west-singhbhum-पश्चिम सिंहभूम में ‘लाल माटी का काला खेल’, जांच दल ने बड़े पैमाने पर अवैध उत्खनन व भंडारण पकड़ा, लेकिन ना सील किया ना कोई कार्रवाई, उच्चस्तरीय घपला करने के फिराक में पदाधिकारी

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जांच करने पहुंची टीम.

संतोष वर्मा
चाईबासा : कहने को तो देश में लौह अयस्क और खनीज संपदा व जड़ी बुटियों से भरा-पूरा झारखंड प्रदेश का खुशहाल प्रदेश के रूप में कोल्हान का पश्चिमी सिंहभूम जिला का सारंडा क्षेत्र माना जाता है. लेकिन इस खुशहाल प्रदेश का वास्तविक हालात ऐसी है की आज भी सारंडा क्षेत्र में रहने वाले सुदूरवर्ती क्षेत्र के लोग बदहाल जीवन जीने को बाध्य है. दूसरी ओर इस खुशहाल प्रदेश की बदहाल सुरत देखनी हो तो पश्चिमी सिंहभूम जिले के नोवामुण्डी प्रखंड के बड़ाजामदा व नोवामुण्डी का मुख्य मार्ग जाकर देखें, जहां खुशहाल प्रदेश का बदहाल सूरत देखने को मिलेगा. यह हाल ऐसा नहीं हुआ कि यह क्षेत्र में वर्षो से बंद पड़े क्रशर और माइनिग में अवैध रूप से हुए लौह अयस्क का उत्खनन और ताबड़तोड़ ट्रास्पोटिंग का शिकार होने के कारण यह नौबत आन पड़ी है. जहां इस मार्ग से गुजरने वाले लोग भगवान का नाम लेकर गुजरते है. लेकिन क्षेत्र के लौह अयस्क माफियाओं की चांदी है.

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लौह अयस्क के भंडारण की जांच करते पदाधिकारी.

कभी इस क्षेत्र से राज्य व देश का अर्थव्यवस्था निर्भर हुआ करता और आज लौह अयस्क का अवैध उत्खनन करने और तस्करी करने वाले माफियाओं का बाजार कोरोना जैसी महामारी में भी गर्म रहा. आज यह क्षेत्र अवैध लौह अयस्क उत्खनन किये जाने को लेकर चर्चित है तो दूसरी ओर यह भी चर्चा है की लौह अयस्क का कालाबाजारी करने वाले कारोबारियों का कुछ नहीं हो सकता? ज्ञात हो कि कोरोना काल में जहां वर्षो से बंद पड़ी माइंस और क्रशर प्लांट में जंगल झाड़ भर गये थे. आज वहीं प्लांटों में साफ-सफाई के साथ लौह आयस्क का भारी मात्रा में भंडारण देखने को मिल रहा है. वहीं अवैध रूप से हुए उत्खनन के मामले को लेकर जिला प्रशासन द्वारा एक जांच कमेटी बनाकर मामले की जांच कराई जा रही है ,जो जांच महज दो दिन में 10-12 प्लांटों और क्रशरों का किया गया है. जांच दल को भी बड़ी गड़बड़िया मिली है और बड़े पैमाने पर लौह अयस्क का भण्डार भी मिला है.

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जांच करते हुए अधिकारी.

हालांकि, जांच के बाद वैसे सभी क्रशरों के संचालकों से पेपर सबमिट करने को कहा गया है. जांच दल के पदाधिकारी द्वारा पेपर दिखाने को कहा गया है, लेकिन उसका कोई पेपर नहीं मिल पाया है. वहीं यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि जब जांच दल को इतनी बड़ी भण्डार देखने को मिली और पेपर नहीं दिखा पाये तो क्रशर और माइंस को सील क्यों नहीं किया गया. इसको लेकर चर्चा का विषय बना हुआ है कि कहीं जांच के नाम पर मामले की लीपापोती तो नहीं चल रही है. जांच दल में माइनिंग पदाधिकारी का नहीं होना, भी कई सारे सवाल खड़े कर रहा है. कहने को क्षेत्र में काले कारनामों को लेकर स्थानीय लोगों में विरोध है पर लोग खुलकर सामने नहीं आना चाहते. खैर मामला जांच का है. अब उन लौह अयस्क माफियाओं के विरूद्व जिला प्रशासन द्वारा बड़ी कार्रवाई की जाती है या फिर मामला ढाक के तीन पात साबित होती है, यह जांच रिपोर्ट के बाद ही खुलासा हो सकेगा. वैसे जांच दल इस मामले में कुछ कहने को तैयार नहीं है.

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