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west-singhbhum-गुवा गोलीकांड के शहीदों को झामुमो ने किया नमन, दी श्रद्धांजलि, शीघ्र मिलेगा वन ग्रामवासियों को वन पट्टा व वन पर्चाः जोबा माझी

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चाईबासा; कोरोना वैश्विक महामारी को देखते हुए इस बार 8 सितंबर को बगैर तामझाम के ही गुवा गोलीकाण्ड में शहीद हुए 11 आंदोलनकारियों को सोशल डिस्टेंसिंग के तहत राज्य के कैबिनेट मंत्री जोबा मांझी व आदिवासी जनजाति सह राज्य परिवहन मंत्री चंपाई सोरेन सहित झारखंड मुक्ति मोर्चा के सभी विधायक समाधि स्थल पर हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी श्रद्धांजलि देने पहुंचे. कैबिनेट मंत्री जोबा माझी समाधि स्थल पर श्रद्धाजंलि देने के बाद कहा कि सरकार सारंडा के गांव में विकास की किरण पहुंचाने के लिए कृतस‍ंकल्पित है. सारड़ा में रह रहे लोगों की समस्याओं का समाधान करना ही सरकार की पहली प्राथमिकता है.

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सारंड़ा के लोग जो विकास कार्य से वंचित रहे है अब क्षेत्र के लोगों का विकास होगा. प्रशासन भी सारंडा के गांव के दरवाजा तक पहुंच गया है तो निश्चित रूप से विकास का खाका तैयार किया होगा. वहीं सारंड़ा में 100 साल पुराना वन ग्राम है और वन ग्राम में रहने वाले लोगों को रैयत नहीं मिल पाया है और ना ही अब तक बन पट्टा व पर्चा नहीं दिया गया. जबकि वैसे 39 अतिरिक्त वनग्राम है उसे सरकार अवैध मान रही है और उन ग्रामों को अधिकार नहीं मिल रहा है. तो वैसे वन ग्राम को किस तरह अपना पट्टा देगी सरकार. श्रीमती माझी ने कहा कि वैसे वन ग्राम को वन पट्टा व पर्चा मिलेगा. इसके लिए सरकार वन ग्राम में बसे लोगों को सर्वे कराएगी. इसके लिए सरकारी स्तर पर उनकी सूची तैयार की जाएगी. तैयार सूची के आधार पर ही लोगों को वन पट्टा दिया जाएगा.मंत्री चंपई सोरेन ने कहा कि हेमंत सरकार शहीदों को सम्मान करते हुए राज्य के विकास का काम भी कर रही है. सरकार विकास के प्रति संकल्पित है.

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गुवा गोलीकाण्ड एक नजर:

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झारखंड के इतिहास में आठ सितंबर 10 काले पन्नों के तौर पर दर्ज है जब अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रहे निरीह आदिवासियों पर बीएमपी जवानों द्वारा गोलियां बरसायीं गयी थीं. प्रदर्शन कर रहे लोग शोषण, भूख और बेरोजगारी से मुक्ति पाने के लिए आवाज उठा रहे थे. लोगों की भीड़ पर जब बीएमपी जवानों ने 58 चक्र गोलियां बरसायीं तो जालियांवाला बाग की याद ताजा हो गयी. सूत्रों के अनुसार इस गोलीकांड में 11 आदिवासी और 4 पुलिस कर्मी मारे गये. विदित हो कि ‘जंगल कटाई अभियान’ को लेकर स्थानीय आदिवासियों और प्रशासन के बीच स्थिति तनावपूर्ण बनी रहती थी. इस कारण सरकार ने जंगलों के मध्य बिहार मिलिट्री पुलिस की टुकड़ियां तैनात कर दी थीं.

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जानकारी के मुताबिक पुलिस वालों ने छोटी-छोटी बातों के लिए गांव वालों को तंग करना शुरू कर दिया, जैसे इनके खेतों से मकई या सब्जियां उठा लाना, उनके मुर्गे-मुर्गियों को पकड़ लेना तथा बाजार आने पर उन्हें गिरफ्तार कर लेना आदि. बीएमपी की ज्यादतियों से स्थानीय जनता में आक्रोश भड़क उठा और उन्होंने 8 सितम्बर को एक सभा करने का निर्णय लिया. उक्त सभा में मौजूदा स्थिति पर विचार-विमर्श के उपरांत एक स्मार पत्र तैयार करने कर उसे पुलिस एवं वन विभाग के उच्चाधिकारियों को सौंपने की योजना थी. अत: सोमवार को हवाई अड्डे के समीप लगभग दो-तीन हजार लोग जमा हुए, जिस समय हवाई अड्डे पर भीड़ इकट्ठा हो रही थी, पुलिस ने एलान करना शुरू कर दिया कि नगर में 144 लागू है. अत: किसी प्रकार का जुलूस निकालना या सभा करने पर पाबंदी है. कानून का उल्लंघन करने वालों के साथ कड़ी कार्रवाई की जायेगी.

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