामान्य को होने वाली इन कठिनाइयों की पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार पर होगी.यहां के व्यापारियों पर 2 प्रतिशत शुल्क के अतिरिक्त दबाव से राज्य में पड़ोसी राज्यों की तुलना में खाद्य वस्तुओं की महंगाई तो बढ़ेगी ही, यहां के व्यवसायियों का व्यापार पर भी प्रतिकूल असर होगा और विस्थापित होने की नौबत आ सकती है.(नीचे भी पढ़े)

चैम्बर राज्य की जनता से भी अपील करती है कि खाद्य सामग्रियों की महंगाई बढ़ाने वाली इस काला कानून और अव्यवहारिक टैक्स का विरोध करें. शुल्क के विरोध में व्यापारियों के आंदोलन के कारण भविष्य में जनता को खाद्य सामग्रियों की संभावित दिक्कतों के लिए चैम्बर ने खेद जताया है.संप चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज देवघर के अध्यक्ष आलोक मल्लिक ने ट्रेड और इंडस्ट्रीज के मामलों में झारखण्ड सरकार की उपेक्षापूर्ण रवैये पर घोर निराशा जताया है. बिल्कुल अव्यवहारिक बाजार समिति शुल्क के मुद्दे पर सरकार की आज जैसी उपेक्षा दिख रही है, इससे पहले भी सरकार उद्योग और औद्योगिक प्रगति के कामों में ऐसी ही उपेक्षा करती रही है. राज्य में कोई भी नया उद्योग नहीं लग रहा.आवंटित मेगा कोल ब्लॉक सहित बड़े उत्खनन कार्य लंबित पड़े हैं. नई और काफी अच्छी औद्योगिक नीति तो आया, लेकिन तदनुरूप सुविधाएं, उद्योग को बढ़ावा देने के लिए ईज ऑफ डूइंग बिजनेस तथा उद्योगों को आवंटित किए गए जमीन पर उद्यमियों को कब्जा दिलाने जैसे कामों में तो राज्य में मखौल की स्थिति है. (नीचे भी पढ़े)

2-3 वर्षों से देवघर के देवीपुर इंडस्ट्रियल एरिया में लगभग 82 प्लॉटों पर पूरी प्रक्रिया के साथ आवंटन होने के बावजूद तथा चैम्बर द्वारा लगातार प्रत्येक स्तर पर सरकार को आगाह और गंभीरता से मांग रखने के बावजूद वहां एक भी प्लॉट पर उद्यमियों को दखल दिलाने की पहल नहीं हुई. सरकार भी ऐसी उपेक्षापूर्ण रवैया अपना सकती है, यह सबके सामने है. आज भी व्यापार और उद्योग ही सबसे बड़ा रोजगार का केन्द्र है, लेकिन सरकार की ऐसी उदासीनता से कई प्रश्न खड़े होते हैं. चैम्बर राज्य सरकार से मार्मिक अपील करती है कि अब तो सुध लो सरकार.मौजूदा बाजार समिति शुल्क वापस लेने के मुद्दे पर चैम्बर दुखित है कि 15 मई 2022 तक पुनर्विचार करने की समय सीमा देने के बावजूद न तो कृषि मंत्री और न ही मुख्यमंत्री ने संवेदना दिखाई और न ही अपने तर्कों से संतुष्ट करने के लिए व्यापारियों से टेबल वार्ता की पहल किया.

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