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west singhbhum: आजादी के 70 वर्षों के बाद भी बुनियादी सुविधा के अभाव में जी रहे सारंडा क्षेत्र के निवासी, हेमंत सरकार से विकास की उम्मीद: गीता कोड़ा

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चाईबासा: कोल्हान के सारंडा वन प्रमंडल के चालीस गांव में वनपट्टा, चिकित्सा, यातायात, शिक्षा और रोजगार को लेकर सरकारी स्तर पर समय-समय पर कुछ कार्य भले हुए हैं पर विकास की किरण ग्रासरूट तक नहीं पहुंच पाई है. उक्त जानकारी सिंहभूम सांसद गीता कोड़ा ने विगत दिनों एक बातचीत के क्रम में दी. उन्होंने कहा कि रघुवर सरकार में जो वनवासियों को वनपट्टा दिया गया था, वह जमीनी स्तर नजर नही आ रहा है. इससे पहले पूर्व केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश ने काफी अच्छा प्रयास सारंडा एक्शन प्लान के तहत करने की कोशिश की थी किंतु भाजपा सरकार आते ही उसे बंद करवा दिया गया. आज वे सभी योजनाएं अधूरी है. जिला प्रशासन, सरकार और सामाजिक संस्थाएं, सांरडा की भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर सामूहिक प्रयास करें तो ही वन क्षेत्र का विकास संभव है और वहां के रहने वालों की स्थिति सुधारी जा सकती है. यहां पर पर्यटन की असीम संभावनाएं है जिससे लोगों को रोजगार मिल सकता है और इससे उनकी आदमनी बढ़ेगी तथा रहन सहन में भी सुधार होगा. इसके अलावा वनों उत्पाद आधारित कुटीर उद्योग- धंघे स्थापित कर उन्हें रोजगार दिया जा सकता है. इसके लिए सरकार को संकल्प के साथ काम करना होगा तभी सारंडा के लोगों को विकास हो सकता है. उन्होंने कहा कि हेमंत सोरेन सरकार सारंडा की समस्याओं के प्रति गंभीरता दिखाते हुए जिला प्रशासन को निर्देशित किया है, जो कि एक अच्छी पहल है.

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